बिहार सरकार का बड़ा फैसला, अब महिलाओं के अल्पावास गृहों की सुरक्षा करेंगे ट्रांसजेंडर गार्ड
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बिहार के अल्पावास गृहों में यौन शोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। बिहार सरकार ने ऐसे अल्पावास गृहों में ट्रांसजेंडरों को सुरक्षा गार्ड के रूप में नियोजित करने का फैसला किया है, जो लड़कियों और महिलाओं के लिए बनाए गए हों।
सरकार ने यह फैसला इसी साल मई महीने में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा प्रस्तुत किए गए एक रिपोर्ट के आधार पर किया है। इस रिपोर्ट में राज्य समाज कल्याण विभाग द्वारा इन आश्रयों का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराने को कहा गया था।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान समाज कल्याण विभाग के मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने कहा 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट में यौन शोषण की शिकायतों और सुधारात्मक उपायों के बारे में बताया गया है, जो करने की जरूरत है। चूंकि टीआईएसएस टीम ने रिपोर्ट में कई लड़कियों का नाम दिया है, इसलिए रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। लेकिन हमने टीम के निष्कर्षों के आधार पर मुजफ्फरपुर में मामला दर्ज किया है और हमने अधिकारियों से अल्पावास गृहों का समय-समय पर सोशल ऑडिट कराने को कहा है। छपरा मामला टीआईएसएस की रिपोर्ट के बाद हमारे द्वारा किए गए अनुवर्ती उपायों के बाद प्रकाश में आया है'।
उन्होंने कहा 'हम कुछ समय के लिए अल्पावास गृहों पर सुरक्षा गार्ड के रूप में ट्रांसजेंडरों को नियोजित करने के प्रस्ताव पर अध्ययन कर रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रस्ताव का समर्थन करने के बाद हमने परिवर्तन को लागू करने का औपचारिक आदेश जारी किया। अल्पावास गृहों पर सुरक्षा गार्ड के रूप में रोजगार के लिए ट्रांसजेंडरों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम यौन शोषण को रोकने में मदद करेगा और साथ ही ट्रांसजेंडरों को रोजगार और सामाजिक समानता दिलाने में भी उनकी मदद करेगा'।
Bihar CM Nitish Kumar has asked officials to examine whether members of transgender community can be recruited as security guards for women at short stay homes. He had met a member of the Transgender Welfare Board in this regard. pic.twitter.com/3CbD3EKWei
— ANI (@ANI) July 18, 2018
बता दें कि बिहार के सभी 38 जिलों में 110 अल्पावास गृह संचालित हो रहे हैं, जिनमें लड़कियों और महिलाओं के लिए अलग अल्पावास गृह बनाए गए हैं। इन सभी अल्पावास गृहों को सरकारी अनुदान प्राप्त है। हालांकि इनमें से पांच अल्पावास गृहों को अभी हाल ही में बंद किया गया है, जिसमें छपरा और मुजफ्फरपुर के अल्पावास गृह भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में छपरा में नारी उत्थान केंद्र द्वारा मौना मोहल्ले में संचालित अल्पावास गृह में एक विक्षिप्त लड़की से गार्ड द्वारा यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया था। पीड़ित लड़की के गर्भवती होने के बाद इस घटना का पता चला। पुलिस ने मामला दर्ज कर गृह संचालिका सरोज कुमारी और आरोपी गार्ड रामस्वरूप पंडित को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एनजीओ सचिव रणधीर कुमार की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
इससे पहले दो जून को मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में भी लड़कियों का यौन शोषण और उनके साथ हिंसा का खुलासा हुआ था। इस मामले में पुलिस ने दस लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें बालिका गृह के कर्मचारी भी शामिल हैं।