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ज्योतिरादित्य सिंधिया: पिता की छवि और भविष्य की उम्मीद के बीच राजनीति के सबक
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 12 Dec 2018 06:26 PM IST
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शिवराज सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया
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पिता माधवराव सिंधिया की मौत के ढाई महीने बाद, साल 2001 में 17 दिसंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हुए थे। तब सिंधिया की उम्र 30 साल हो रही थी। 17 दिसंबर, 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पहुंचे थे।
माधवराव सिंधिया की जीवनी में वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी और नमिता भंडारे ने लिखा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया तब अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर लौटे थे। उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली थीं और उन्हें घर बुलाया गया था।
उस दिन कांग्रेस मुख्यालय सिंधिया के स्वागत में सज-धजकर तैयार था। तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी और अकबर रोड पर सिंधिया के समर्थन में एमपी के दर्जनों विधायक नारे लगा रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस में आना उस दिन खास था। उस मौके पर मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और मोतीलाल बोरा भी मौजूद थे।
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तब कांग्रेस की महासचिव मोहसिना किदवई ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सिंधिया के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की थी। उस दिन की सबसे खास बात ये थी कि तत्कालीन कांग्रेस प्रमुख सोनिया भी मौजूद थीं और सिंधिया के पार्टी में शामिल होने का स्वागत कर रही थीं। ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस को दूसरा माधवराव सिंधिया मिल गया हो।
सोनिया गांधी को पता था कि माधवराव सिंधिया और राजीव गांधी की दोस्ती कितनी गहरी थी। इस मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे भी मौजूद थीं।
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माधवराव सिंधिया की जीवनी में वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी और नमिता भंडारे ने लिखा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया तब अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर लौटे थे। उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली थीं और उन्हें घर बुलाया गया था।
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उस दिन कांग्रेस मुख्यालय सिंधिया के स्वागत में सज-धजकर तैयार था। तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी और अकबर रोड पर सिंधिया के समर्थन में एमपी के दर्जनों विधायक नारे लगा रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस में आना उस दिन खास था। उस मौके पर मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और मोतीलाल बोरा भी मौजूद थे।
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तब कांग्रेस की महासचिव मोहसिना किदवई ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सिंधिया के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की थी। उस दिन की सबसे खास बात ये थी कि तत्कालीन कांग्रेस प्रमुख सोनिया भी मौजूद थीं और सिंधिया के पार्टी में शामिल होने का स्वागत कर रही थीं। ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस को दूसरा माधवराव सिंधिया मिल गया हो।
सोनिया गांधी को पता था कि माधवराव सिंधिया और राजीव गांधी की दोस्ती कितनी गहरी थी। इस मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे भी मौजूद थीं।
माधवराव से तुलना
ज्योतिरादित्य बनाम माधवराव
ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्वागत में मोहसिना किदवई ने माधवराव सिंधिया के योगदान को याद करते हुए कहा था, ''माधवराव सिंधिया का असमय निधन बहुत दुखद था। कई ऐसे काम थे जिसे माधवराव सिंधिया कर रहे थे। मुझे उम्मीद है कि उन कामों को अब ज्योतिरादित्य सिंधिया अंजाम तक पहुंचाएंगे।'' इस मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि वो अपने पिता के समर्पण भाव की तरह ही देश और कांग्रेस के लिए काम करेंगे।
ज्योतिरादित्य ने इस मौके पर ये भी कहा था, ''किसी महान पिता का बेटा होने में सबसे बड़ा डर ये होता है कि लोग पिता के कद से तुलना करते हैं।'' 28 नवंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया के गृह राज्य मध्य प्रदेश में एक बार फिर से विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहे हैं। यहां कांग्रेस पिछले 15 सालों से सियासी वनवास काट रही है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्कूल की पढ़ाई प्रतिष्ठित दून स्कूल से की है। दून स्कूल को भारत के आभिजात्यों और धनकुबेरों की संतानों का अड्डा कहा जाता है। उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1993 में की और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। कांग्रेस में शामिल होने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता के लोकसभा क्षेत्र गुना और ग्वालियर के विकास कार्यक्रमों में सीधे तौर पर शामिल रहते थे।
