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Raipur News: रायपुर रेल मंडल को मिलेगी हाईटेक सिग्नलिंग, 226 करोड़ की परियोजना से 13 स्टेशन होंगे अपग्रेड
Thu, 02 Jul 2026 02:05 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 02 Jul 2026 02:05 PM IST
सार
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए भारतीय रेल ने 226 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) परियोजना को मंजूरी प्रदान की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए भारतीय रेल ने 226 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना के तहत दुर्ग-ताडोकी रेलखंड के 13 स्टेशनों पर नई डिजिटल सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा और गति दोनों में सुधार होगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होने के बाद सिग्नल और ट्रैक पॉइंट्स का संचालन पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगा। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सकेगी।
परियोजना के दायरे में मारौदा, रिसमा, गुंडरदेही, लाटाबोर, बालोद, कुसुमकसा, दल्लीराजहरा, गुदुम, भानुप्रतापपुर, केवटी, अंतागढ़, ताडोकी और रायपुर स्टोर डिपो को शामिल किया गया है। इन सभी स्टेशनों पर मौजूदा पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
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रेलवे का मानना है कि यह तकनीकी उन्नयन भविष्य में बढ़ने वाले यात्री और माल परिवहन के दबाव को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नई प्रणाली से ट्रेनों की समयपालन क्षमता बेहतर होगी, परिचालन दक्षता बढ़ेगी और दुर्घटनाओं की आशंका में भी कमी आएगी।
रेल अधिकारियों का कहना है कि भारतीय रेल अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर लगातार काम कर रही है और रायपुर मंडल की यह परियोजना उसी अभियान का हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद रेल सेवाएं अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और तेज होंगी, जिससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा।
इस परियोजना के जरिए रायपुर मंडल आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक से लैस प्रमुख रेलखंडों में शामिल होगा और क्षेत्र के रेल बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने के साथ भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होने के बाद सिग्नल और ट्रैक पॉइंट्स का संचालन पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगा। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सकेगी।
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परियोजना के दायरे में मारौदा, रिसमा, गुंडरदेही, लाटाबोर, बालोद, कुसुमकसा, दल्लीराजहरा, गुदुम, भानुप्रतापपुर, केवटी, अंतागढ़, ताडोकी और रायपुर स्टोर डिपो को शामिल किया गया है। इन सभी स्टेशनों पर मौजूदा पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
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रेलवे का मानना है कि यह तकनीकी उन्नयन भविष्य में बढ़ने वाले यात्री और माल परिवहन के दबाव को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नई प्रणाली से ट्रेनों की समयपालन क्षमता बेहतर होगी, परिचालन दक्षता बढ़ेगी और दुर्घटनाओं की आशंका में भी कमी आएगी।
रेल अधिकारियों का कहना है कि भारतीय रेल अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर लगातार काम कर रही है और रायपुर मंडल की यह परियोजना उसी अभियान का हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद रेल सेवाएं अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और तेज होंगी, जिससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा।
इस परियोजना के जरिए रायपुर मंडल आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक से लैस प्रमुख रेलखंडों में शामिल होगा और क्षेत्र के रेल बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने के साथ भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।