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निर्वाचन कार्यालय लिपिक व एपीओ के विवाद ने पकड़ा तूल
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
Updated Sat, 03 Sep 2016 12:10 AM IST
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विकास भवन में तालाबंदी कर धरने पर बैठे कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
पोलिंग बूथों की गूगल मैपिंग को लेकर निर्वाचन कार्यालय के लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा व मनरेगा एपीओ के बीच हुए विवाद ने शुक्रवार को तूल पकड़ लिया। विकास भवन के कर्मचारियों ने लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा की तहरीर पर एक पक्षीय कार्रवाई किए जाने का विरोध कर धरना प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट पहुंच कर डीएम से एक पक्षीय कार्रवाई समाप्त किए जाने की मांग उठाई गई। डीएम ने कर्मचारी नेताओं को चेंबर से बाहर निकाल कर मनरेगा एपीओ और निर्वाचन कार्यालय के लिपिक को सुनने के बाद फतेहगढ़ कोतवाल को जांच के आदेश दिए हैं।
31 अगस्त की रात मनरेगा के एपीओ आसाम सिंह यादव और निर्वाचन कार्यालय के लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा के बीच मोबाइल पर नोकझोंक हो गई थी। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी के लिए भी गलत शब्दों का प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया। इसको लेकर एक सितंबर को विकास भवन के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधि मंडल निर्वाचन कार्यालय में लिपिक से मिला और विवाद को शांत करा दिया। शाम को लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा ने फतेहगढ़ कोतवाली में एपीओ आसाम सिंह और जिला विकास अधिकारी के आशुलेखक चंद्र प्रकाश भारद्वाज के खिलाफ तहरीर दी। इसकी जानकारी होने पर शुक्रवार कार्यालय खुलते ही राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
विकास भवन मेें कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने विकास भवन गेट पर बैठकर धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम से मुलाकात की। डीएम ने कर्मचारी नेताओं को चेंबर से बाहर निकाल कर निर्वाचन कार्यालय के लिपिक और मनरेगा एपीओ तथा आशुलेखक चंद्रप्रकाश भारद्वाज की बात सुनी। डीएम ने फतेहगढ़ कोतवाल को जांच कर तत्काल आख्या देने का आदेश दिया। इस दौरान डीएम कार्यालय के बाहर कर्मचारियों को नारेबाजी करने से एसडीएम युवराज सिंह ने रोका तो एसडीएम से कर्मचारियों की नोकझोंक हो गई। नगर मजिस्ट्रेट शिव बहादुर सिंह ने कर्मचारियों को समझाकर शांत किया। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा।
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इस दौरान अध्यक्ष राकेश सारस्वत, मोतीलाल कपूर, चंद्र प्रकाश भारद्वाज, शैलेन्द्र सिंह राजपूत, आसाम सिंह, आरके कठेरिया, संजय कमल, शिवकुमार, दीपिका त्रिपाठी, मंजू गुप्ता, रत्नेश कुमारी, प्रीति तिवारी, प्रमोद दीक्षित, आरके सक्सेना, अत्रेय राठौर, नासिर निशात, जितेंद्र कुमार, ओमवीर सिंह, रजनीश दीक्षित, प्रभातचंद्र सक्सेना और सतेंद्र कुमार समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे।
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31 अगस्त की रात मनरेगा के एपीओ आसाम सिंह यादव और निर्वाचन कार्यालय के लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा के बीच मोबाइल पर नोकझोंक हो गई थी। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी के लिए भी गलत शब्दों का प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया। इसको लेकर एक सितंबर को विकास भवन के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधि मंडल निर्वाचन कार्यालय में लिपिक से मिला और विवाद को शांत करा दिया। शाम को लिपिक लक्ष्मीकांत शर्मा ने फतेहगढ़ कोतवाली में एपीओ आसाम सिंह और जिला विकास अधिकारी के आशुलेखक चंद्र प्रकाश भारद्वाज के खिलाफ तहरीर दी। इसकी जानकारी होने पर शुक्रवार कार्यालय खुलते ही राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
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विकास भवन मेें कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने विकास भवन गेट पर बैठकर धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम से मुलाकात की। डीएम ने कर्मचारी नेताओं को चेंबर से बाहर निकाल कर निर्वाचन कार्यालय के लिपिक और मनरेगा एपीओ तथा आशुलेखक चंद्रप्रकाश भारद्वाज की बात सुनी। डीएम ने फतेहगढ़ कोतवाल को जांच कर तत्काल आख्या देने का आदेश दिया। इस दौरान डीएम कार्यालय के बाहर कर्मचारियों को नारेबाजी करने से एसडीएम युवराज सिंह ने रोका तो एसडीएम से कर्मचारियों की नोकझोंक हो गई। नगर मजिस्ट्रेट शिव बहादुर सिंह ने कर्मचारियों को समझाकर शांत किया। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा।
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इस दौरान अध्यक्ष राकेश सारस्वत, मोतीलाल कपूर, चंद्र प्रकाश भारद्वाज, शैलेन्द्र सिंह राजपूत, आसाम सिंह, आरके कठेरिया, संजय कमल, शिवकुमार, दीपिका त्रिपाठी, मंजू गुप्ता, रत्नेश कुमारी, प्रीति तिवारी, प्रमोद दीक्षित, आरके सक्सेना, अत्रेय राठौर, नासिर निशात, जितेंद्र कुमार, ओमवीर सिंह, रजनीश दीक्षित, प्रभातचंद्र सक्सेना और सतेंद्र कुमार समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे।