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आजादी का जश्न, लेकिन खतरे के साए में कदम: स्वतंत्रता दिवस पर जान जोखिम में डालकर नाला पार किए स्कूली बच्चे
Sat, 16 Aug 2025 03:29 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 16 Aug 2025 03:29 PM IST
सार
देशभर में जहां 79वां स्वतंत्रता दिवस तिरंगों की छटा और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया गया, वहीं छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से तस्वीरें आईं, जिन्होंने जश्न के बीच लापरवाही की कड़वी हकीकत सामने रख दी।
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स्वतंत्रता दिवस पर जान जोखिम में डालकर नाला पार किए स्कूली बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देशभर में जहां 79वां स्वतंत्रता दिवस तिरंगों की छटा और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया गया, वहीं छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से तस्वीरें आईं, जिन्होंने जश्न के बीच लापरवाही की कड़वी हकीकत सामने रख दी।
वीडियो में मासूम बच्चे आज़ादी का पर्व मनाने स्कूल जा रहे हैं, लेकिन उनका रास्ता किसी रंगीन जुलूस से नहीं, बल्कि उफनते नाले की धाराओं से होकर गुजरता है। यूनिफॉर्म पहने ये बच्चे तिरंगा थामे लड़खड़ाते कदमों से बहते पानी को पार कर रहे हैं।
यह नज़ारा सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखंड के महेशपुर गांव के गौंटियापारा का है। ग्रामीण बताते हैं कि हर बरसात यही दृश्य दोहराया जाता है। बच्चों को पढ़ाई और राष्ट्रीय पर्व तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
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नाले पर पुल या पगडंडी न होने से गांववालों की समस्या बरसों से जस की तस है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीण कहते हैं, बारिश तेज हो जाए तो यह नाला मौत का रास्ता बन जाता है। आज़ादी के 79 साल बाद भी जब बच्चों को शिक्षा पाने और झंडा फहराने तक के लिए ऐसे जोखिम उठाने पड़ें, तो यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है।
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वीडियो में मासूम बच्चे आज़ादी का पर्व मनाने स्कूल जा रहे हैं, लेकिन उनका रास्ता किसी रंगीन जुलूस से नहीं, बल्कि उफनते नाले की धाराओं से होकर गुजरता है। यूनिफॉर्म पहने ये बच्चे तिरंगा थामे लड़खड़ाते कदमों से बहते पानी को पार कर रहे हैं।
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यह नज़ारा सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखंड के महेशपुर गांव के गौंटियापारा का है। ग्रामीण बताते हैं कि हर बरसात यही दृश्य दोहराया जाता है। बच्चों को पढ़ाई और राष्ट्रीय पर्व तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
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नाले पर पुल या पगडंडी न होने से गांववालों की समस्या बरसों से जस की तस है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीण कहते हैं, बारिश तेज हो जाए तो यह नाला मौत का रास्ता बन जाता है। आज़ादी के 79 साल बाद भी जब बच्चों को शिक्षा पाने और झंडा फहराने तक के लिए ऐसे जोखिम उठाने पड़ें, तो यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है।