Manipur: सेना के पूर्वी कमांडर बोले- म्यांमार में अस्थिरता और मणिपुर में लोगों के पास हथियार शांति में बाधा
लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने कहा, पूर्वीत्तर में आतंकवाद में कमी आई है। उन्होंने उल्फा के वार्ता समर्थक गुट के केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बीच, उल्फा (आई) प्रमुख परेश बरुआ को हथियार छोड़ कर मुख्य धारा में शामिल होने का आह्वान किया...
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भारतीय सेना के पूर्वी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने बुधवार को कहा कि पड़ोसी देश म्यांमार में अस्थिरता और मणिपुर में युद्धरत समूहों के पास बड़ी संख्या में हथियारों का होना बड़ी चुनौती हैं और शांति बहाली में बाधा बन रही है। उन्होंने कहा, जब तक युद्धरत कुकी और मैतेई समुदायों के सदस्यों के पास हथियार हैं, स्थिति किसी भी समय भड़क सकती है।
उन्होंने कहा, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों का विकास किया जा रहा है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के साधन उपलब्ध कराने का प्रयास किए जा रहे हैं। निश्चित रूप इससे सीमावर्ती गांवों का कायाकल्प होगा। उन्होंने कहा, पूर्वीत्तर में आतंकवाद में कमी आई है। उन्होंने उल्फा के वार्ता समर्थक गुट के केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बीच, उल्फा (आई) प्रमुख परेश बरुआ को हथियार छोड़ कर मुख्य धारा में शामिल होने का आह्वान किया।
जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले कलिता ने आज एक पत्रकार वार्ता में कहा, दोनों समुदायों के पास हथियारों की उपलब्धता, चाहे वे मणिपुर पुलिस शस्त्रागार से चुराए गए हों, या म्यांमार से प्राप्त किए गए हों, एक चुनौती बनी हुई है। सशस्त्र बलों का कर्तव्य हिंसक गतिविधियों को रोकना है। उन्होंने आगे कहा कि उन सभी हथियारों को बरामद करने की जरूरत है, जो पुलिस शस्त्रागार से चुराए गए थे या जो विभिन्न स्रोतों से लोगों को उपलब्ध कराए गए थे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज सभी प्रकार के हथियारों से मुक्त रहे।
पूर्वी सेना के कमांडर ने कहा, सशस्त्र बलों लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और पिछले पांच-छह महीनों में कई हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दोनों समुदायों में विश्वास बहाली प्रयास किए जा रहे हैं। यह कहते हुए कि दोनों समुदायों के राजनीतिक और नागरिक समाज स्तरों पर बातचीत पहले से ही हो रही है, उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यही एकमात्र रास्ता है, जिसके माध्यम से आप स्थायी समाधान की तलाश कर सकते हैं।
कलिता ने कहा कि म्यांमार में जुंटा और प्रतिद्वंद्वी ताकतों के बीच संघर्ष भारत की सीमा के करीब के क्षेत्रों में फैल गया है। इस कारण म्यांमार सीमा के करीब स्थित गांवों से नागरिक शरण लेने के लिए भारतीय सीमा में आते हैं, जो निश्चित रूप से चिंता का कारण बनती है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, असम सहित पूर्वोत्तर में आतंकवाद में काफी कमी आई है। भारतीय सेना भी कई तरह के कार्यक्रम चलाकर युवाओं को रास्ता दिखा रही है। उन्होंने उल्फा के वार्ता समर्थक गुट के केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बीच, उल्फा (आई) प्रमुख परेश बरुआ को हथियार छोड़ कर मुख्य धारा में शामिल होने का आह्वान किया। कलिता ने कहा, सीमावर्ती गांवों में शुरू की गई वाइब्रेट विलेज कार्यक्रम से गांवों कायाकल्प होगा। युवाओं को गांवों में ही बेहतर रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। सीमावर्ती गांव विकास के नए आयाम छुएंगे।