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चेस्ट की हड्डियां हो गई थीं चकनाचूर: मेकाहारा के डॉक्टर्स का कमाल, टाइटेनियम प्लेट की नई पसली बनाकर बचाई जान
Fri, 15 Sep 2023 05:58 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 15 Sep 2023 05:58 PM IST
सार
सड़क दुर्घटना से चेस्ट की 7 हड्डियां टूटने पर डॉक्टर्स ने टाइटेनियम प्लेट बनाकर सफल सर्जरी की है। सड़क दुर्घटना में बुजुर्ग की छाती की पसली चकनाचूर हो गई थी। इस सफल ऑपरेशन को मेकाहारा के हार्ट चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी की टीम ने की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डॉ.भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टर्स ने टाइटेनियम प्लेट की नई पसली बनाकर बुजुर्ग की जान बचाई है। सड़क दुर्घटना से चेस्ट की 7 हड्डियां टूटने पर डॉक्टर्स ने टाइटेनियम प्लेट बनाकर सफल सर्जरी की है। सड़क दुर्घटना में बुजुर्ग की छाती की पसली चकनाचूर हो गई थी। इस सफल ऑपरेशन को मेकाहारा के हार्ट चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी की टीम ने की है।
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राजधानी रायपुर स्थित राजिम के एक 63 वर्षीय बुजुर्ग पेशे से शिक्षक हैं। वे स्कूल से घर आते समय दुर्घटना का शिकार हो गए। इससे सिर और छाती में गहरी चोटें आई। इस दौरान बेहोशी के हालात में गरियाबंद अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डीकेएस अस्पताल में शिफ्ट किया गया, लेकिन लगातार ऑक्सीजन सैचुरेशन गिरने के कारण मरीज को तुंरत एसीआई के हार्ट चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया। हार्ट सर्जरी विभाग में शिफ्ट करते ही मरीज को वेंटीलेटर पर ले गए। क्योंकि पसली के चकनाचूर होने के कारण फ्लेल चेस्ट बन गया था।
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वेंटीलेटर के सपोर्ट के बाद भी मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन ज्यादा अच्छा नहीं था। सर्जरी करने वाले डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज को अत्यधिक हाई रिस्क में ऑपरेशन के लिए लेना पड़ा। डॉ. कृष्णकांत साहू बताते हैं कि, मरीज की दाएं छाती की 7 से ज्यादा पसलियां जगह-जगह पर टूट गई थीं, जिससे कारण फ्लैल चेस्ट बन गया था। इसके साथ ही फेफड़े में गहरी चोट थी। ऐसे मरीज के छाती में टाइटेनियम की कृत्रिम पसली बनाकर छाती को नया आकार दिया गया।
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मरीज के चेस्ट में 5 लंबी टाइटेनियम की प्लेट लगाया गया है। इसके साथ ही फेफड़े में आई चोट को भी रिपेंयर किया गया। यह बहुत ही जटिल और हाई रिस्क ऑपरेशन होता है। बहुत गिने चुने संस्थानों ऐसा ऑपरेशन किया जाता है। इस ऑपरेशन में 4 यूनिट ब्लड लगा। मरीज की बेटी डीकेएस अस्पताल में नर्सिंग स्टॉफ है। यहां के स्टॉफ और डॉक्टर्स के सेवाभाव और दक्षता से काफी खुश हैं।
ऑपरेशन में शामिल टीम
- डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष),
- डॉ. निशांत सिंह चंदेल,
- डॉ. अजित (पी.जी.)
- डॉ.संजय त्रिपाठी (जेआर)
- एनेस्थेटिस्ट - डॉ. मनिन्दर कौर (पी.जी.)
- टेक्नीशियन - भूपेन्द्र कुमार, हरीशचन्द्र,
- नर्सिंग स्टॉफ - राजेन्द्र, नरेन्द्र, चोवाराम, मुनेश, किरण, प्रियंका, कुसुम,तेजेन्द्र,