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छत्तीसगढ़: निजी नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, 36 संस्थानों को विश्वविद्यालय का नोटिस
Tue, 08 Sep 2026 07:07 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 08 Sep 2026 07:07 PM IST
सार
विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ के 36 निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। उच्च न्यायालय की अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए विधिक नोटिस के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाया है
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एवं आयुष विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ के 36 निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। उच्च न्यायालय की अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए विधिक नोटिस के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाया है। कॉलेज प्रबंधनों को नोटिस में दर्ज कमियों के संबंध में अपना स्पष्ट पक्ष और आवश्यक तथ्य 9 सितंबर तक विश्वविद्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल से निजी नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं और कमियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, अजय कुमार त्रिपाठी ने अधिवक्ता शालिनी कश्यप के जरिये निजी नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग करते हुए विधिक नोटिस दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रदेश के 36 निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। नोटिस में कॉलेजों को बताई गई कमियों के संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस प्राप्त करने वाले संस्थानों में रायपुर जिले के कई प्रमुख निजी नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। इनमें अभनपुर स्थित सृष्टि नर्सिंग कॉलेज, न्यू राजेंद्र नगर का महाराणा प्रताप कॉलेज ऑफ नर्सिंग, गोढ़ी मंदिरहसौद का प्रतिभा इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, न्यू राजेंद्र नगर का लीला इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुरा का रामकृष्ण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, राजातालाब का वीपी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, रायपुर का श्री ओंकार कॉलेज ऑफ नर्सिंग और भेलवाडीह नवा रायपुर का अंत्योदय कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्रमुख हैं। रायपुर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के निजी नर्सिंग कॉलेजों को भी नोटिस दिया गया है।
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विश्वविद्यालय ने सभी संबंधित कॉलेजों को 9 सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया है। कॉलेजों को नोटिस में उल्लेखित बिंदुओं पर तथ्यात्मक जानकारी देनी होगी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्राप्त जवाबों का परीक्षण करेगा, जिससे नोटिस में बताई गई कमियों की वास्तविक स्थिति और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का पता चल सकेगा।
नर्सिंग कॉलेजों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रशिक्षण सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि कॉलेजों द्वारा दी गई जानकारी की जांच में कमियां सही पाई जाती हैं, तो विश्वविद्यालय आगे सख्त कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल 9 सितंबर तक जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ होगी।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, अजय कुमार त्रिपाठी ने अधिवक्ता शालिनी कश्यप के जरिये निजी नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग करते हुए विधिक नोटिस दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रदेश के 36 निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। नोटिस में कॉलेजों को बताई गई कमियों के संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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नोटिस प्राप्त करने वाले संस्थानों में रायपुर जिले के कई प्रमुख निजी नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। इनमें अभनपुर स्थित सृष्टि नर्सिंग कॉलेज, न्यू राजेंद्र नगर का महाराणा प्रताप कॉलेज ऑफ नर्सिंग, गोढ़ी मंदिरहसौद का प्रतिभा इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, न्यू राजेंद्र नगर का लीला इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुरा का रामकृष्ण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, राजातालाब का वीपी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, रायपुर का श्री ओंकार कॉलेज ऑफ नर्सिंग और भेलवाडीह नवा रायपुर का अंत्योदय कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्रमुख हैं। रायपुर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के निजी नर्सिंग कॉलेजों को भी नोटिस दिया गया है।
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विश्वविद्यालय ने सभी संबंधित कॉलेजों को 9 सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया है। कॉलेजों को नोटिस में उल्लेखित बिंदुओं पर तथ्यात्मक जानकारी देनी होगी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्राप्त जवाबों का परीक्षण करेगा, जिससे नोटिस में बताई गई कमियों की वास्तविक स्थिति और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का पता चल सकेगा।
नर्सिंग कॉलेजों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रशिक्षण सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि कॉलेजों द्वारा दी गई जानकारी की जांच में कमियां सही पाई जाती हैं, तो विश्वविद्यालय आगे सख्त कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल 9 सितंबर तक जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ होगी।