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रायपुर: 28 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में छह पूर्व अफसर समेत 22 नामजद, 1000 पन्नों का आरोप-पत्र पेश

Mon, 26 Oct 2026 08:04 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 26 Oct 2026 08:04 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के पंडरिया में 1998 के शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो ने 22 आरोपियों के खिलाफ करीब 1000 पन्नों का आरोप-पत्र पेश किया है। मामले में छह तत्कालीन अधिकारी और 16 चयनित अभ्यर्थी नामजद हैं। जांच में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी, आरक्षण नियमों के उल्लंघन और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आरोप सामने आए हैं।

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घोटाला। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

कवर्धा के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में ब्यूरो ने करीब 28 वर्ष पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 22 आरोपियों के विरुद्ध लगभग 1000 पन्नों का चालान प्रस्तुत कर दिया है। यह मामला वर्ष 1998 का है, जब जनपद पंचायत पंडरिया में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर भर्ती आयोजित की गई थी। जांच के बाद प्रस्तुत इस चालान में छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत पर्याप्त साक्ष्य पाए हैं।
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भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और शिकायत
जनपद पंचायत पंडरिया में वर्ष 1998 के दौरान हुई 320 पदों की भर्ती को लेकर तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने 25 दिसंबर, 1998 को ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चयन प्रक्रिया के दौरान व्यापक भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन किया गया। इसमें साक्षात्कार पंजी में अंकों की काट-छांट, महाविद्यालय में नियमित पढ़ाई कर रहे अभ्यर्थियों को अध्यापन अनुभव के अंक देने, आरक्षण नियमों की अनदेखी करने तथा चयन समिति के सदस्यों द्वारा अपने निकट संबंधियों को लाभ पहुंचाने के दावे किए गए थे। शिकायत की प्राथमिक जांच के उपरांत वर्ष 2000 में केस दर्ज कर विस्तृत विवेचना प्रारंभ की गई थी।
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मेरिट सूची और आरक्षण नियमों का उल्लंघन
विवेचना के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि तत्कालीन मध्य प्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी भर्ती नियमों के अनुसार अर्हता परीक्षा के अंकों के आधार पर विभिन्न प्रवर्गों की योग्यताक्रम सूची बनाई जानी थी। नियमानुसार कुल पदों के मुकाबले तीन गुना अभ्यर्थियों को परीक्षा या साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाना आवश्यक था। इसके विपरीत, साक्षात्कार हेतु तैयार की गई सूची में अर्हता परीक्षा के अंकों के साथ अध्यापन अनुभव के बोनस अंक पहले ही जोड़ दिए गए। इस फेरबदल के कारण पात्र अभ्यर्थी साक्षात्कार से वंचित रह गए, जबकि अपात्र अभ्यर्थियों को अवसर प्राप्त हो गया। इसके अतिरिक्त, सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 महिला अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया गया, परंतु अंतिम चयन में क्षैतिज आरक्षण व समायोजन नियमों का पालन नहीं हुआ। वहीं अनुसूचित जाति दिव्यांग वर्ग के चार पदों के लिए 15 उपलब्ध आवेदकों में से 12 के स्थान पर केवल 10 अभ्यर्थियों को ही बुलाया गया।


रिश्तेदारों को लाभ और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र
ब्यूरो की जांच में सामने आया कि शिक्षा स्थायी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा सदस्य बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा के नजदीकी रिश्तेदार इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी थे। समिति सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों की उम्मीदवारी की पूर्व घोषणा नहीं की और साक्षात्कार के दौरान स्वयं उपस्थित रहकर उन्हें अंक प्रदान किए। साथ ही, कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने जिस अवधि का अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, उसी अवधि में वे विभिन्न महाविद्यालयों में नियमित छात्र के रूप में अध्ययनरत थे और छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर रहे थे। चयन समिति के समक्ष आपत्तियां दर्ज होने के बाद भी ऐसे अभ्यर्थियों को अनुभव के बोनस अंक दे दिए गए।

आरोपी लोकसेवक और कानूनी कार्रवाई
इस प्रकरण की लंबी विवेचना के दौरान कुल नौ तत्कालीन अधिकारियों और 16 अभ्यर्थियों की भूमिका रेखांकित की गई थी। इनमें से तीन तत्कालीन अधिकारियों—मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई तथा शिक्षा स्थायी समिति सदस्य बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा का निधन हो चुका है। वर्तमान में छह जीवित तत्कालीन अधिकारियों और 16 अभ्यर्थियों सहित 22 लोगों के विरुद्ध चालान पेश किया गया है। नामजद अधिकारियों में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती और अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण एन.आर. वर्मा, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और तत्कालीन सदस्य हरिराम घृतलहरे सम्मिलित हैं। इन सभी के विरुद्ध धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत अभियोजन चलाया जा रहा है।
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