18वीं सदी में पेशवा के मराठा साम्राज्य में सिंधिया वंश के लोग भरोसेमंद सेनापति रहे। रानोजी सिंधिया के बेटे महादाजी सिंधिया ने उत्तर भारत में मराठा और दिल्ली में मुगल राज स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी। इसी के सम्मान में मुगल शासक शाह आलम ने महादाजी हिन्दुस्तान के उपशासक के लिए नामांकित किया था, लेकिन महादाजी ने इसे पेशवा को समर्पित कर दिया था।
ज्योतिरादित्य ने इस मौके पर ये भी कहा था, ''किसी महान पिता का बेटा होने में सबसे बड़ा डर ये होता है कि लोग पिता के कद से तुलना करते हैं।'' 28 नवंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया के गृह राज्य मध्य प्रदेश में एक बार फिर से विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहे हैं। यहां कांग्रेस पिछले 15 सालों से सियासी वनवास काट रही है।
चुनाव की जिम्मेदारी
कांग्रेस ने इस बार के चुनाव कैंपेन की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही दी है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अगर चुनाव जीतती है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री बन सकते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया का वो डर बिल्कुल सच है क्योंकि इस चुनाव में लोग उनके व्यक्तित्व की तुलना पिता माधवराव सिंधिया के व्यक्तित्व से कर रहे हैं।ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्कूल की पढ़ाई प्रतिष्ठित दून स्कूल से की है। दून स्कूल को भारत के आभिजात्यों और धनकुबेरों की संतानों का अड्डा कहा जाता है। उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1993 में की और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। कांग्रेस में शामिल होने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता के लोकसभा क्षेत्र गुना और ग्वालियर के विकास कार्यक्रमों में सीधे तौर पर शामिल रहते थे।
18वीं सदी में पेशवा के मराठा साम्राज्य में सिंधिया वंश के लोग भरोसेमंद सेनापति रहे। रानोजी सिंधिया के बेटे महादाजी सिंधिया ने उत्तर भारत में मराठा और दिल्ली में मुगल राज स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी। इसी के सम्मान में मुगल शासक शाह आलम ने महादाजी हिन्दुस्तान के उपशासक के लिए नामांकित किया था, लेकिन महादाजी ने इसे पेशवा को समर्पित कर दिया था।
परिवार की शासन में मौजूदगी बरकरार
परिवार की शासन में मौजूदगी बरकरार
- फोटो : अमर उजाला
विजया राजे सिंधिया की बहू और माधवराव सिंधिया की पत्नी माधवी राव सिंधिया परिवार की शासन में मौजूदगी बरकरार 300 साल बाद भी इस परिवार की शासन में मौजूदगी बनी हुई है। ज्योतिरादित्य लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं। उनकी एक बुआ वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान में बीजेपी सरकार की मुख्यमंत्री और यशोधरा राजे मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री हैं।
इस परिवार में एक साल के भीतर ही दो त्रासदियां आईं। जनवरी 2001 में ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया की मौत हो गई और इसी साल सितंबर में उनके पिता माधवराव सिंधिया की। माधराव सिंधिया की मौत एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में हुई थी। माधवराव जब स्कूल में पढ़ते थे तभी उनके पिता जीवाजीराव का निधन हो गया था। अब इस परिवार की पूरी जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आई।
राजमाता विजया राजे सिंधिया ज्योतिरादित्य की दादी भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीवनी 'अ लाइफ माधवराव सिंधिया' में वीर सांघवी और नमिता भंडारे ने लिखा है, ''विजयराजे ने मुंबई स्थित वर्ली में 20 एकड़ के समुद्र महल प्रॉपर्टी को एक हेलिकॉप्टर कंपनी के कर्ज चुकाने के लिए बेच दी थी। इस कंपनी के पास सात से आठ हेलिकॉप्टर थे। तब विजयराजे सिंधिया जनसंघ (अभी बीजेपी) को आर्थिक मदद देने वाली सबसे अहम स्रोत थीं। इस कंपनी के हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल जनसंघ के नेता जनसभाओं में जाने के लिए करते थे। स्वाभाविक रूप से जनसंघ ने हेलिकॉप्टर के किराए को कभी दिया नहीं और यह कंपनी भारी घाटे में फंस गई थी।''
परिवार को निशाने पर लेते रहे हैं सीएम शिवराज दूसरी तरफ़ बीजेपी के कई नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर राजघराने से होने को लेकर ताना कसते रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चुनावी विज्ञापन में भी इस परिवार को प्रमुखता से निशाने पर लिया गया है।
शिवराज सिंह चौहान की अलग-अलग तस्वीर गरीब महिलाओं और पुरुषों के मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख अखबारों के पहने पन्ने पर छपती है और उसमें लिखा होता है- 'वो महलों के वैभव से गरीबी हटाने का स्वांग रचाते रहे, हम गरीबों का पक्का मकान बना उनका स्वाभिमान बढ़ाते रहे। माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज!'
