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CG: 'रंग-तरंग' में बिखरेगी छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की छटा, सजेगी सुरों की महफिल, 1 से 3 सितंबर तक होगा आयोजन

Mon, 31 Aug 2026 10:37 AM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Mon, 31 Aug 2026 10:37 AM IST
सार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच देने के लिये  संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन की ओर से ‘रंग तरंग’ का आयोजन गया है। एक से तीन सितंबर तक शाम सात बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच महंत घासीदास संग्रहालय में सुरों की महफिल सजेगी। 
 

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CG: Chhattisgarhi folk culture programme Rang-Tarang  for September 1–3
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच देने के लिये  संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन की ओर से ‘रंग तरंग’ का आयोजन गया है। एक से तीन सितंबर तक शाम सात बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच महंत घासीदास संग्रहालय में सुरों की महफिल सजेगी। 

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‘रंग तरंग’ के जरिये छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में पेश किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने-सुनने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही समकालीन संगीत के साथ जोड़ना है।
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लोक वाद्यों की गूंज के साथ सजेगी संगीत की महफिल
‘रंग तरंग’ को संस्कृति, रंगों और सुरों का फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को सांस्कृतिक विरासत का नया अनुभव प्रदान करेगा।
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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया मंच
तीन दिवसीय इस आयोजन के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ ही आम लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और प्रदेश की कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। ‘रंग तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक ही मंच पर लाकर संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की पहल है।

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