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प्रेम विवाह के खिलाफ पंचायत-विधायक

Sun, 29 Sep 2013 11:33 AM IST
Updated Sun, 29 Sep 2013 11:33 AM IST
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villagers against love marriage in chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में दलित युवक द्वारा अंतरजातीय विवाह करने पर लड़के के परिवार को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ़ हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। राज्य के गृह सचिव और स्थानीय विधायक समेत कुल 21 लोगों को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए पांच सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिये कहा है।

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मामला रायगढ़ ज़िले के कोसमंदा गांव का है।

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गांव के निर्मल सारथी नामक युवक का दूसरी जाति की लड़की के साथ प्रेम संबंध था और अगस्त 2010 में उसने घर वालों को बिना बताए घर से भाग कर शादी कर ली।

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इसके बाद गांव में पंचायत बैठी और निर्मल सारथी की मां और छोटे भाई को पंचायत में बुलाया गया। पूरा गांव इस विवाह से नाराज़ था। पंचायत में ही दोनों की पिटाई की गई। दोनों किसी तरह जान बचा कर गांव से भागे।


निर्मल सारथी की मां राम बाई बताती हैं, “हमें कहा गया था कि सूर्योदय से पहले हम गांव छोड़ दें नहीं तो हमें घर समेत जिंदा जला दिया जायेगा। हम किसी तरह दूसरे गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंचे।”


सुनवाई नहीं हुई


अगले दिन जब राम बाई अपने परिजनों के साथ थाने में पहुंची तो उनकी रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई। राम बाई और उनके परिजनों ने ज़िले के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से भी शिकायत की लेकिन उनकी कहीं नहीं सुनी गई।

love marriage

इधर गांव में बैठी पंचायत ने तरह-तरह के आरोप लगा कर पीड़ित परिवार के गांव में रहने पर आपत्ति दर्ज की और कहा कि इस तरह से अंतर्जातीय शादी के कारण ‘ग्राम की शांति भंग हो गई है।’


पंचायत ने अंतरजातीय शादी करने वाले निर्मल सारथी और उसकी मां राम बाई समेत दूसरे परिजनों को गांव में नहीं रहने का बाक़ायदा लिखित फ़रमान जारी कर दिया। ग्राम सभा के इस निर्णय पर क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक शक्राजीत नायक ने भी अपनी मुहर लगा दी और तहसीलदार को तत्काल कार्रवाई करने की अनुशंसा कर दी।


विधायक शक्राजीत नायक कहते हैं, “गांव के सारे लोग एक तरफ हैं और लड़की भगा कर शादी करने वाला परिवार एक तरफ। एक विधायक होने के नाते मैं अंतरजातीय विवाह के पक्ष में हूं लेकिन आपको यह समझना होगा कि जाति और समाज की पंचायत को किनारे करके ऐसा कुछ करना संभव नहीं है। किसी को शादी अगर करनी है तो इसमें सबकी सहमति होनी चाहिए।”


धमकी


हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बाद गांव से भाग कर शादी करने वाले निर्मल सारथी अपनी पत्नी सुमन के साथ गांव लौट आए।


अंतरजातीय विवाह करने वाली सुमन कहती हैं, “हमने कोई गुनाह नहीं किया है। हम बालिग हैं। लेकिन हमारे कारण मेरे पति के पूरे परिवार को प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। गांव में मेरे परिजनों और दूसरी बड़ी जातियों के डर के कारण कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा।”


राम बाई और उनके परिजनों को भी गांव में रहने तो दिया गया लेकिन गांव में ऊंची जाति वालों का तरह-तरह से प्रताड़ित करने का सिलसिला और बहिष्कार जारी रहा।


अंतत: पीड़ित परिवार ने परेशान होकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शरण ली।


कोर्ट का हस्तक्षेप


हाईकोर्ट में पीड़ित की वकील रजनी सोरेन कहती हैं, “इस बात पर यकीन करना शायद मुश्किल होगा लेकिन हकीकत ये है कि छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जब जाति और सामाजिक पंचायतें इस तरह के विवाह के कारण परिवारों का बहिष्कार कर रही हैं।”


रायगढ़ के स्थानीय पत्रकार कृष्णा तिवारी इसे खाप पंचायत की संज्ञा देते हैं।


वे कहते हैं, “सामाजिक बहिष्कार के मामले गांवों में बिखरे पड़े हैं। लोग सालों से अपने गांव नहीं जा पा रहे हैं। उनका खेत-घर बर्बाद हो रहा है। यह सब कुछ भयावह है।”


हालांकि राज्य के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री केदार कश्यप इससे सहमत नहीं हैं। लेकिन वे मानते हैं कि अंतरजातीय विवाह को छत्तीसगढ़ में अभी भी उस तरह से स्वीकार्यता नहीं मिल पाई है।


वे कहते हैं, “मैं रायगढ़ के मामले का पता करवाता हूं और जो भी संभव होगा, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

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