महाराज संबोधन सिंधिया परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ज्योतिरादित्य कई बार कह चुके हैं कि उन्हें शाही संबोधन के साथ न बुलाया जाए। एक इंटरव्यू में सिंधिया ने कहा था, ''मेरे पूर्वज ग्वालियर के शासक थे। मैं सांसद हूं और पब्लिक स्कूल, हार्वर्ड और स्टेनफोर्ड से पढ़ा हूं। कृपया ये शाही संबोधन का इस्तेमाल बंद करें।''
इस परिवार में एक साल के भीतर ही दो त्रासदियां आईं। जनवरी 2001 में ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया की मौत हो गई और इसी साल सितंबर में उनके पिता माधवराव सिंधिया की। माधराव सिंधिया की मौत एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में हुई थी। माधवराव जब स्कूल में पढ़ते थे तभी उनके पिता जीवाजीराव का निधन हो गया था। अब इस परिवार की पूरी जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आई।
राजमाता विजया राजे सिंधिया ज्योतिरादित्य की दादी भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीवनी 'अ लाइफ माधवराव सिंधिया' में वीर सांघवी और नमिता भंडारे ने लिखा है, ''विजयराजे ने मुंबई स्थित वर्ली में 20 एकड़ के समुद्र महल प्रॉपर्टी को एक हेलिकॉप्टर कंपनी के कर्ज चुकाने के लिए बेच दी थी। इस कंपनी के पास सात से आठ हेलिकॉप्टर थे। तब विजयराजे सिंधिया जनसंघ (अभी बीजेपी) को आर्थिक मदद देने वाली सबसे अहम स्रोत थीं। इस कंपनी के हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल जनसंघ के नेता जनसभाओं में जाने के लिए करते थे। स्वाभाविक रूप से जनसंघ ने हेलिकॉप्टर के किराए को कभी दिया नहीं और यह कंपनी भारी घाटे में फंस गई थी।''
परिवार को निशाने पर लेते रहे हैं सीएम शिवराज दूसरी तरफ़ बीजेपी के कई नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर राजघराने से होने को लेकर ताना कसते रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चुनावी विज्ञापन में भी इस परिवार को प्रमुखता से निशाने पर लिया गया है।
शिवराज सिंह चौहान की अलग-अलग तस्वीर गरीब महिलाओं और पुरुषों के मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख अखबारों के पहने पन्ने पर छपती है और उसमें लिखा होता है- 'वो महलों के वैभव से गरीबी हटाने का स्वांग रचाते रहे, हम गरीबों का पक्का मकान बना उनका स्वाभिमान बढ़ाते रहे। माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज!'
