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15 सालों से बेनागा दे रहे थे धरना फिर आई ऐसी खबर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 06 Apr 2017 05:18 PM IST
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कोटा की इंस्ट्रूमेंटेशन फैक्ट्री के बाहर पिछले 15 सालों से एरियर को लेकर दिए जा रहे धरने को फैक्ट्री कर्मचारियों ने आखिरकार समाप्त करने की घोषणा कर दी है। केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड के कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों को सरकार ने बकाया एरियर का भुगतान नहीं किया था जिसे लेकर ये सभी कर्मचारी सुबह के करीब 10 बजे से दोपहर के 3 बजे तक करीब 20 से 25 लोग पिछले 15 सालों से रोजाना कोटा की इंस्ट्रूमेंटेशन फैक्ट्री के बाहर आकर बैठ जाते थे।इनके यहां बैठने का सिलसिला 8 अक्टूबर 2001 से चल रहा था। आखिरकार सरकार ने इनकी मांगो को मानते हुए इनके बकाया एरियर का भुगतान करने की स्वीकृति जारी कर दी है।
ना सर्दी देखी ना गर्मी,बारिश में भी जारी रखा संघर्ष
बंद हो चुकि इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड के करीब 2000 रिटायर्ड कर्मचारी वर्ष 1992 से 1998 तक के अपने बकाया एरियर की मांग को लेकर 8 अक्टूबर 2001 से धरना दे रहे थे। हालांकि सरकार ने करीब 1100 कर्मचारियों को तो भुगतान कर दिया लेकिन कंपनी के करीब 879 कर्मचारियों को आज तक भुगतान नहीं किया गया था।
धरना देने वालों ने ना धूप देखी ना सर्दी और रोजाना ये लोग नियमित रूप से यहां धरना देने पहुंच जाते थे आखिरकार इनका संघर्ष बेकार नहीं गया और इनका हक इन्हें वापस मिल गया। बताया जाता है कि 15 साल तक चला यह धरना देश में दिया गया सबसे लंबी अवधि का धरना है लेकिन इन 15 सालों में प्रशासन की ओर से कोई भी जनप्रतिनिधी रिटायर हो चुके इन बुजुर्ग कर्मचरियों की सुध लेने नहीं पहुंचा।
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ना सर्दी देखी ना गर्मी,बारिश में भी जारी रखा संघर्ष
बंद हो चुकि इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड के करीब 2000 रिटायर्ड कर्मचारी वर्ष 1992 से 1998 तक के अपने बकाया एरियर की मांग को लेकर 8 अक्टूबर 2001 से धरना दे रहे थे। हालांकि सरकार ने करीब 1100 कर्मचारियों को तो भुगतान कर दिया लेकिन कंपनी के करीब 879 कर्मचारियों को आज तक भुगतान नहीं किया गया था।
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धरना देने वालों ने ना धूप देखी ना सर्दी और रोजाना ये लोग नियमित रूप से यहां धरना देने पहुंच जाते थे आखिरकार इनका संघर्ष बेकार नहीं गया और इनका हक इन्हें वापस मिल गया। बताया जाता है कि 15 साल तक चला यह धरना देश में दिया गया सबसे लंबी अवधि का धरना है लेकिन इन 15 सालों में प्रशासन की ओर से कोई भी जनप्रतिनिधी रिटायर हो चुके इन बुजुर्ग कर्मचरियों की सुध लेने नहीं पहुंचा।
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