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Chhattisgarh: माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा में ढाबा चलाकर आदिवासी महिलाओं ने पेश की मिसाल, लाखों में कर रहीं कमाई

Sun, 11 Sep 2022 09:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दंतेवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दंतेवाड़ा Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 11 Sep 2022 09:09 PM IST
सार

मनवा ढाबा की शुरुआत मई में गीदम-बीजापुर सड़क स्थित बड़े करली गांव में हुई थी। इसकी शुरुआत में जिला प्रशासन का भी बड़ा योगदान है। गांव के गौथान पर जिला प्रशासन ने इसे आजीविका निर्माण गतिविधि के रूप में शुरू कराया था।

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Tribal women opened Manwa Dhaba in Maoist-affected Dantewada Chhattisgarh
दंतेवाड़ा में नक्सली - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी महिलाएं मिसाल पेश कर रहीं है। खुद को घरेलू कामों और खेतीबाड़ी तक सीमित रखनेवाली ये आदिवासी महिलाओं ने इस इलाके में एक नई पहल की है। दरअसल, इन महिलाओं ने यहां एक ढाबा खोला है, जिसका नाम उन्होंने मनवा ढाबा (मेरा ढाबा) रखा है। ये ढाबा कुछ ही समय में काफी लोकप्रिय हो गया है। इससे उत्साहित महिलाएं अब टिफिन सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। 

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दरअसल, मनवा ढाबा की शुरुआत मई में गीदम-बीजापुर सड़क स्थित बड़े करली गांव में हुई थी। इसकी शुरुआत में जिला प्रशासन का भी बड़ा योगदान है। गांव के गौथान पर जिला प्रशासन ने इसे आजीविका निर्माण गतिविधि के रूप में शुरू कराया था। गीदम बाजार से छह किलोमीटर दूर 3,000 वर्ग फीट जमीन पर मनवा ढाबा बना है। इसके लिए प्रशासन ने जिला खनिज फाउंडेशन से धन मुहैया कराया। मनवा ढाबा का पूरा इंतजाम गौथान से जुड़े बोस बोडिन स्वयं सहायता समूह की 10 महिलाएं करती हैं। समूह की एक अर्चना कुर्रम कहती हैं, पहले मेरा परिवार आजीविका के लिए खेती पर ही निर्भर था। लेकिन, अब ढाब से हमारी अच्छी आमदनी हो रही है। 
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लाखों में पहुंचा कारोबार
मनवा ढाबा ग्राहकों को मांसाहारी और शाकाहारी दोनों तरह के भोजन परोसता है। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि ढाबा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इसकी आय कभी-कभी प्रतिदिन 20 हजार रुपए के आसपास पहुंच जाती है। इस ढाबे ने अब तक 8 लाख रुपये का कारोबार किया है। दंतेवाड़ा के कलेक्टर विनीत नंदनवार ने कहा कि ये आदिवासी महिलाएं रूढ़ियों को तोड़कर एक साथ आई हैं और उन्हाेंने ऐसी भूमिकाएं अपनाई हैं जिन पर कभी पुरुषों का वर्चस्व था।

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