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जान से मारने की बात कह देना सजा का आधार नहीं: बिलासपुर हाईकोर्ट

Tue, 19 Dec 2017 05:30 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Tue, 19 Dec 2017 05:30 PM IST
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To talk about killing cannot be the basis of punishment says Bilaspur High Court
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : highcourt.cg.gov.in
बिलासपुर हाईकोर्ट ने जान से मारने की बात कह देने को सजा के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना है। हाईकोर्ट ने परिस्थितिजनक सबूतों में तारतम्यता के अभाव में आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया है। 
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छत्तीसगढ़ में बेमेतरा जिला के सिंघोरा निवासी रिपेश कुमार देवांगन अपने पिता हीरा लाल, मां जाम बाई और चाचा कार्तिक राम देवांगन के साथ एक ही घर में रहता था। 26 सितंबर की सुबह रिपेश की लाश उसके कमरे में पाई गई थी। उसके सर पर हथौड़े से कई वार किए गए थे और उसकी लाश खून से लथपथ पाई गई थी। 
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पुलिस के मुताबिक मृतक की मां ने शिकायत में बताया कि, 'रिपेश ने घर के एक हिस्से में दुकान खोला रखा था। 25 सितंबर की रात को वह खाना खाकर दुकान के एक कमरे में सोने चला गया। उसके बगल के कमरे में उसका चाचा कार्तिक राम और उसके बगल के कमरे में जाम बाई-हीरा लाल सोए हुए थे। सुबह जब वह रिपेश के कमरे में गई तो उसका शव देखा। उसके चाचा कार्तिक राम ने रिपेश की हत्या की क्योंकि रिपेश कार्तिक के शराब पीने का विरोध करता था। इस बात को लेकर कार्तिक राम ने रिपेश को जान से मारने की धमकी दी थी। यही नहीं वारदात के बाद सुबह वह अपने कमरे से गायब था।' 
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पुलिस ने मृतक की मां के बयान के आधार पर आरोपी कार्तिक राम देवांगन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथौड़े को भी जब्त कर लिया। पुलिस ने परिस्थितिजनक सबूतों को जमा कर आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। इस केस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने परिस्थितिजनक सबूतों और हत्या करने की बात कहने को आधार मानकर आरोपी को उम्र कैद और 500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। इस सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। 


बिलासपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, 'मामले का कोई चश्मदीद गवाह नहीं होने, परिस्थिति जनक सबूतों में तारतम्यता के अभाव और सिर्फ जान से मार देने की बात कहने को सजा के लिए पर्याप्त सबूत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले में हत्या की कोई ठोस वजह होना नहीं पाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को मिली सजा को रद्द कर छोड़ने का आदेश दिया है।
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