सीजी: कोल लेवी मामले में जांच का दायरा बढ़ा, ईओडब्ल्यू ने आईएएस जयप्रकाश मौर्य की भूमिका पर लगाए आरोप
कोल लेवी मामले में ईओडब्ल्यू की जांच आयरन पैलेट और लौह अयस्क परिवहन तक पहुंच गई है। छठे पूरक चालान में आईएएस जयप्रकाश मौर्य की भूमिका पर आरोप और डायरी में करीब एक करोड़ रुपये के लेनदेन की प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया है।
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चर्चित कोल लेवी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की जांच का दायरा अब कोयला परिवहन से आगे बढ़कर आयरन पैलेट और लौह अयस्क के परिवहन तक पहुंच गया है। ईओडब्ल्यू की ओर से दायर छठे पूरक चालान में भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन संचालक और आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की भूमिका को लेकर गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई डायरी में जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने से संबंधित प्रविष्टियां मिली हैं। मौर्य निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू के पति हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण और सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
ईओडब्ल्यू की जांच में आयरन पैलेट के परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन और कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन कथित वसूली का उल्लेख है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह व्यवस्था कथित अवैध वसूली के नेटवर्क का हिस्सा थी। वर्ष 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में करीब 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ था। 100 रुपये प्रति टन की दर से गणना करने पर यह राशि करीब 1,905 करोड़ रुपये बैठती है। इसी अवधि में करीब 81 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का आंकड़ा सामने आया है। 25 रुपये प्रति टन की दर से इसकी गणना करीब 2,025 करोड़ रुपये होती है।
हालांकि, ये आंकड़े केवल गणितीय आकलन हैं। इनका यह अर्थ नहीं है कि ईओडब्ल्यू ने पूरे उत्पादन पर कथित वसूली साबित कर दी है। वर्तमान में जांच एजेंसी ने इस मामले में घोटाले का कुल आकलन करीब 500 करोड़ रुपये बताया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और आयरन पैलेट के परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2022 के आदेश के माध्यम से सड़क और रेल मार्ग से परिवहन की व्यवस्था लागू की गई।
पैलेट उद्योगपतियों की बैठक का भी उल्लेख
छठे पूरक चालान में दावा किया गया है कि इसी दौरान जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योगपतियों की बैठक ली थी। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस बैठक में सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपये प्रति टन देने के निर्देश दिए जाने का आरोप है। चालान में मौर्य से जुड़ी दो डायरी प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि इन प्रविष्टियों और जांच के दौरान सामने आए अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित नकद लेनदेन की कड़ी सामने आई।
डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख
जांच एजेंसी के मुताबिक, मौर्य के सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने और कथित वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने से संबंधित तथ्य जांच में सामने आए हैं।
ईओडब्ल्यू ने आरोप पत्र में डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है। तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान के मोबाइल फोन से आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों, डायरी प्रविष्टियों और डिजिटल साक्ष्यों को कथित लेवी नेटवर्क की कड़ियों से जोड़कर देख रही है।
इससे मामले की जांच केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने कोल लेवी मामले में करीब 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आकलन किया है। अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट होगा कि कथित लेवी नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी और आरोपों की पुष्टि किस स्तर तक होती है।