फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Raipur news: 1.5 kg tumor removed from chest of three year old girl

Raipur news: तीन साल की बच्ची के छाती से निकला डेढ़ किलो का ट्यूमर, सफल सर्जरी से मिला नया जीवन

Tue, 28 Nov 2023 05:49 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 28 Nov 2023 05:49 PM IST
सार

Raipur news: यह प्रदेश में पहला केस है। इतनी कम उम्र में छाती के अंदर इतना बड़ा ट्यूमर के सफल सर्जरी हुआ है। अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में तीन साल की मासूम के फेफड़े से डेढ़ किलोग्राम का ट्यूमर निकाला गया है।

विज्ञापन
Raipur news: 1.5 kg tumor removed from chest of three year old girl
तीन साल की बच्ची के छाती से निकला डेढ़ किलो का ट्यूमर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

Raipur news: राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में एक तीन साल की बच्ची को नया जीवन मिला है। दिल की बीमारी से जूझ रही नन्ही बच्ची का सफल ऑपरेशन किया गया है। यह प्रदेश में पहला केस है। इतनी कम उम्र में छाती के अंदर इतना बड़ा ट्यूमर के सफल सर्जरी हुआ है। अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में तीन साल की मासूम के फेफड़े से डेढ़ किलोग्राम का ट्यूमर निकाला गया है। इसे सामान्य भाषा में पोस्टीरियर मेडिस्टाइनल ट्यूमर कहा जाता है।

विज्ञापन

 
रायगढ़ जिले के अंतर्गत टुडरी गांव में रहने वाले बच्ची जन्म के बाद पूरी तरह सामान्य थी, लेकिन 2 साल के बाद उसके चलने की क्षमता खत्म हो गई। बच्ची अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। कई जगहों में इलाज कराया गया। फिर भी ठीक नहीं हुई। वहीं रायपुर के एम्स अस्पताल में इलाज से बच्ची की नई जिंदगी मिली है। बच्ची के रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर था, जिसके कारण बच्ची के पैरों की ताकत खत्म हो गई थी। एम्स के न्यूरोसर्जन ने मासूम के स्पाइनल कॉर्ड से ट्यूमर निकाल दिया जिससे थोड़ा बहुत बच्ची चलने लगी। कुछ ही समय बाद यह ट्यूमर बढ़ गया, जिससे बच्ची ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी। इसे देखते हुए डॉक्टर्स ने असंभव सर्जरी को संभव बनाया। 
विज्ञापन


डॉक्टर्स ने बताया कि ट्यूमर इतना बड़ा था कि शरीर के मुख्य अंग जैसे महाधमनी, सबक्लेवियन आर्टरी, हार्ट की झिल्ली और लंग हाइलम् को चपेट में ले लिया था, जिसके कारण इसको निकालना मुश्किल था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन से बच्ची के 95 प्रतिशत जान जाने की संभावना थी, लेकिन ऑपरेशन न होने पर जान बचना भी संभावना नहीं था। फिलहाल बच्चे के माता-पिता ने ऑपरेशन के लिए राजी हो गए। इसके बाद ट्यूमर के बहुत बड़े होने और मासूम की उम्र कम होने के कारण यहां एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने डीकेएस हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन की सलाह दी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
ऐसे हुआ ऑपरेशन
बच्ची के छाती के महत्वपूर्ण अंगों को बचाते हुए लगभग डेढ़ किलोग्राम का ट्यूमर निकाल दिया गया। यह ट्यूमर इतना बड़ा था कि इसको टुकड़ों में निकालना पड़ा। जिस स्पाइनल कार्ड से ट्यूमर की उत्पत्ति हुई थी वहां भी बारीकी से ट्यूमर के हर हिस्से को निकाला गया। स्पाइनल कॉर्ड को बचाते हुए ड्यूरा मेटर को भी रिपेयर किया गया, जिससे स्पाइल फ्लुइड लीकेज नहीं हो सके। ऑपरेशन के बाद मरीज को चार दिनों तक वेंटीलेटर में रखना पड़ा। ऑपरेशन के बाद लगभग 10 दिनों तक बच्ची की हालत नाजुक थी।  बच्ची को 18 दिनों बाद अस्पताल से डिस्चार्ज दे दिया गया और बच्ची बिल्कुल स्वस्थ है। बच्ची का चलना फिरना शुरू हो गया है। यह ऑपरेशन स्वास्थ्य सहायता योजना की मदद से पूरा निशुल्क हुआ। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed