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सात साल में भी पूरी नहीं हो सकीं टंकियां
Updated Tue, 02 May 2017 01:37 AM IST
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water tanki
- फोटो : amar ujala
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छह कांशीराम आवासीय कालोनियों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए सात साल पहले बनाई गईं टंकियों की अब कमियां दूर नहीं की जा सकी हैं। जल निगम और जल संस्थान के अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं। ऐसे में यहां से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। जल निगम अधिकारी इन कमियों को दूर करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में जल संस्थान भी इन्हें हैंडओवर नहीं करा रहा है। इससे लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
जल निगम द्वारा करोड़ों रुपए की लगात से बनाई गई पानी की टंकियां शुरुआत से ही शोपीस बनी हुई हैं। इन टंकियों से डेढ़ हजार परिवारों को जलापूर्ति की योजना थी। जल निगम इन टंकियों को जल संस्थान को हैंडओवर करना चाहता है। लेकिन, जल संस्थान जलापूर्ति सिस्टम में कई कमियों की वजह से इन्हें हैंडओवर नहीं करा रहा है। बुंदेलखंड विकास निधि से सभी कालोनियों में पानी की टंकी, ट्यूबवेल और पंपहाउस और कालोनी में बने आवासों में नलों की फिटिंग व कालोनियों की छतों पर फाइबर की टंकी की व्यवस्था करनी थी। जल संस्थान ने हाल ही में जल निगम को टंकियों में कमियां होने की रिपोर्ट भेजी है।
जल संस्थान द्वारा निकाली गई खामियां
जल निगम ने जल संस्थान को टंकियों हैंडओवर करने के लिए पत्र भेजा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव ने अपने अवर अभियंता विनोद यादव ने टंकियों की भौतिक स्थिति का निरीक्षण करके जल निगम को रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में दर्शाई गईं कमियां बीते कई वर्षों से हैं। हर बार जल संस्थान इन कमियों को दूर करने के लिए जल निगम को बोलता है, लेकिन यह हो नहीं पा रहा।
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आईटीआई के पीछे स्थित कालोनी
यहां पर पंप का संचालन के लिए कर्मी तो तैनात हैं, लेकिन टंकी का निर्माण होने के बाद एक भी दिन चालू नहीं हो सकी हैं। यहां पर पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन ऊपर की किसी भी मंजिल पर पानी नहीं पहुंचता है। टंकी के ऊपर ढक्कन नहीं है, जिस कारण टंकी के भीतर गंदगी है। इसके अलावा ट्यूवबेल नंबर 02 पर मेन स्विच नहीं है।
खिरकापुरा कालोनी
यहां पर पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन निर्माण के बाद से टंकी एक बार भी चालू नहीं हो सकी है। पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन टंकी चालू नहीं होने से ऊपर की मंजिलों पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
आरएमवी कॉलेज के सामने स्थित कालोनी
यहां पर भी पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन टंकी नियमित रुप से चालू नहीं है। कुछ वर्षों से बंद है। एक बोर है जो फेल है। उसके स्थान पर नया ट्यूवबेल कराना जरूरी है।
सुरई घाट कालोनी
यहां पर पंप का संचालन कराने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन टंकी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान बोर कालोनी से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे आंशिक रूप से जलापूर्ति हो पाती है। एक नया बोर कराने की आवश्यकता है।
गोविंद नगर कालोनी
पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात है, फिर भी आज तक टंकी चालू नहीं की गई है। यहां पर दो ट्यूबवेल हैं। इनमें से एक खराब है और एक रीबोर योग्य है। दोनों ट्यूबवेल चालू कराए बिना जलापूर्ति नहीं की जा सकती है।
नारायणपुरा कालोनी
टंकी के निर्माण के बाद से अब तक एक बार भी टंकी चालू नहीं हो सकी है। पाइप लाइन अधूरी है और कई जगहों पर टूटी है। पाइप लाइन को पूरा कराने व मरम्मत कराने की आवश्यकता है। इसके अलावा ओपेन लाइन भी उखड़ चुकी है।
योजना की डीपीआर नहीं दी गई
जल निगम अब तक योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी नहीं दी गई है। बिना डीपीआर के कैसे पता चलेगा कि वास्तविक कार्ययोजना क्या थी और उसके अनुसार कितना कार्य किया गया है। जब तक खामियां दूर नहीं की जाती है और डीपीआर उपलब्ध नहीं कराई जाती है तब तक योजना को हैंडओवर नहीं कराएंगे।
- वीके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान।
कब तक करें मेंटीनेंस
