एवरेस्ट के बाद अब माऊंट लोतसे पर तिरंगा फहराने की तैयारी
यूं तो मेवात के प्रतिभा की कमी नहीं, लेकिन उन्हें सुविधाएं और संसाधन पर्याप्त प्राप्त हों तो उनके लिए कोई मंजिल दूर नहीं हैं। यहां के युवा खेल, शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं तो एक युवा ने एवरेस्ट पर फतेह हासिल कर यहां के लोगों को जश्न मनाने का मौका दिया है।
खंड के गांव आलदोका निवासी बिजेंद्र सिंह का बेटा सुखबीर सिंह पिछले करीब 15 वर्ष से भारतीय सेना में तैनात हैं। सेना में सुखबीर सिंह ने पर्वतारोहण को अपना विषय चुना और उसके लिए मेहनत शुरू की।
वर्ष 2005 से लेकर अब तक कई चोटियों पर फतेह हासिल करचुके सुबीर ने वर्ष 2013 में अपनी आर्मी टीम के साथ माऊंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया।
इसके अलावा वे 29 मार्च से दूसरी सबसे ऊंची चोटी माऊंट लोतसे पर चढाई करने वाले दल में शामिल होकर नई कामयाबी हासिल करेंगे। बकौल सुखबीर पर्वतारोहण अब उसकी आदत बन गई है और पिछले समय में कई चोटियों पर फतेह हासिल करने के बाद उनके इरादे बुलंद है और माऊंट लोतसे पर चढाई के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
इन चोटियों पर की चढाई
सुखबीर सिंह ने वर्ष 2005 में पर्वतारोहण के अपने अभियान की शुरूआत की और सबसे पहले उन्होंने इसी वर्ष माऊंट मचोई, 2009 में माऊंट बंदरपुंच, 2010 में माऊंट माना, 2011 में माऊंट मारगीता, 19 मई 2013 को माऊंट एवरेस्ट, 2014 में माऊंट कांगटो रेकी, 2014 में माऊंट फ्रेंडशिप, 2015 में माऊंट एवरेस्ट बैस केंप रेस्क्यू और वर्ष 2016 में फास्ट ग्लेशियर में 184 किलोमीटर पैदल यात्रा कर अपने साहस व प्रतिभा का परिचय दिया।
उनकी इन सफलताओं पर जहां पूरा गांव गर्व कर रहा है, वहीं प्रदेश का नाम भी इन्होंने रोशन किया है, क्योंकि प्रदेश में अभी मात्र आधा दर्जन पर्वतारोही ऐसे है जो माऊंट एवरेस्ट पर चढाई कर चुके हैं।
वहीं 29 मार्च से शुरू हो रहे माऊंट लोतसे अभियान में उन्हें कामयाबी मिलती है तो वे प्रदेश के पहले पर्वतारोही होंगे, जिसने दोनों ऊंची चोटियों पर फतेह हासिल की हो। वे इस अभियान में सफल हों, इसके लिए ग्रामीणों ने सुखबीर सिंह को दुआओं के साथ विदा किया और सफलता का आशीर्वाद दिया।