{"_id":"6a036ebbc8659348970fc060","slug":"air-pollution-problem-increases-in-haryana-2026-05-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में वायु संकट गहराया: पीएम 2.5-पीएम 10 राष्ट्रीय मानक से दोगुना, अमोनिया 8% बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा में वायु संकट गहराया: पीएम 2.5-पीएम 10 राष्ट्रीय मानक से दोगुना, अमोनिया 8% बढ़ा
Tue, 12 May 2026 11:47 PM IST
शाहिल शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत
माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 12 May 2026 11:47 PM IST
सार
रिपोर्ट में हरियाणा में 10-सेंसर प्रायोगिक अमोनिया निगरानी तंत्र लगाने की सिफारिश की गई है। 5 सेंसर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत जैसे शहरी क्षेत्रों में और 5 सेंसर हिसार, सिरसा, जींद जैसे पशुधन-प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव है।
विज्ञापन
हरियाणा में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रेस्पायर लिविंग साइंसेज की नई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से भी ज्यादा है। वहीं अमोनिया के स्तर में 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि और पशुधन से निकलने वाली अमोनिया दूसरे कण प्रदूषण की बड़ी वजह बन रही है।
गुरुग्राम-फरीदाबाद सबसे प्रदूषित
रिपोर्ट में 2024 से 2026 तक 31 निगरानी केंद्रों का आंकड़ा खंगाला गया। पीएम 2.5 का सालाना औसत 62.51 से 77.38 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा, जबकि भारत का मानक सिर्फ 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। पीएम 10 का स्तर 123.44 से 141.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया, जो 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से दोगुना है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ और मानेसर की दक्षिणी पट्टी सबसे ज्यादा प्रदूषित मिली।
सेक्टर-51 गुरुग्राम में टूटी अमोनिया की सीमा
हरियाणा में औसत अमोनिया 2024 में 35.75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 2025 में 38.63 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई। सेक्टर-51, गुरुग्राम में 2025 का सालाना औसत 138.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जो 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से कहीं ज्यादा है। मार्च 2025 में यहां लगातार तीन दिन 24 घंटे की सीमा 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर भी टूट गई। आंकड़े 409.21, 410.20 और 411.82 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहे। 2024 में टेरी ग्राम, गुरुग्राम में 107.02 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर अमोनिया मिली थी।
विज्ञापन
कृषि अमोनिया से बन रहे जहरीले कण
विश्व बैंक के मुताबिक हरियाणा के पीएम 2.5 में 30-40% हिस्सा दूसरे कणों का है। ये कण अमोनिया के नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड से मिलने पर बनते हैं। सर्दियों और वसंत में अमोनिया का पीएम 2.5 से सीधा संबंध मिला है। मानसून में यह असर कम हो जाता है। पशुधन वाले जिले बने अड्डे हिसार में राज्य की 9.2% पशुधन आबादी है। इसके बाद सिरसा 8.0%, जींद 7.8%, भिवानी 6.5% और कैथल 5.6% हैं। ये जिले ज्यादा अमोनिया वाले क्षेत्रों से मेल खाते हैं। मुर्थल सोनीपत, धारूहेड़ा और टेरी ग्राम में भी अमोनिया ज्यादा मिली।
10 सेंसर वाले प्रायोगिक तंत्र की सिफारिश
रिपोर्ट में हरियाणा में 10-सेंसर प्रायोगिक अमोनिया निगरानी तंत्र लगाने की सिफारिश की गई है। 5 सेंसर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत जैसे शहरी क्षेत्रों में और 5 सेंसर हिसार, सिरसा, जींद जैसे पशुधन-प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव है। रेस्पायर लिविंग साइंसेज के संस्थापक रोनक सुतारिया ने कहा, "अमोनिया अब सिर्फ कृषि की टिप्पणी नहीं है। यह पीएम 2.5 में बढ़ता हुआ योगदानकर्ता है। एक अलग अमोनिया निगरानी तंत्र जरूरी है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण मंडल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय मिलकर इसे लागू कर सकते हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजना में दूसरे कणों की अनदेखी हो रही है। कई निगरानी केंद्र औद्योगिक क्षेत्रों के पास हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की कृषि अमोनिया पकड़ में नहीं आती।
विज्ञापन
गुरुग्राम-फरीदाबाद सबसे प्रदूषित
रिपोर्ट में 2024 से 2026 तक 31 निगरानी केंद्रों का आंकड़ा खंगाला गया। पीएम 2.5 का सालाना औसत 62.51 से 77.38 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा, जबकि भारत का मानक सिर्फ 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। पीएम 10 का स्तर 123.44 से 141.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया, जो 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से दोगुना है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ और मानेसर की दक्षिणी पट्टी सबसे ज्यादा प्रदूषित मिली।
विज्ञापन
सेक्टर-51 गुरुग्राम में टूटी अमोनिया की सीमा
हरियाणा में औसत अमोनिया 2024 में 35.75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 2025 में 38.63 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई। सेक्टर-51, गुरुग्राम में 2025 का सालाना औसत 138.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जो 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से कहीं ज्यादा है। मार्च 2025 में यहां लगातार तीन दिन 24 घंटे की सीमा 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर भी टूट गई। आंकड़े 409.21, 410.20 और 411.82 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहे। 2024 में टेरी ग्राम, गुरुग्राम में 107.02 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर अमोनिया मिली थी।
विज्ञापन
कृषि अमोनिया से बन रहे जहरीले कण
विश्व बैंक के मुताबिक हरियाणा के पीएम 2.5 में 30-40% हिस्सा दूसरे कणों का है। ये कण अमोनिया के नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड से मिलने पर बनते हैं। सर्दियों और वसंत में अमोनिया का पीएम 2.5 से सीधा संबंध मिला है। मानसून में यह असर कम हो जाता है। पशुधन वाले जिले बने अड्डे हिसार में राज्य की 9.2% पशुधन आबादी है। इसके बाद सिरसा 8.0%, जींद 7.8%, भिवानी 6.5% और कैथल 5.6% हैं। ये जिले ज्यादा अमोनिया वाले क्षेत्रों से मेल खाते हैं। मुर्थल सोनीपत, धारूहेड़ा और टेरी ग्राम में भी अमोनिया ज्यादा मिली।
10 सेंसर वाले प्रायोगिक तंत्र की सिफारिश
रिपोर्ट में हरियाणा में 10-सेंसर प्रायोगिक अमोनिया निगरानी तंत्र लगाने की सिफारिश की गई है। 5 सेंसर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत जैसे शहरी क्षेत्रों में और 5 सेंसर हिसार, सिरसा, जींद जैसे पशुधन-प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव है। रेस्पायर लिविंग साइंसेज के संस्थापक रोनक सुतारिया ने कहा, "अमोनिया अब सिर्फ कृषि की टिप्पणी नहीं है। यह पीएम 2.5 में बढ़ता हुआ योगदानकर्ता है। एक अलग अमोनिया निगरानी तंत्र जरूरी है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण मंडल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय मिलकर इसे लागू कर सकते हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजना में दूसरे कणों की अनदेखी हो रही है। कई निगरानी केंद्र औद्योगिक क्षेत्रों के पास हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की कृषि अमोनिया पकड़ में नहीं आती।