{"_id":"6aa187c1dd3a7093de08e488","slug":"manu-bhaker-wept-inconsolably-while-shouldering-her-grandmothers-bier-jhajjar-news-c-195-1-nnl1001-139727-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"दादी की अर्थी को कंधा देते फूट-फूटकर रोईं मनु भाकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दादी की अर्थी को कंधा देते फूट-फूटकर रोईं मनु भाकर
विज्ञापन
09jjrp21-मनु भाकर की दादी दया कौर का फाइल फोटो।
संवाद न्यूज एजेंसी
साल्हावास। ओलंपियन मनु भाकर गुरु जसपाल राणा के निधन के बाद टूट चुकी थी। वह अभी तक संभल भी नहीं पाई थीं कि उनकी दादी दया कौर (84 वर्ष) अब इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
मनु भाकर ने दादी दया कौर की गुब्बारों से सजी अर्थी को कंधा दिया तो फूट फूटकर रो पड़ीं। मनु को रोते देख ग्रामीणों की आंखें हुईं नम हो गईं। पिता रामकिशन भाकर के आंसू निकल रहे थे और कदम लड़खड़ा रहे थे, तब बेटी मनु ने हाथ पकड़ उनको सहारा देते हुए बेटे का फर्ज अदा किया।
दो दिन पहले अचानक सीने में तेज दर्द उठने के बाद दादी दया कौर को रोहतक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने मंगलवार को अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। जिस वक्त ये दुखद खबर आई, तब गोल्डन गर्ल मनु भाकर मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित शूटिंग अकादमी में वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स की कड़ी तैयारी में जुटी थीं।
विज्ञापन
दादी के निधन की सूचना मिलते ही मनु ने प्रैक्टिस और सारे शेड्यूल को छोड़ दिया और सीधा पैतृक गांव गोरिया के लिए रवाना हो गईं। फूलों और गुब्बारों से सजी अर्थी जब घर के आंगन में रखी गई तो मनु उसके सामने जमीन पर घुटनों के बल बैठ गईं। मनु ने हाथ जोड़कर अपनी दादी को आखिरी बार प्रणाम किया।
इंसेट
हर जीत में याद करती थीं दादी को
मनु का दादी से बहुत गहरा और आत्मीय लगाव था। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रभावित होकर ही दादी दया कौर ने उनका नाम मनु रखा था। जब मनु ने पेरिस ओलंपिक 2024 में एक नहीं बल्कि दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था तो सबसे ज्यादा खुश उनकी दादी दया कौर ही हुई थीं। उस दिन उन्होंने पूरे गांव में लड्डू बांटे थे, ढोल बजवाए थे। कहा था कि पोती ने मेरा नाम रोशन कर दिया। गांव में जब स्वागत समारोह का आयोजन किया गया तो दादी ने मनु भाकर को सोने की चेन बतौर उपहार दी थीं।
विज्ञापन
साल्हावास। ओलंपियन मनु भाकर गुरु जसपाल राणा के निधन के बाद टूट चुकी थी। वह अभी तक संभल भी नहीं पाई थीं कि उनकी दादी दया कौर (84 वर्ष) अब इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
मनु भाकर ने दादी दया कौर की गुब्बारों से सजी अर्थी को कंधा दिया तो फूट फूटकर रो पड़ीं। मनु को रोते देख ग्रामीणों की आंखें हुईं नम हो गईं। पिता रामकिशन भाकर के आंसू निकल रहे थे और कदम लड़खड़ा रहे थे, तब बेटी मनु ने हाथ पकड़ उनको सहारा देते हुए बेटे का फर्ज अदा किया।
विज्ञापन
दो दिन पहले अचानक सीने में तेज दर्द उठने के बाद दादी दया कौर को रोहतक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने मंगलवार को अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। जिस वक्त ये दुखद खबर आई, तब गोल्डन गर्ल मनु भाकर मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित शूटिंग अकादमी में वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स की कड़ी तैयारी में जुटी थीं।
विज्ञापन
दादी के निधन की सूचना मिलते ही मनु ने प्रैक्टिस और सारे शेड्यूल को छोड़ दिया और सीधा पैतृक गांव गोरिया के लिए रवाना हो गईं। फूलों और गुब्बारों से सजी अर्थी जब घर के आंगन में रखी गई तो मनु उसके सामने जमीन पर घुटनों के बल बैठ गईं। मनु ने हाथ जोड़कर अपनी दादी को आखिरी बार प्रणाम किया।
इंसेट
हर जीत में याद करती थीं दादी को
मनु का दादी से बहुत गहरा और आत्मीय लगाव था। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रभावित होकर ही दादी दया कौर ने उनका नाम मनु रखा था। जब मनु ने पेरिस ओलंपिक 2024 में एक नहीं बल्कि दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था तो सबसे ज्यादा खुश उनकी दादी दया कौर ही हुई थीं। उस दिन उन्होंने पूरे गांव में लड्डू बांटे थे, ढोल बजवाए थे। कहा था कि पोती ने मेरा नाम रोशन कर दिया। गांव में जब स्वागत समारोह का आयोजन किया गया तो दादी ने मनु भाकर को सोने की चेन बतौर उपहार दी थीं।