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जम्मू-कश्मीर: 370 हटने के बाद घाटी में आई शांति पाकिस्तान को खल रही, आईएसआई की साजिश को अंजाम दे रहे जमात के सदस्य

Sun, 08 Aug 2021 09:26 PM IST
करिश्मा चिब बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 08 Aug 2021 09:26 PM IST
सार

जमात जम्मू-कश्मीर में दोबारा अलगाववाद और अशांति को हवा देने में जुटा।-संगठन के फलह-ए-आम ट्रस्ट को खाड़ी देशों से भारी भरकम राशि देशविरोधी गतिविधियों के लिए हवाला से भेजे जाने के इनपुट।

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Jammu and Kashmir: After the abrogation of 370, the peace in the valley is disturbing Pakistan, the members of the Jamaat carrying out the ISI conspiracy
अनुच्छेद 370 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आतंकी संगठनों से रिश्तों को लेकर जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जमात का नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश को अंजाम देने में लगा रहा। अनुच्छेद 370 हटने के बाद अलगाववाद की हवा निकल गई है। अलगाववादी नेताओं की अब आम कश्मीरी अनदेखी करने लगे हैं। पत्थरबाज भी गायब हो गए हैं। घाटी में अपेक्षाकृत शांति है। यह सब बदलाव पाकिस्तान की आंखों में चुभ रहा है।

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इस वजह से पाकिस्तान ने जमात के जरिये दोबारा घाटी में अशांति की साजिश रची है। इसके लिए जमात के फलह-ए-आम ट्रस्ट को खाड़ी देशों से शिक्षा, स्वास्थ्य और धर्म के लिए हवाला के जरिये भारी-भरकम फंडिंग भेजी जाती रही। इस राशि का इस्तेमाल आईएसआई के इशारे पर घाटी में दोबारा अलगाववाद को हवा देने और आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद के लिए किए जाने के इनपुट हैं। प्रदेश में रविवार को एनआईए की कार्रवाई के पीछे इसी इनपुट को मुख्य वजह माना जा रहा है।
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खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पुलवामा हमले के बाद 2019 में केंद्र सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। पाबंदी के बावजूद जमात के लोग जम्मू-कश्मीर में चोरी छिपे देशविरोधी गतिविधियां चलाते रहे। फलह-ए-आम ट्रस्ट की ओर से संचालित शिक्षण संस्थाओं के जरिये खासकर ग्रामीण युवाओं का ब्रेनवॉश कर उनमें अलगाववाद का बीज बोने की गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
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संगठन की ओर से पुराने अलगाववादियों के स्थान पर कुछ नए चेहरे भी चयनित करने की सूचना है। इन नए चेहरों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया जा रहा है। खासकर इन्हें पाकिस्तान को अपना सच्चा हितैषी बताते हुए देश और प्रदेश सरकार के खिलाफ विष वमन करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। सुरक्षा एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जमात के देशविरोधी गतिविधियों के इनपुट मिले हैं। इसमें शामिल सदस्यों को चिह्नित किया गया है। साथ ही इनकी पूरी गतिविधियों का डोजियर भी तैयार किया गया है।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार कश्मीर आएंगे राहुल गांधी, निशाने पर रहेगी मोदी सरकार

Jammu and Kashmir: After the abrogation of 370, the peace in the valley is disturbing Pakistan, the members of the Jamaat carrying out the ISI conspiracy
आतंकी

सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के पास भी इसके इनपुट हैं कि जमात प्रतिबंध के बाद भी अपनी शैक्षिक संस्थाओं के माध्यम से देशविरोधी गतिविधियां जारी रखे हुए है। इनमें कई सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे 300 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की सरकार ने सूची भी तैयार की है जिन पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी हुई है। पहले ही सरकार ने हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत लगभग दो दर्जन कर्मचारियों को आतंकियों व अलगाववादियों से सांठगांठ के आरोप में बर्खास्त कर दिया है। राज्य सरकार के पास पुख्ता इनपुट हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों ने जमात को शिक्षण संस्थान चलाने के लिए जमीन नियमों के विरुद्ध जाकर आवंटित की है। इसकी भी जांच चल रही है।

तीन बार लग चुका है प्रतिबंध
जम्मू-कश्मीर में जमात पर तीन बार प्रतिबंध लग चुका है। पहली बार 1975 में दो साल के लिए, 1990 में तीन साल के लिए (1990-93 तक) पाबंदी लगाई गई। तीसरी बार फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के बाद मार्च में पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया। घाटी में जमात के सभी कार्यालयों को बंद कराया गया। इनके नेताओं की धरपकड़ भी की गई।

हिजबुल और हुर्रियत को पैदा किया
जमात पर घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन को खड़ा करने का आरोप है। बताया जाता है कि हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन को जमात ने ही तैयार किया। संगठन के आतंकियों को फंड से लेकर हथियार और अन्य प्रकार की सुविधाएं जमात से ही मिलती थीं। जमात पर आतंकियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के भी आरोप हैं। पाकिस्तान परस्त हुर्रियत को खड़ा करने में जमात का ही हाथ बताया जाता है। जमात ने पाकिस्तान के समर्थन से हुर्रियत को खड़ा किया ताकि घाटी में लगातार पाकिस्तान के समर्थन में आवाज उठती रहे।

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