फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Shardiya Navratri 2025: Devotional atmosphere prevails in the Shaktipeeth of Chhattisgarh

शारदीय नवरात्र 2025 : छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठों में भक्ति का माहौल, मंदिरों में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

Sun, 21 Sep 2025 01:34 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 21 Sep 2025 01:34 PM IST
सार

सोमवार 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेशभर के देवी मंदिरों में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।

विज्ञापन
Shardiya Navratri 2025: Devotional atmosphere prevails in the Shaktipeeth of Chhattisgarh
बम्लेश्वरी-मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोमवार 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेशभर के देवी मंदिरों में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। बस्तर के दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, बिलासपुर के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर और राजधानी रायपुर समेत कई शक्तिपीठों में इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

विज्ञापन


डोंगरगढ़ में भीड़ प्रबंधन के लिए ज़िगज़ैग व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी तरह की भगदड़ न हो। यहां तक कि विदेशी भक्तों ने भी ज्योत प्रज्वलन के लिए अग्रिम बुकिंग कराई है। वहीं, भक्तों की सुविधा को देखते हुए 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का अस्थायी ठहराव डोंगरगढ़ में किया गया है।
विज्ञापन


छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठ
रतनपुर (महामाया मंदिर)
बिलासपुर जिले का यह मंदिर मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। इसे 52 शक्तिपीठों में गिना जाता है और कोसलेश्वरी के नाम से भी पूजा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डोंगरगढ़ (बम्लेश्वरी मंदिर)
करीब 2000 साल पुराने इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है। इसे कभी वैभवशाली कामाख्या नगरी कहा जाता था। मां बम्लेश्वरी को राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी माना जाता है।


दंतेवाड़ा (दंतेश्वरी मंदिर)
यहां देवी सती का दांत गिरा था, इस कारण यह 52 शक्तिपीठों में शामिल है। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है।

रायपुर (महामाया मंदिर)
लगभग 1400 साल पुराना यह मंदिर हैहयवंशी राजाओं द्वारा बनवाया गया था। यहां मां लक्ष्मी, महामाया और समलेश्वरी की संयुक्त पूजा होती है।

अंबिकापुर (महामाया अंबिका देवी)
किवदंती है कि यहां महामाया का धड़ स्थित है, जबकि सिर रतनपुर में है। इस मंदिर का महत्व शारदीय नवरात्र में और बढ़ जाता है।

सक्ती (मां चंद्रहासिनी)
देवी सती का दाढ़ गिरने से यह स्थान शक्तिपीठ बना। यहां विशाल मूर्तियां और पौराणिक झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।

कोरबा (मां सर्वमंगला)
स्थानीय जमींदार परिवार द्वारा निर्मित यह मंदिर गुफाओं और नदी के बीच बसे अनोखे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है।

धमतरी (मां अंगारमोती)
गंगरेल बांध बनने के बाद 52 गांवों के लोगों ने अपनी आराध्या देवी को यहां स्थापित किया। आज भी माता अंगारमोती को लोग ग्राम देवी मानते हैं।

गरियाबंद (जतमई माता)
यहां झरनों से घिरा मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि ये जलधाराएं स्वयं माता की दासियां हैं।

महासमुंद (मां चंडी पीठ)
बागबहारा स्थित यह मंदिर पहले तंत्र साधना का प्रमुख स्थल माना जाता था। प्राकृतिक शिला पर माता का स्वरूप उकेरा गया है।

इस बार नवरात्र में कई स्थानों पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए घी के दीपक नहीं जलाए जाएंगे। फिर भी श्रद्धा और आस्था का उत्साह पहले से कहीं अधिक दिखाई दे रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed