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आखिर क्यों अजीत जोगी बन गए हैं कांग्रेस के लिए सिर दर्द
Updated Sat, 05 Mar 2016 11:58 AM IST
सार
- ऑडियो टेप आया सामने
- अखबार ने किया दावा
- मुश्किल में कांग्रेस की जान
- जोगी के अलावा कोई चेहरा
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ajit jogi
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विस्तार
छत्तीसगढ में कांग्रेस के लिए मुश्किल घड़ी है। वहां पार्टी के पास अजीत जोगी के अलावा कोई और चेहरा नहीं है। इसके बावजूद पार्टी उन्हें राज्य की बागडोर सौंपने के मूड में नहीं है। अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने बुधवार को एक कथित ऑडियो टेप के हवाले से खबर प्रकाशित की थी। इसमें छत्तीसगढ में पिछले साल अंतागढ विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री रमन सिंह के एक रिश्तेदार, अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी के बीच कथित 'लेनदेन' की बातचीत थी।
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पिछले साल 13 सितंबर को इस सीट पर हुए उपचुनाव में कुल 13 उम्मीदवार मैदान में थे। लेकिन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
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वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं कि अजीत जोगी को लेकर विवाद सामने आने के बाद अब यह कांग्रेस पर है कि वह इस विवाद को कैसे देखती है। वह कहती हैं कि इस मामले में अजीत जोगी और अमित जोगी के जो साथी हैं, उनमें से एक-दो को छोड़कर सभी ने आरोपों को खारिज कर दिया है।
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अब इस मामले में कांग्रेस के सामने और क्या प्रमाण आते हैं, उन पर ही कई चीजें निर्भर करेंगी। मुझे ऐसा नहीं लगता कि छत्तीसगढ़ में जो कुछ भी हुआ उसकी जानकारी कांग्रेस को नहीं थी। अगर नहीं भी थी तो अब जब मामला सामने आ गया है, तो कांग्रेस नेतृत्व क्या कार्रवाई करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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अजीत जोगी कांग्रेस के गले की हड़्ड़ी बन गए हैं, जिन्हें न कांग्रेस निगल पा रही है और न उगल पा रही है। कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ में नेतृत्व का अभाव है। ऐसे में कांग्रेस को अजीत जोगी को बनाए रखना उनकी मजबूरी है।
साल 2013 में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मारे गए थे। अब उसके पास वहां कोई चेहरा नहीं बचा है। इसलिए वह अजीत जोगी को वहां से हटा भी नहीं सकते। कांग्रेस की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वह न तो अजीत जोगी को राज्य की कमान सौंपना चाहती है और न उनके बिना उसे कुछ दिखता है।
कांग्रेस जोगी को रखे तो भी समस्या और न रखे तो भी समस्या है।छत्तीसगढ में 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन तब भी कांग्रेस के पास अजीत जोगी के अलावा कोई चेहरा नहीं है। (बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से बातचीत पर आधारित)