महाराज संबोधन सिंधिया परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ज्योतिरादित्य कई बार कह चुके हैं कि उन्हें शाही संबोधन के साथ न बुलाया जाए। एक इंटरव्यू में सिंधिया ने कहा था, ''मेरे पूर्वज ग्वालियर के शासक थे। मैं सांसद हूं और पब्लिक स्कूल, हार्वर्ड और स्टेनफोर्ड से पढ़ा हूं। कृपया ये शाही संबोधन का इस्तेमाल बंद करें।''
ज्योतिरादित्य की छवि
ज्योतिरादित्य सिंधिया
- फोटो : amar ujala
इसी हफ्ते बीजेपी के ताने को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया से पूछा गया तो उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा, ''अगर किसी खास परिवार में जन्म होना ही जुल्म है तो ये जुल्म मुझे हर बार स्वीकार है। लेकिन जो तंज कसते हैं वो मेरी बुआ महारानी वसुंधरा राजे के बारे में क्या सोचते हैं। दूसरी बुआ श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया मध्य प्रदेश में मंत्री हैं, उनके बारे में क्या सोचते हैं और राजमाता के बारे में क्या सोचते हैं।'' ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक कहते हैं कि जिस राजघराने ने मध्य प्रदेश में बीजेपी और संघ की जड़ें जमाने में इतनी मदद की हो, उस पर इस तरह से तंज कसना बीजेपी के पाखंड को ही दिखलाता है।
आरएसएस और जनसंघ के साथ राजमाता विजयराजे सिंधिया हमेशा पूरे मन से रहीं। इसी वजह से विजयराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के मां-बेटे के संबंध एक किस्म की दूरी बनी रही।1957 में कांग्रेस से सांसद बनने के बाद विजयराजे सिंधिया जनसंघ में आ गई थीं और उसके बाद मरते दम तक बीजेपी के साथ रहीं। वहीं माधवराव सिंधिया 1977 में ही कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 1984 में राजीव गांधी और माधव राव सिंधिया की अच्छी दोस्ती हो गई थी। राजीव गांधी माधव राव सिंधिया से करीब एक साल बड़े थे। उसी तरह राहुल गांधी 48 साल के हैं और ज्योतिरादित्य 47 साल के और दोनों के बीच अच्छी दोस्ती है।
राकेश पाठक कहते हैं, ''माधवराव सिंधिया की छवि से लोग ज्योतिरादित्य की तुलना करते हैं। मैं तुलना करता हूं तो पाता हूं कि ज्योतिरादित्य अब जमीन की राजनीति करते हैं और उन्होंने राजघराने के बोझ को उतारकर रख दिया है। शुरू में जब वो विदेश से पढ़कर आए थे तो लोगों के बीच घुल मिल नहीं पाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब तो वो बूथों पर लोगों के साथ चने खाते दिखते हैं।'' हालांकि उनकी बुआ यशोधरा राजे जो कि बीजेपी में हैं, वो कई बार कह चुकी हैं कि उन्हें लोग श्रीमंत कहकर ही बुलाएं। श्रीमंत संबोधन मराठा शासकों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
माधवराव सिंधिया नौ बार लोकसभा चुनाव जीते और ज्योतिरादित्य सिंधिया चौथी बार सांसद बने हैं। वसुंधरा और यशोदा राजे सिंधिया से ज्योतिरादित्य सिंधिया के रिश्तों में बहुत गर्मजोशी नहीं है। जब राजमाता विजयराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया जिदा थे तभी इस परिवार में संपत्ति के लिए टकराव शुरू हो गया था।
माधवराव सिंधिया ने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जनसंघ से ही की थी, लेकिन 1977 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया में अक्सर माधव राव सिंधिया को देखने की कोशिश की जाती है। कहा जाता है कि माधवराव सिंधिया अपने बेटे की तुलना में ज्यादा समावेशी थे। क्या वाकई ऐसा था।
