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CG: अब हथियार नहीं, हुनर से बदल रही पुनर्वासितों की जिंदगी, इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में दिया जा रहा प्रशिक्षण
Wed, 15 Apr 2026 01:19 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 15 Apr 2026 01:19 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है। कोण्डागांव जिले में पहले हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर कौशल प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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पुनर्वासित नक्सलियों को इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में ट्रेनिंग दिया जा रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है। कोण्डागांव जिले में पहले हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर कौशल प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जिले के पुनर्वास केंद्र में रहकर ग्राम कुधुर के तुलसी राम कश्यप, रजमन और गोबरू लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण के तहत उन्हें वायरिंग सहित तकनीकी कार्यों की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे आगे स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
तुलसी राम कश्यप ने बताया कि पहले क्षेत्र में असुरक्षा और भय के माहौल के कारण वे भटक गए थे, लेकिन शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अब वे प्रशिक्षण लेकर अपने गांव में ही काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
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इसी तरह रजमन और गोबरू भी प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार शुरू कर अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहते हैं। तीनों युवाओं ने कहा कि इस पहल ने उन्हें नया जीवन जीने का अवसर दिया है और अब वे सुरक्षित माहौल में अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं।
प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोण्डागांव का पुनर्वास केंद्र इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है, जहां युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
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जिले के पुनर्वास केंद्र में रहकर ग्राम कुधुर के तुलसी राम कश्यप, रजमन और गोबरू लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण के तहत उन्हें वायरिंग सहित तकनीकी कार्यों की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे आगे स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
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तुलसी राम कश्यप ने बताया कि पहले क्षेत्र में असुरक्षा और भय के माहौल के कारण वे भटक गए थे, लेकिन शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अब वे प्रशिक्षण लेकर अपने गांव में ही काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
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इसी तरह रजमन और गोबरू भी प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार शुरू कर अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहते हैं। तीनों युवाओं ने कहा कि इस पहल ने उन्हें नया जीवन जीने का अवसर दिया है और अब वे सुरक्षित माहौल में अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं।
प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोण्डागांव का पुनर्वास केंद्र इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है, जहां युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।