फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Delhi Dehradun Expressway: The Delhi-Doon Corridor is a superway to prosperity

Delhi Dehradun Expressway: समृद्धि का सुपर-वे है दिल्ली-दून कॉरिडोर

Wed, 15 Apr 2026 08:22 AM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Wed, 15 Apr 2026 08:22 AM IST
सार

दिल्ली के व्यापारियों के लिए अब उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी की मंडियां महज कुछ घंटों की दूरी पर होंगी। उत्तर प्रदेश के जिन जिलों से यह कॉरिडोर गुजर रहा है, वहां के कृषि आधारित उद्योगों और लघु उद्योगों (MSMEs) के लिए यह एक वरदान है।

विज्ञापन
Delhi Dehradun Expressway: The Delhi-Doon Corridor is a superway to prosperity
दिल्ली से देहरादून एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी अंचल होते हुए उत्तराखंड की वादियों तक पहुंचने वाला दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत की नई 'इकोनॉमिक आर्टरी' (आर्थिक धमनी) है।

विज्ञापन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित यह कॉरिडोर तीन राज्यों के आपसी समन्वय, व्यापार और पर्यटन के अंतर्संबंधों को एक नया धरातल प्रदान करता है। ₹11,963 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार यह 213 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे न केवल भौगोलिक दूरियों को कम करेगा, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को एक सूत्र में पिरोएगा।
विज्ञापन


तीन राज्यों का त्रिकोणीय संगम और आर्थिक लाभ

यह कॉरिडोर दिल्ली की भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करने, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों (बागपत, शामली, सहारनपुर) में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने और उत्तराखंड की आर्थिकी को संजीवनी देने का एक साझा मंच है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली के व्यापारियों के लिए अब उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी की मंडियां महज कुछ घंटों की दूरी पर होंगी। उत्तर प्रदेश के जिन जिलों से यह कॉरिडोर गुजर रहा है, वहां के कृषि आधारित उद्योगों और लघु उद्योगों (MSMEs) के लिए यह एक वरदान है।

सहारनपुर के लकड़ी शिल्प से लेकर पश्चिमी यूपी के चीनी और कृषि बेल्ट तक, लॉजिस्टिक लागत में होने वाली 19 प्रतिशत की कमी सीधे तौर पर उत्पादकों की जेब में मुनाफे के रूप में जाएगी। यह कॉरिडोर भारत के उस 'ग्रोथ इंजन' को शक्ति देगा जो राज्यों की सीमाओं से परे साझा विकास की बात करता है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

उत्तराखंड की आर्थिकी के लिए यह 'ग्रीन हाईवे' एक क्रांतिकारी बदलाव है। पहाड़ के उत्पाद—चाहे वे हर्षिल के सेब हों, चकराता की राजमा हो या बुरांश का जूस—अब दिल्ली और एनसीआर के ड्राइंग रूम तक अपनी ताज़गी खोए बिना पहुंच सकेंगे।

यह कॉरिडोर केवल माल की ढुलाई नहीं करेगा, बल्कि पलायन जैसी गंभीर समस्या का समाधान भी लाएगा। जब गाँव के उत्पाद को शहर की मंडी तेजी से मिलेगी, तो किसान आत्मनिर्भर बनेगा।

कॉरिडोर के किनारे विकसित होने वाले एग्री-लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग प्रोजेक्ट्स स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के वे अवसर पैदा करेंगे, जिनकी तलाश में उन्हें अब तक महानगरों का रुख करना पड़ता था।

पर्यटन का नया 'इको-सिस्टम'

दिल्ली और उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए उत्तराखंड हमेशा से एक पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है, लेकिन सड़कों का भारी दबाव और यात्रा की लंबी अवधि अक्सर बाधा बनती थी। अब दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे में सिमटने से वीकेंड टूरिज्म को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।

इसका लाभ केवल मसूरी या ऋषिकेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पर्यटकों को उत्तराखंड के 'अनछुए' गंतव्यों—जैसे टिहरी की झील, उत्तरकाशी की घाटियाँ और राजाजी नेशनल पार्क के बफर जोन तक—आसानी से पहुँचाएगा। सुगम कनेक्टिविटी का सीधा अर्थ है—होटल, होमस्टे, टैक्सी और हस्तशिल्प व्यवसाय में निवेश की नई लहर।

पारिस्थितिकी और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण

इस प्रोजेक्ट की जो बात इसे वैश्विक स्तर पर खास बनाती है, वह है विकास और पर्यावरण के बीच का संतुलन। एक्सप्रेस-वे का आखिरी 20 किलोमीटर का हिस्सा घने वन क्षेत्रों से गुजरता है।

यहां इंजीनियरिंग का चमत्कार दिखता है—12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर। यह एशिया का सबसे लंबा ऐसा कॉरिडोर है जहाँ ऊपर से गाड़ियाँ दौड़ेंगी और नीचे बिना किसी बाधा या शोर के हाथी, गुलदार और अन्य वन्यजीव स्वच्छंद विचरण करेंगे।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के सहयोग से तैयार यह मॉडल भविष्य की सड़क परियोजनाओं के लिए एक मिसाल है। यह कॉरिडोर न केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण को न्यूनतम करता है, बल्कि अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराता है।

प्रगति की नई पटरी

देहरादून में प्रधानमंत्री के भव्य स्वागत और 12 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता इस कॉरिडोर को अपने सुनहरे भविष्य के मार्ग के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार इस अवसर को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दिल्ली की आधुनिकता, उत्तर प्रदेश की औद्योगिक ऊर्जा और उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा का यह मेल आने वाले समय में उत्तर भारत को आर्थिक रूप से और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। विकास की यह नई पटरी अब बिछ चुकी है, जिस पर समृद्धि की ट्रेन दौड़ने को तैयार है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed