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सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड: फांसी की सजा सुनते ही कुलदीप के चेहरे पर दिखा खौफ, रायपुर जेल भेजा जाएगा

Thu, 08 Oct 2026 08:48 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, सूरजपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सूरजपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 08 Oct 2026 08:48 PM IST
सार

जिले के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन के प्रबंधों के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई।

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Surajpur mother-daughter murder case: Kuldeep's face showed fear upon hearing the death sentence; he will be s
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सूरजपुर जिले के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन के प्रबंधों के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई। फांसी की सजा सुनते ही अंबिकापुर जेल में मौजूद कुलदीप साहू के चेहरे पर खौफ और तनाव नजर आया।
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फांसी की सजा का एलान होते ही दोषी घबरा गया।
इससे पहले 29 सितंबर को पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने के प्रयास के एक अन्य मामले में 10 साल की सजा मिलने के बाद वह अदालत से बाहर निकलते समय मुस्कुराता हुआ नजर आया था। उस समय उसकी कुटिल मुस्कान का वीडियो भी सामने आया था। फांसी की सजा पाने वाले अन्य दो दोषियों में रिंकू उर्फ फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी शामिल हैं। अदालत ने मामले के चौथे दोषी आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा दी।
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जेल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू
सजा मिलने के बाद अब कुलदीप साहू को अंबिकापुर केंद्रीय जेल से रायपुर जेल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रायपुर जेल में फांसी की व्यवस्था होने के कारण आगे की जेल प्रक्रिया के तहत उसे वहां भेजने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में कुलदीप साहू अंबिकापुर जेल में इस मामले के अन्य सह-आरोपियों के साथ बंद है। जेल प्रशासन सुरक्षा और आगामी कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठा रहा है।
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दो साल पुराना चर्चित मामला
यह मामला 13 अक्तूबर 2024 का है, जब सूरजपुर थाने में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की नृशंस हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच के दौरान मामले में दुष्कर्म की भी पुष्टि हुई थी। करीब दो साल तक फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों को देखा। अदालत ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था और अब फैसले के तहत तीन दोषियों को फांसी तथा एक को मृत्यु तक जेल में रहने का आदेश जारी कर दिया।

निर्णय के बाद भावुक हुआ परिवार
अदालत से फैसला आते ही पीड़ित परिवार के चेहरों पर संतोष की भावना दिखाई दी। करीब दो साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस निर्णय से भावुक होकर प्रधान आरक्षक ने कहा कि अब जाकर उनकी दिवंगत पत्नी और बेटी की आत्मा को शांति मिली होगी। फैसले की जानकारी मिलते ही परिजनों ने पटाखे फोड़कर खुशी व्यक्त की। प्रधान आरक्षक के भाई ने बताया कि पूरा परिवार अदालत के फैसले से पूरी तरह संतुष्ट है और उन्हें न्यायपालिका से इसी कड़े निर्णय की उम्मीद थी।


कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प
प्रधान आरक्षक के भाई ने बताया कि इस हृदयविदारक घटना के बाद उनके छोटे भाई पूरी तरह टूट चुके थे, जिन्हें पूरे परिवार ने मिलकर संभाला। उन्होंने संकट की इस घड़ी में पुलिस विभाग, सहयोगी कर्मचारियों और मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा समय-समय पर हाल-चाल जानने तथा सहयोग देने के लिए आभार प्रकट किया। परिजनों ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी पक्ष आगे उच्च अदालत का रुख करता है, तो वे भी अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और अंतिम समय तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
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