आरएसएस और जनसंघ के साथ राजमाता विजयराजे सिंधिया हमेशा पूरे मन से रहीं। इसी वजह से विजयराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के मां-बेटे के संबंध एक किस्म की दूरी बनी रही।1957 में कांग्रेस से सांसद बनने के बाद विजयराजे सिंधिया जनसंघ में आ गई थीं और उसके बाद मरते दम तक बीजेपी के साथ रहीं। वहीं माधवराव सिंधिया 1977 में ही कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 1984 में राजीव गांधी और माधव राव सिंधिया की अच्छी दोस्ती हो गई थी। राजीव गांधी माधव राव सिंधिया से करीब एक साल बड़े थे। उसी तरह राहुल गांधी 48 साल के हैं और ज्योतिरादित्य 47 साल के और दोनों के बीच अच्छी दोस्ती है।
राकेश पाठक कहते हैं, ''माधवराव सिंधिया की छवि से लोग ज्योतिरादित्य की तुलना करते हैं। मैं तुलना करता हूं तो पाता हूं कि ज्योतिरादित्य अब जमीन की राजनीति करते हैं और उन्होंने राजघराने के बोझ को उतारकर रख दिया है। शुरू में जब वो विदेश से पढ़कर आए थे तो लोगों के बीच घुल मिल नहीं पाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब तो वो बूथों पर लोगों के साथ चने खाते दिखते हैं।'' हालांकि उनकी बुआ यशोधरा राजे जो कि बीजेपी में हैं, वो कई बार कह चुकी हैं कि उन्हें लोग श्रीमंत कहकर ही बुलाएं। श्रीमंत संबोधन मराठा शासकों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
माधवराव सिंधिया नौ बार लोकसभा चुनाव जीते और ज्योतिरादित्य सिंधिया चौथी बार सांसद बने हैं। वसुंधरा और यशोदा राजे सिंधिया से ज्योतिरादित्य सिंधिया के रिश्तों में बहुत गर्मजोशी नहीं है। जब राजमाता विजयराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया जिदा थे तभी इस परिवार में संपत्ति के लिए टकराव शुरू हो गया था।
चार बार सांसद बने ज्योतिरादित्य
ग्वालियर का जय विलास पैलेस इस परिवार का पुश्तैनी आवास है। यूरोपीय शैली में साल 1874 में बना यह पैलेस 28 एकड़ में है। इसे डिजाइन सर माइकल फिलोस ने किया था। 1990 में इस परिवार कलह तब चरम पर पहुंच गई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अपने पिता और दादी को पुश्तैनी संपत्ति बेचने से रोकने का आग्रह किया। एक अनुमान के मुताबिक देश भर में सिंधिया की संपत्ति करीब 40 हजार करोड़ रुपये की है।माधवराव सिंधिया ने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जनसंघ से ही की थी, लेकिन 1977 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया में अक्सर माधव राव सिंधिया को देखने की कोशिश की जाती है। कहा जाता है कि माधवराव सिंधिया अपने बेटे की तुलना में ज्यादा समावेशी थे। क्या वाकई ऐसा था।
माधवराव सिंधिया और जूते की कहानी
माधवराव सिंधिया
- फोटो : AMAR UJALA
राजनीतिक विश्लेषक लज्जा शंकर हरदेनिया ऐसा नहीं मानते हैं। वो कहते हैं, ''वो एक दिलचस्प वाकया है। मैं उनसे दिल्ली मिलने गया था। उनके दरबान ने मुझे जूते उतारने को कहा तो मैंने मना कर दिया। मैंने पूछा कि क्या माधवराव घर में जूते नहीं पहनते हैं। इसी बीच माधवराव की नजर मेरे ऊपर पड़ गई और उन्होंने कहा कि अरे आपके लिए ये नियम नहीं है। अंदर आइए। मेरे बाद उनका जो स्पेशल असिस्टेंट जितनी बार आया, जूते उतारकर आया। मैं उस वक़्त इकनॉमिक टाइम्स में काम करता था और संपादक को ये सुनाया तो उन्होंने कहा कि इस पर लिखो। मैंने लिख दिया और छप भी गया। छपने के बाद माधवराव ने मुझसे महीनों बात नहीं की।'' हरदेनिया ने बताया, ''शशिभूषण दिल्ली से सांसद रहे थे। वो जनसभाओं में लोगों से पूछते थे कि सिंधिया साहब के पैर पड़ने वाले हाथ उठाओ। कई हाथ उठाते थे तो शशिभूषण कहते थे, आपने उनके पैर नहीं जूते पड़े। उनके पैर तो आपने देखे ही नहीं होंगे।''
राकेश पाठक कहते हैं कि ज्योतिरादित्या सिंधिया के बारे में इस तरह की आपबीती नहीं सुनाई जा सकती है क्योंकि अब वो बहुत ही सहज हो गए हैं। पाठक कहते हैं कि सिंधिया अब तो धरने में जींस-टीशर्ट और सैंडल में चले आते हैं।
