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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का शिक्षक भर्ती में बड़ा फैसला: महिला आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति अवैध, 3 लाख मुआवजा

Thu, 03 Sep 2026 02:45 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 03 Sep 2026 02:45 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने रायपुर नगर निगम की इस कार्रवाई को अवैध ठहराया।

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The High Court declared the appointment of men to female-reserved teacher recruitment posts illegal
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने रायपुर नगर निगम की इस कार्रवाई को अवैध ठहराया। हालांकि, अदालत ने 12 साल पहले नियुक्त हो चुके 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त नहीं की हैं। इस लापरवाही के चलते मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलने वाली महिला अभ्यर्थी को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश रायपुर नगर निगम आयुक्त को दिया गया है।
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रायपुर नगर निगम ने वर्ष 2013-14 में सहायक शिक्षक (शिक्षाकर्मी वर्ग-3, विज्ञान) के कुल 204 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिला श्रेणी के लिए आरक्षित 12 पदों पर नियम विरुद्ध तरीके से पुरुष उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया गया था। इस गड़बड़ी के खिलाफ धमतरी निवासी नम्रता देवांगन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने ओबीसी महिला वर्ग में 60.70 अंक प्राप्त किए थे और मेरिट सूची में उनका स्थान 1594वां था। इसके बावजूद उनके हक के आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति कर दी गई।
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मामले में रायपुर नगर निगम ने अपने बचाव में वर्ष 1997 के एक सर्कुलर का हवाला दिया था। नगर निगम का कहना था कि योग्य महिला उम्मीदवार न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाई थीं, जिसके कारण ये पद उसी वर्ग के पुरुषों से भरे गए थे। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी वैधानिक नियम के महिलाओं के आरक्षित पदों को किसी अन्य वर्ग में बदलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने माना कि नगर निगम की गलती के कारण याचिकाकर्ता को वर्ष 2014 में नियुक्ति नहीं मिल सकी थी।
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अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता को बाद में गणित शिक्षिका के पद पर नियुक्ति मिल गई थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने 12 साल पहले नियुक्त हो चुके 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त नहीं कीं। हालांकि, इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण याचिकाकर्ता को जो मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, उसकी भरपाई के लिए मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को तीन लाख रुपये की राशि का भुगतान करने का स्पष्ट आदेश दिया है।
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