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एनआईए: 'वॉइस ऑफ हिंद' टेरर साजिश मामले में विशेष अदालत का फैसला, आईएसआईएस के चार सदस्यों को सुनाई गई सजा
Mon, 28 Sep 2026 11:28 PM IST
ज्योति भास्कर
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 28 Sep 2026 11:28 PM IST
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NIA
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
एनआईए की नई दिल्ली के राउज़ एवेन्यू ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्थित स्पेशल कोर्ट-01 ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया' (आईएसआईएस) के 4 सदस्यों को 'वॉइस ऑफ़ हिंद' टेरर साज़िश मामले में सज़ा सुनाई। उमर निसार उर्फ़ कासिम खुरासानी (A-1), रमीज़ अहमद लोन (A-2) और तनवीर अहमद भट (A-3) में से हर एक को 6 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई है, जबकि अफशान परवेज़ जराबी (A-5) को 5 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई है। साथ ही, उन पर क्रमशः ₹36,000, ₹31,000, ₹23,000 और ₹9,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। सभी सज़ाएं एक साथ चलेंगी।
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इन 4 आरोपियों को पहले 17 सितंबर को स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साज़िश और UA (P) एक्ट और IPC के तहत कई अपराधों का दोषी पाया। इन अपराधों में ISIS का प्रचार-प्रसार करना, युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और उनकी भर्ती करना, और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल था।
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यह मामला (RC-14/2021/NIA/DLI) आईएसआईएस की उस साज़िश से जुड़ा है, जिसके तहत भारत में आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर और उनकी भर्ती करके भारतीय राज्य के ख़िलाफ़ हिंसक जिहाद छेड़ने की योजना बनाई गई थी। अलग-अलग संघर्ष वाले इलाकों से काम कर रहे आईएसआईएस आतंकवादियों ने भारत में मौजूद अपने कैडरों के साथ मिलकर, आईएसआईएस से जुड़े प्रोपेगैंडा को फैलाने के लिए फ़र्ज़ी ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल करते हुए एक नेटवर्क बनाया था। इस संगठित ऑनलाइन अभियान के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर आतंकी गतिविधियों के लिए फ़ंडिंग का काम भी किया गया था।
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एनआईए की जांच से पता चला कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए भारत-केंद्रित आईएसआईएस प्रोपेगैंडा मैगज़ीन "सौत-अल-हिंद (द वॉयस ऑफ़ हिंद)" के कंटेंट बनाने, एडिट करने, पब्लिश करने और फैलाने में साइबर ग्रुप्स और उनके साथियों का हाथ था। यह नेटवर्क सीरिया, इराक, अफ़गानिस्तान और दूसरे इलाकों में आईएसआईएस के संघर्ष वाले क्षेत्रों में तथाकथित "हिजरत" (प्रवास) के लिए भारतीयों को उकसाने और मदद करने में भी शामिल था।
जांच के दौरान, एनआईए ने बड़ी मात्रा में दोषी ठहराने वाले दस्तावेज़ और डिजिटल सामग्री ज़ब्त की। इनमें "वॉयस ऑफ़ हिंद" की पीडीएफ, मारे गए आतंकवादियों के पोस्टर, कट्टरपंथी साहित्य, आईएसआईएस प्रोपेगैंडा के वेब लिंक, आईएसआईएस के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार खरीदने से जुड़ी चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया/विचारधारा/मनोवैज्ञानिक युद्ध से जुड़ी सामग्री और आईएसआईएस के बैनर/झंडे शामिल थे।
कोर्ट ने पाया है कि आईएसआईएस की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में 4 दोषियों की खास भूमिका थी। A-1 को युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने के लिए 'वॉयस ऑफ हिंद' मैगज़ीन, टेलीग्राम और दूसरे ऑनलाइन चैनलों के ज़रिए आईएसआईएस का मटीरियल फैलाने और प्रचार करने में शामिल पाया गया। A-2 और A-3 को आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में शामिल पाया गया। A-5 को टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए 'वॉयस ऑफ हिंद' मैगज़ीन के लिए लेख छापने और फैलाने, साथ ही आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए बुलाने में शामिल पाया गया।
एनआईए ने कुल 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और 4 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कीं। जांच में आईएसआईएस के 'वॉयस ऑफ हिंद' मॉड्यूल की गतिविधियों में आरोपियों की भागीदारी और ऑनलाइन गतिविधियों के ज़रिए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका साबित हुई। बाकी आरोपियों के खिलाफ़ मुक़दमा चल रहा है।