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बाजवा मामले में खुद उलझन में जांच टीम

Fri, 06 Dec 2013 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 06 Dec 2013 01:23 AM IST
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investigation team confused In the Bajwa  case
मोहाली जिले के भड़ौजियां गांव में शामलात जमीन खरीद मामले की जांच कर रही टीम को पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ अभी तक कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।
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यह टीम अब तक इन जमीनों से जुड़ी सभी कागजातों को खंगाल चुकी है, लेकिन कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इस कारण वित्तायुक्त (राजस्व) एनएस कंग द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट भी फिलहाल सरकार को नहीं सौंपी गई है। अभी इस पर मंथन किया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने विधानसभा में बाजवा और उनकी पत्नी का नाम लेकर भड़ौजियां गांव की 108 वीघा जमीन का बार-बार जिक्र किया और उसकी जांच करवाने की बात भी की। हंगामे के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए।
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बाजवा पर शामलात जमीन खरीदने का आरोप लगाया गया था। वित्तायुक्त (राजस्व) एन.एस. कंग ने जांच रिपोर्ट तो कई दिन पहले से तैयार कर रखी है लेकिन सूत्रों का मानना है कि इस जांच रिपोर्ट से सरकार का मकसद हल नहीं होगा।

रिपोर्ट में केवल कुछ अधिकारियों की ओर संदेह की उंगली उठाई गई है। जिनमें तत्कालीन सहायक निदेशक कंसोलिडेटेड गायत्री जैन और हाईकोर्ट के स्टेटस को (यथास्थिति) के आदेश की जानकारी राजस्व विभाग के रिकार्ड में न चढ़वाने के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के संबंधित अधिकारियों को न देने का आरोपी बताया है, लेकिन बाजवा का कहीं जिक्र नहीं है।

रिपोर्ट में 1952 से लेकर अब तक की शामलात जमीन की मालकी का निरीक्षण किया गया। 1997 में गायत्री जैन ने शामलात देह जमीन को मुशतरका मालकान करार देकर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया था।

सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अधिकारी को कानूनी तौर पर इस जमीन पर फैसला लेने का अधिकार नहीं था क्योंकि शामलात देह का फैसला ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ही ले सकता है।

इसके बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग या पंचायत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्टेटस को वाले आदेश को राजस्व रिकार्ड में दर्ज न करवाने पर भी अधिकारियों की लापरवाही स्पष्ट देखी जा सकती है। बाजवा के खिलाफ रिपोर्ट में कुछ नहीं है।

जानकारी के अनुसार बाजवा ने 2011 में निजी व्यक्तियों से जमीन ली थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यदि स्टांप ड्यूटी चोरी या अन्य कुछ मामले होंगे तो उनके दायरे के नहीं हैं।

सरकार ने तैयार किया जवाब
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लताड़ लगाई थी कि एक ओर तो जस्टिस कुलदीप सिंह ट्रिब्यूनल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और दूसरी ओर ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट को लागू करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया है।


सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से तैयार जवाब में कहा गया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन स्टे नहीं मिली। इसलिए अब हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेश पर अमल कर रही है।


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