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कठुआ के वीर सपूत ने देश के लिए दी प्राणों की आहुति
ब्यूरो, अमर उजाला/कठुआ
Updated Tue, 24 May 2016 12:07 AM IST
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शोक में डूबे गांव के लोग
- फोटो : Amar Ujala
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इंफाल के चंदेल जिले में संदिग्ध आतंकियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में 29 असम राइफल के छह जवाने शहीद हो गए। कठुआ जिले का एक सुपूत भी देश लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर गया।
बोबिया से सटे खनक सपवालवां गांव का पवन सिंह जवानों के उस काफीले में शामिल था जिसपर आतंकियों ने इंफाल के तेनुगोपाल पुलिस स्टेशन के अधीन पड़ते गांव हेंगशी के पास हमला किया।
पवन सिंह की मौत के बाद से ही उसके पैतृक गांव में मातम का माहौल है। गांव की पंचायत के सदस्यों ने शव गांव तक न पहुंचने तक पवन सिंह के परिवार को सूचना न दिए जाने का फैसला लिया। जिसके बाद गांव के लोगों ने घर को जाने वाले रास्ते पर ही लोगों को रोकना शुरू कर दिया।
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पवन सिंह की मौत का समाचार मिलने के गांव का बच्चा बच्चा स्तब्ध है। सीमा से सटे गांव खनक सपवालवां में यह तीसरा वाक्या है जब गांव के सुपूत ने देश के लिए शहादत दी हो। पवन के रिश्तेदारों को युनिट के जवानों ने रविवार शाम घटना की जानकारी दी थी।
पंद्रह दिन पहले ही मां का संस्कार कर डयूटी पर लौटे थे पवन
पवन सिंह की मां अत्रो देवी लंबे समय से बिमार थी। दस अप्रैल 2016 को अत्रो देवी ने अंतिम सांस ली। मां के अत्यधिक बिमार रहने का समाचार मिलने पर पवन दो महीने के लिए घर आया था।
ग्रामीणों ने बताया कि मां की अंतिम घड़ियों में पवन ने दिन रात मां की सेवा की लेकिन बिमारी के आगे बेबस हो गया। आखिरकार मां की मौत के बाद संस्कार के सभी कर्मों को पूरा कर पवन पंद्रह दिन पहले ही डयूटी पर रवाना हुआ था।
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बोबिया से सटे खनक सपवालवां गांव का पवन सिंह जवानों के उस काफीले में शामिल था जिसपर आतंकियों ने इंफाल के तेनुगोपाल पुलिस स्टेशन के अधीन पड़ते गांव हेंगशी के पास हमला किया।
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पवन सिंह की मौत के बाद से ही उसके पैतृक गांव में मातम का माहौल है। गांव की पंचायत के सदस्यों ने शव गांव तक न पहुंचने तक पवन सिंह के परिवार को सूचना न दिए जाने का फैसला लिया। जिसके बाद गांव के लोगों ने घर को जाने वाले रास्ते पर ही लोगों को रोकना शुरू कर दिया।
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पवन सिंह की मौत का समाचार मिलने के गांव का बच्चा बच्चा स्तब्ध है। सीमा से सटे गांव खनक सपवालवां में यह तीसरा वाक्या है जब गांव के सुपूत ने देश के लिए शहादत दी हो। पवन के रिश्तेदारों को युनिट के जवानों ने रविवार शाम घटना की जानकारी दी थी।
पंद्रह दिन पहले ही मां का संस्कार कर डयूटी पर लौटे थे पवन
पवन सिंह की मां अत्रो देवी लंबे समय से बिमार थी। दस अप्रैल 2016 को अत्रो देवी ने अंतिम सांस ली। मां के अत्यधिक बिमार रहने का समाचार मिलने पर पवन दो महीने के लिए घर आया था।
ग्रामीणों ने बताया कि मां की अंतिम घड़ियों में पवन ने दिन रात मां की सेवा की लेकिन बिमारी के आगे बेबस हो गया। आखिरकार मां की मौत के बाद संस्कार के सभी कर्मों को पूरा कर पवन पंद्रह दिन पहले ही डयूटी पर रवाना हुआ था।