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गिरफ्तार एआरटीओ आरएस यादव की करोड़ों की जमीन का खुलासा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 23 Jun 2017 06:04 PM IST
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बाबतपुर सिसवां में आरएस यादव के परिवार की 35 बिस्वा जमीन
- फोटो : अमर उजाला
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भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की करोड़ों की जमीन का खुलासा हुआ है। बाबतपुर एयरपोर्ट के पास जिस 35 बिस्वा जमीन की जानकारी सामने आई थी, वह सीधे तौर पर आरएस के परिवार से जुड़ी है।
सुपीरियर कंपनी के नाम खरीदी गई इस जमीन पर आरएस के परिवार के लोगों का सीधा मालिकाना हक है। यह कंपनी उन्हीं बोगस कंपनियों में एक है, जो काला धन सफेद करने के लिए खरीदी गई थीं। कंपनी में आरएस के बेटे अपूर्व यादव, चचेरे भाई प्रेमचंद यादव ओर ब्रह्मदेव यादव निदेशक हैं। पांच साल पहले इस जमीन की कीमत 89 लाख रुपये आंकी गई थी। मौजूदा समय यह करोड़ों में है।
दरअसल, पहले पता चला था कि बाबतपुर स्थित करोड़ों की जमीन आरएस के निजी चालक महेंद्र मौर्या के नाम है। लेकिन, पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन से जुड़े कागजात की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। दरअसल, नदेसर के रहने वाले लियाकत अली पूर्व में वाराणसी-जौनपुर मार्ग स्थित इस जमीन के मालिक हुआ करते थे।
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18 सितंबर 2013 को उन्होंने अपनी यह 35 बिस्वा जमीन सुपीरियर निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में बैनामा कर दी। सिसवां गांव में आराजीनंबर 774 की सरकारी मालियत उस समय 89 लाख आंकी गई थी। कागजात में 91 लाख का लेनदेन हुआ था।
आईडीबीआई बैंक, बांसफाटक से डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भुगतान किया गया। सुपीरियर कंपनी की ओर से कंपनी के तीन निदेशकों में से एक प्रेमचंद यादव निवासी 498, एच 1 रवींद्र सरानी 8, श्यामपुकुर कोलकाता ने रजिस्ट्री के पेपर पर हस्ताक्षर किए थे।
इसका खुलासा होने के बाद अब जांच एजेंसियों ने आरएस पर शिकंजा और सख्त कर दिया है। आरएस के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विवेचक सीओ चकिया प्रदीप सिंह चंदेल का कहना है कि सिसवां में जमीन की पड़ताल के बाद अब दूसरी बेनामी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
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सुपीरियर कंपनी के नाम खरीदी गई इस जमीन पर आरएस के परिवार के लोगों का सीधा मालिकाना हक है। यह कंपनी उन्हीं बोगस कंपनियों में एक है, जो काला धन सफेद करने के लिए खरीदी गई थीं। कंपनी में आरएस के बेटे अपूर्व यादव, चचेरे भाई प्रेमचंद यादव ओर ब्रह्मदेव यादव निदेशक हैं। पांच साल पहले इस जमीन की कीमत 89 लाख रुपये आंकी गई थी। मौजूदा समय यह करोड़ों में है।
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दरअसल, पहले पता चला था कि बाबतपुर स्थित करोड़ों की जमीन आरएस के निजी चालक महेंद्र मौर्या के नाम है। लेकिन, पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन से जुड़े कागजात की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। दरअसल, नदेसर के रहने वाले लियाकत अली पूर्व में वाराणसी-जौनपुर मार्ग स्थित इस जमीन के मालिक हुआ करते थे।
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18 सितंबर 2013 को उन्होंने अपनी यह 35 बिस्वा जमीन सुपीरियर निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में बैनामा कर दी। सिसवां गांव में आराजीनंबर 774 की सरकारी मालियत उस समय 89 लाख आंकी गई थी। कागजात में 91 लाख का लेनदेन हुआ था।
आईडीबीआई बैंक, बांसफाटक से डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भुगतान किया गया। सुपीरियर कंपनी की ओर से कंपनी के तीन निदेशकों में से एक प्रेमचंद यादव निवासी 498, एच 1 रवींद्र सरानी 8, श्यामपुकुर कोलकाता ने रजिस्ट्री के पेपर पर हस्ताक्षर किए थे।
इसका खुलासा होने के बाद अब जांच एजेंसियों ने आरएस पर शिकंजा और सख्त कर दिया है। आरएस के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विवेचक सीओ चकिया प्रदीप सिंह चंदेल का कहना है कि सिसवां में जमीन की पड़ताल के बाद अब दूसरी बेनामी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
प्रेमचंद यादव के अलग-अलग पते
सुपीरियर निर्माण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक के तौर पर रजिस्ट्री के कागजात पर हस्ताक्षर करने वाले प्रेमचंद यादव के दो अलग-अलग पते दर्ज हैं। कंपनी के रिकार्ड में उनका पता एस-8, 109-जी-1, मकबूल आलम रोड, खजुरी वाराणसी है (इसी के पास ही आरएस यादव का मकान है) जबकि रजिस्ट्री के कागजात में 498, एच 1 रवींद्र सरानी 8, श्यामपुकुर कोलकाता दर्ज कराया गया है।
दरअसल कोलकाता का यही पता सुपीरियर कंपनी का भी है। जानकारों का कहना है कि रजिस्ट्री के कागजात में कोलकाता का पता सोची समझी साजिश के तहत दर्ज कराया गया ताकि उसका आरएस से कोई कनेक्शन सामने न आने पाए।