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रिटायर्ड फौजी की सोच ने बदल डाली 'सूखे' गांव की तस्वीर

Mon, 25 Apr 2016 06:39 PM IST
नवल जोशी/ अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
नवल जोशी/ अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत) Updated Mon, 25 Apr 2016 06:39 PM IST
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retired Soldier provide water to village
कृष्णानंद

चंपावत की पाटी विकासखंड का तोली गांव। अब से करीब ढाई दशक पहले तक इस गांव की कहानी भी पानी के लिए तरसते गांवों जैसी थी, लेकिन एक रिटायर्ड फौजी की सोच ने गांव की तस्वीर बदल डाली।

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जल संकट ही दूर नहीं हुआ, तोली की पहचान मछलीपालक गांव रूप में हो गई। कामयाबी के झंडे गाड़ने के बाद अब वे दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। तोली के रिटायर्ड सूबेदार कृष्णानंद गहतोड़ी (68) को 1990 तक पानी के लिए 700 मीटर से एक किमी दूर स्रोत तक जाना पड़ता था।
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इस दिक्कत ने उन्हें फौज में तैनाती के दौरान सिक्किम में प्लास्टिक पाइप के उपयोग की याद दिला दी। उनके जेहन में एकाएक यह आइडिया आया। प्लास्टिक के पाइप से पानी को आंगन तक पहुंचाया। अब संकट पानी का नहीं, बल्कि पानी को बर्बाद होने से बचाने का था। जल संचय की इसी थीम ने उन्हें मत्स्यपालक बना डाला।
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उन्होंने खेत में गड्ढा खोदा और नदी की मछलियों को पानी में डाल दिया। 1990 के दौरान पिथौरागढ़ के तत्कालीन डीएम क्षेत्र भ्रमण करते हुए तोली पहुंचे। मछली तालाब देख उन्होंने कृष्णानंद का उत्साह बढ़ाया और वैज्ञानिकों की टीम को गांव में भेजकर उन्नत प्रजाति का मछली बीज उपलब्ध कराया।

वैज्ञानिक तरीके से मत्स्यपालन के हुनर सिखाए

retired Soldier provide water to village
मछली - फोटो : getty images

पूर्व फौजी के काम को देखते हुए शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र छीड़ापानी के डॉ. केडी जोशी सहित कुछ वैज्ञानिकों ने पानी का परीक्षण करने के बाद वैज्ञानिक तरीके से मत्स्यपालन के हुनर सिखाए। गहतोड़ी ने अपने चार मत्स्य तालाबों में ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, कॉमन काप, रोहू प्रजाति की सैकड़ों मछलियां पाली हैं। इन मछलियों से सालाना 80 हजार से एक लाख रुपये तक आय होती है। तालाबों के किनारे मुर्गीबाड़े बनाए।

मुर्गियों की बीट मछलियों का आहार बनती है। तालाबों के पानी से सब्जी पौधों की सिंचाई करने से पैदावार बढ़ता है। इस काम में उनके छोटे भाई पीतांबर गहतोड़ी भी हाथ बंटा रहे हैं। आमदनी हुई, तो गांव के दूसरे लोग भी प्रेरित हुए। चिंतामणि भट्ट, सुरेश राम, किशोर चंद्र, छत्तर सिंह आदि भी मत्स्य तालाब बनाकर सालभर में हजारों रुपये कमा रहे हैं।

मत्स्य विभाग का कहना है कि कृष्णानंद गहतोड़ी की कामयाबी से प्रेरित होकर तोली, गडियार, किमाड़ी, लड़ा, रौलमेल आदि गांवों में 35 मत्स्य तालाब बन चुके हैं। 68 वर्ष की उम्र में पूर्व सैनिक गहतोड़ी संस्था बना ग्रामीणों को मत्स्यपालन, मौनपालन, सब्जी उत्पादन, बागवानी का प्रशिक्षण देने के साथ जल संचय, पर्यावरण संरक्षण को जागरूक कर रहे हैं।

ये कार्यक्रम जल, पर्यावरण संवर्द्धन के साथ स्वरोजगार में भी फायदेमंद है। पूसा संस्थान नई दिल्ली और मत्स्य अनुसंधान केंद्र भीमताल भी पूर्व फौजी को उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित कर चुका है।

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