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CG News: जल संचय-जन भागीदारी 2.0 की समीक्षा, 31 मई तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य
Fri, 20 Feb 2026 04:59 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 20 Feb 2026 04:59 PM IST
सार
नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान की प्रगति और आगामी रणनीति की गहन समीक्षा की गई।
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जल संचय-जन भागीदारी 2.0 की समीक्षा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने अभियान को और गति देने का निर्णय लिया है। नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान की प्रगति और आगामी रणनीति की गहन समीक्षा की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की। केंद्रीय मंत्री वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में चल रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और इसे लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने पानी के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
पहले चरण की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। इस दौरान बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का व्यापक निर्माण हुआ। प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं, जिनमें से कुछ ब्लॉकों में भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
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दूसरे चरण में तकनीक आधारित रणनीति अपनाते हुए 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से ज्यादा किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई और मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अभियान के तहत जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा। युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित कर अभियान से जोड़ा जाएगा। क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में क्रमशः 65 प्रतिशत और 40 प्रतिशत कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की सराहना करते हुए मनरेगा के तहत स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में राज्य और केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी जिलों के कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और इसे लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने पानी के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
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पहले चरण की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। इस दौरान बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का व्यापक निर्माण हुआ। प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं, जिनमें से कुछ ब्लॉकों में भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
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दूसरे चरण में तकनीक आधारित रणनीति अपनाते हुए 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से ज्यादा किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई और मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अभियान के तहत जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा। युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित कर अभियान से जोड़ा जाएगा। क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में क्रमशः 65 प्रतिशत और 40 प्रतिशत कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की सराहना करते हुए मनरेगा के तहत स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में राज्य और केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी जिलों के कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।