यह कालोनियां करीब सात-आठ वर्ष पुरानी हैं, शुरुआत में ही टंकियों को चालू करा दिया गया था, लेकिन जल संस्थान ने अभी तक इनको अपने अधीन नहीं लिया है। बीते इन वर्षों में कुछ कमियां आ गई हैं, विभाग कब तक मेंटीनेंस करेगा। यदि जल संस्थान हैंडओवर के लिए तैयार हो जाए तो वह कमियां भी दूर कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन जल संस्थान अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटता है।
- अमर सिंह कटियार, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
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जल निगम द्वारा करोड़ों रुपए की लगात से बनाई गई पानी की टंकियां शुरुआत से ही शोपीस बनी हुई हैं। इन टंकियों से डेढ़ हजार परिवारों को जलापूर्ति की योजना थी। जल निगम इन टंकियों को जल संस्थान को हैंडओवर करना चाहता है। लेकिन, जल संस्थान जलापूर्ति सिस्टम में कई कमियों की वजह से इन्हें हैंडओवर नहीं करा रहा है। बुंदेलखंड विकास निधि से सभी कालोनियों में पानी की टंकी, ट्यूबवेल और पंपहाउस और कालोनी में बने आवासों में नलों की फिटिंग व कालोनियों की छतों पर फाइबर की टंकी की व्यवस्था करनी थी। जल संस्थान ने हाल ही में जल निगम को टंकियों में कमियां होने की रिपोर्ट भेजी है।
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जल संस्थान द्वारा निकाली गई खामियां
जल निगम ने जल संस्थान को टंकियों हैंडओवर करने के लिए पत्र भेजा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव ने अपने अवर अभियंता विनोद यादव ने टंकियों की भौतिक स्थिति का निरीक्षण करके जल निगम को रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में दर्शाई गईं कमियां बीते कई वर्षों से हैं। हर बार जल संस्थान इन कमियों को दूर करने के लिए जल निगम को बोलता है, लेकिन यह हो नहीं पा रहा।
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आईटीआई के पीछे स्थित कालोनी
यहां पर पंप का संचालन के लिए कर्मी तो तैनात हैं, लेकिन टंकी का निर्माण होने के बाद एक भी दिन चालू नहीं हो सकी हैं। यहां पर पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन ऊपर की किसी भी मंजिल पर पानी नहीं पहुंचता है। टंकी के ऊपर ढक्कन नहीं है, जिस कारण टंकी के भीतर गंदगी है। इसके अलावा ट्यूवबेल नंबर 02 पर मेन स्विच नहीं है।
खिरकापुरा कालोनी
यहां पर पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन निर्माण के बाद से टंकी एक बार भी चालू नहीं हो सकी है। पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन टंकी चालू नहीं होने से ऊपर की मंजिलों पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
आरएमवी कॉलेज के सामने स्थित कालोनी
यहां पर भी पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन टंकी नियमित रुप से चालू नहीं है। कुछ वर्षों से बंद है। एक बोर है जो फेल है। उसके स्थान पर नया ट्यूवबेल कराना जरूरी है।
सुरई घाट कालोनी
यहां पर पंप का संचालन कराने के लिए कर्मी तैनात हैं, लेकिन टंकी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान बोर कालोनी से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे आंशिक रूप से जलापूर्ति हो पाती है। एक नया बोर कराने की आवश्यकता है।
गोविंद नगर कालोनी
पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात है, फिर भी आज तक टंकी चालू नहीं की गई है। यहां पर दो ट्यूबवेल हैं। इनमें से एक खराब है और एक रीबोर योग्य है। दोनों ट्यूबवेल चालू कराए बिना जलापूर्ति नहीं की जा सकती है।
नारायणपुरा कालोनी
टंकी के निर्माण के बाद से अब तक एक बार भी टंकी चालू नहीं हो सकी है। पाइप लाइन अधूरी है और कई जगहों पर टूटी है। पाइप लाइन को पूरा कराने व मरम्मत कराने की आवश्यकता है। इसके अलावा ओपेन लाइन भी उखड़ चुकी है।
योजना की डीपीआर नहीं दी गई
जल निगम अब तक योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी नहीं दी गई है। बिना डीपीआर के कैसे पता चलेगा कि वास्तविक कार्ययोजना क्या थी और उसके अनुसार कितना कार्य किया गया है। जब तक खामियां दूर नहीं की जाती है और डीपीआर उपलब्ध नहीं कराई जाती है तब तक योजना को हैंडओवर नहीं कराएंगे।
- वीके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान।
कब तक करें मेंटीनेंस
यह कालोनियां करीब सात-आठ वर्ष पुरानी हैं, शुरुआत में ही टंकियों को चालू करा दिया गया था, लेकिन जल संस्थान ने अभी तक इनको अपने अधीन नहीं लिया है। बीते इन वर्षों में कुछ कमियां आ गई हैं, विभाग कब तक मेंटीनेंस करेगा। यदि जल संस्थान हैंडओवर के लिए तैयार हो जाए तो वह कमियां भी दूर कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन जल संस्थान अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटता है।
- अमर सिंह कटियार, अधिशासी अभियंता, जल निगम।