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CBI को झटका: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज कुद्दुसी को भेजा नोटिस दिल्ली हाई कोर्ट ने किया रद्द

Tue, 27 Jan 2026 04:54 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 27 Jan 2026 04:54 PM IST
सार

कोर्ट ने करप्शन मामले में CBI की ओर से जारी नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि जांच के नाम पर किसी व्यक्ति से उसकी निजी जानकारी जबरन नहीं मांगी जा सकती।

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Setback for CBI: Delhi High Court cancels notice sent to retired judge Quddusi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आई.एम. कुद्दुसी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने करप्शन मामले में CBI की ओर से जारी नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि जांच के नाम पर किसी व्यक्ति से उसकी निजी जानकारी जबरन नहीं मांगी जा सकती।
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हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 (CrPC) का इस्तेमाल केवल पहले से मौजूद दस्तावेज या सामग्री मंगाने के लिए किया जा सकता है। इस धारा के जरिए किसी आरोपी या गवाह से उसकी याददाश्त के आधार पर जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट की डिटेल्स, स्टेटमेंट या घरेलू स्टाफ से जुड़ी जानकारी जैसी निजी बातें धारा 91 के दायरे में नहीं आतीं। ऐसा करना व्यक्ति को खुद के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर करने जैसा होगा, जो संविधान के अनुच्छेद 20(3) के खिलाफ है।
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हाई कोर्ट बेंच ने कहा कि अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने खिलाफ सबूत देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, चाहे जांच किसी भी स्तर पर हो। जांच एजेंसियां कानून के दायरे में रहकर ही काम कर सकती हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि अगर CBI को किसी तरह की जानकारी चाहिए तो उसके लिए कानून में दूसरे रास्ते मौजूद हैं। जांच एजेंसी धारा 161 CrPC के तहत पूछताछ कर सकती है, जिसमें व्यक्ति को चुप रहने का अधिकार होता है। इसके अलावा बैंक, टेलीकॉम कंपनी या अन्य संस्थानों से सीधे रिकॉर्ड भी मंगाए जा सकते हैं। इस फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया और दोहराया कि धारा 91 का मकसद सिर्फ दस्तावेज जुटाना है, न कि किसी आरोपी से निजी जानकारी उगलवाना।
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पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आई.एम. कुद्दुसी से जुड़ा है। करप्शन केस की जांच के दौरान CBI ने उन्हें नोटिस भेजकर मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और ड्राइवर व घरेलू नौकर से जुड़े विवरण मांगे थे। जस्टिस कुद्दुसी ने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही CBI का नोटिस रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए CBI की अपील खारिज कर दी।
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