सिंधिया कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की एक रैली को संबोधित करने जा रहे थे। इस हेलिकॉप्टर में हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुज शर्मा, आज तक से रंजन झा और गोपाल बिष्ट और इंडियन एक्सप्रेस के संजीव सिन्हा थे। इसके साथ ही सिंधिया के निजी सचिव रुपिंदर सिंह भी थे। वीर सांघवी ने अपनी किताब में लिखा है, ''माधवराव सिंधिया के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी जाने वाली थीं, लेकिन ऐन मौके पर बुखार से पीड़ित हो जाने के कारण वो नहीं गई थीं। हेलिकॉप्टर के पायलट विवेक गुप्ता 12।59 बजे आ गए थे और उनके साथ को-पायलट ऋतु मलिक थीं। 21 साल की ऋतु को एक महीने पहले ही व्यावसायिक उड़ान का लाइसेंस मिला था और उनकी यह पहली उड़ान थी। 1।25 बजे हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी। हेलिकॉप्टर मैनपुरी जिले के एक गांव मोटा के पास क्रैश कर गया।''
सांघवी ने लिखा है, ''ज्योतिरादित्य उस वक्त अपने एक पुराने दोस्त के साथ लंच करने बाहर गए थे। ज्योतिरादित्य की माधवराव सिंधिया से 29 सितंबर की रात बात हुई थी। माधवराव ने अपने बेटे से कहा था कि वो सिमी पर बात करना चाहते हैं।'' लंच के दौरान ही ज्योतिरादित्य के पास उनके दोस्त निखिल खन्ना ने उन्हें फोन कर पिता की मौत की जानकारी दी।' न राजीव गांधी रहे और न ही माधवराव सिंधिया और कांग्रेस की जिम्मेदारी राहुल और ज्योतिरादित्य जैसे नेताओं के कंधे पर है जब कांग्रेस सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है।
राकेश पाठक कहते हैं कि ज्योतिरादित्या सिंधिया के बारे में इस तरह की आपबीती नहीं सुनाई जा सकती है क्योंकि अब वो बहुत ही सहज हो गए हैं। पाठक कहते हैं कि सिंधिया अब तो धरने में जींस-टीशर्ट और सैंडल में चले आते हैं।
वो दिन जब हुआ माधवराव सिंधिया का निधन
ज्योतिरादित्य सिंधिया के जीवन का सबसे त्रासदीपूर्ण दिन 30 सितंबर, 2001 था। माधवराव सिंधिया इस दिन दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से आठ सीटों वाले हेलिकॉप्टर से कानपुर की ओर रवाना हुए थे। सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें कैंपेन की निगरानी का जिम्मा दिया था।सिंधिया कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की एक रैली को संबोधित करने जा रहे थे। इस हेलिकॉप्टर में हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुज शर्मा, आज तक से रंजन झा और गोपाल बिष्ट और इंडियन एक्सप्रेस के संजीव सिन्हा थे। इसके साथ ही सिंधिया के निजी सचिव रुपिंदर सिंह भी थे। वीर सांघवी ने अपनी किताब में लिखा है, ''माधवराव सिंधिया के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी जाने वाली थीं, लेकिन ऐन मौके पर बुखार से पीड़ित हो जाने के कारण वो नहीं गई थीं। हेलिकॉप्टर के पायलट विवेक गुप्ता 12।59 बजे आ गए थे और उनके साथ को-पायलट ऋतु मलिक थीं। 21 साल की ऋतु को एक महीने पहले ही व्यावसायिक उड़ान का लाइसेंस मिला था और उनकी यह पहली उड़ान थी। 1।25 बजे हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी। हेलिकॉप्टर मैनपुरी जिले के एक गांव मोटा के पास क्रैश कर गया।''
सांघवी ने लिखा है, ''ज्योतिरादित्य उस वक्त अपने एक पुराने दोस्त के साथ लंच करने बाहर गए थे। ज्योतिरादित्य की माधवराव सिंधिया से 29 सितंबर की रात बात हुई थी। माधवराव ने अपने बेटे से कहा था कि वो सिमी पर बात करना चाहते हैं।'' लंच के दौरान ही ज्योतिरादित्य के पास उनके दोस्त निखिल खन्ना ने उन्हें फोन कर पिता की मौत की जानकारी दी।' न राजीव गांधी रहे और न ही माधवराव सिंधिया और कांग्रेस की जिम्मेदारी राहुल और ज्योतिरादित्य जैसे नेताओं के कंधे पर है जब कांग्रेस सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है।
