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Chhattisgarh News: निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को राहत, अब तय समय से ज्यादा काम पर मिलेगा पूरा ओवरटाइम
Thu, 18 Dec 2025 02:52 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 18 Dec 2025 02:52 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब नियोक्ता अपनी मर्जी से कर्मचारियों से लंबे समय तक काम नहीं करवा सकेंगे।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब नियोक्ता अपनी मर्जी से कर्मचारियों से लंबे समय तक काम नहीं करवा सकेंगे। राज्य विधानसभा ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम में अहम संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिससे काम के घंटे और ओवरटाइम को लेकर स्पष्ट नियम तय हो गए हैं।
नए प्रावधानों के तहत किसी भी कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम नौ घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकेगा। तय सीमा से ज्यादा काम कराने की स्थिति में मालिक को कर्मचारी को अनिवार्य रूप से ओवरटाइम भुगतान करना होगा। यह कानून उन सभी दुकानों, प्रतिष्ठानों और निजी संस्थानों पर लागू होगा, जहां दस या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने यह संशोधन विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसे सदन में पारित कर दिया गया। संशोधन के अनुसार, कर्मचारियों को लगातार लंबे समय तक काम पर नहीं रखा जा सकेगा। विश्राम अवधि को जोड़कर भी एक शिफ्ट की कुल समय-सीमा साढ़े दस घंटे से अधिक नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों या अत्यावश्यक कार्य की स्थिति में भी कर्मचारी की ड्यूटी बारह घंटे से आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
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इस संशोधन में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नए नियमों के तहत महिलाओं को रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, सुरक्षित परिवहन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इन शर्तों को पूरा किए बिना महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम पर नहीं बुलाया जा सकेगा।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि निजी दुकानों, शोरूम्स और संस्थानों में अक्सर कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता रहा है, जबकि उन्हें अतिरिक्त मेहनत का कोई भुगतान नहीं मिलता। नए कानून के लागू होने से कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगेगी और उन्हें तय समय से अधिक काम करने पर उसका उचित पारिश्रमिक मिल सकेगा। यह संशोधन निजी क्षेत्र में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए काम के बेहतर हालात और अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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नए प्रावधानों के तहत किसी भी कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम नौ घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकेगा। तय सीमा से ज्यादा काम कराने की स्थिति में मालिक को कर्मचारी को अनिवार्य रूप से ओवरटाइम भुगतान करना होगा। यह कानून उन सभी दुकानों, प्रतिष्ठानों और निजी संस्थानों पर लागू होगा, जहां दस या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
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श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने यह संशोधन विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसे सदन में पारित कर दिया गया। संशोधन के अनुसार, कर्मचारियों को लगातार लंबे समय तक काम पर नहीं रखा जा सकेगा। विश्राम अवधि को जोड़कर भी एक शिफ्ट की कुल समय-सीमा साढ़े दस घंटे से अधिक नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों या अत्यावश्यक कार्य की स्थिति में भी कर्मचारी की ड्यूटी बारह घंटे से आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
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इस संशोधन में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नए नियमों के तहत महिलाओं को रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, सुरक्षित परिवहन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इन शर्तों को पूरा किए बिना महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम पर नहीं बुलाया जा सकेगा।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि निजी दुकानों, शोरूम्स और संस्थानों में अक्सर कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता रहा है, जबकि उन्हें अतिरिक्त मेहनत का कोई भुगतान नहीं मिलता। नए कानून के लागू होने से कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगेगी और उन्हें तय समय से अधिक काम करने पर उसका उचित पारिश्रमिक मिल सकेगा। यह संशोधन निजी क्षेत्र में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए काम के बेहतर हालात और अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।