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नीट काउंसलिंग : ऑल इंडिया और राज्य कोटे के आरक्षण में अंतर पर विवाद

Wed, 07 Oct 2026 04:13 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 07 Oct 2026 04:13 PM IST
सार

नीट काउंसिलिंग 2026 में 455 अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थी को ऑल इंडिया कोटे के माध्यम से प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी, जबकि इसी अंक पर राज्य कोटे से रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया।

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NEET counselling: Dispute over difference in reservation for All India and State quota
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) काउंसिलिंग 2026 में 455 अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थी को ऑल इंडिया कोटे के माध्यम से प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी, जबकि इसी अंक पर राज्य कोटे से रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। इस स्थिति का मुख्य कारण ऑल इंडिया और राज्य कोटे के बीच आरक्षण नियमों का बड़ा अंतर होना है। ऑल इंडिया कोटे में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए केवल 12 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है, जबकि छत्तीसगढ़ में इस वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू है।
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आरक्षण व्यवस्था में इसी अंतर के कारण राज्य कोटे में कम अंकों पर भी प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश संभव हो पा रहा है। छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस की कुल 3,025 सीटें हैं, जहां 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इन सरकारी संस्थानों की 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटे के लिए आरक्षित रखी जाती हैं, जिन पर नीट अंक और मेरिट सूची के अनुसार प्रवेश दिया जाता है। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग आवंटन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
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आरक्षण व्यवस्था और डोमिसाइल की स्थिति
नीट काउंसिलिंग के दौरान अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद भी अनेक अभ्यर्थी एमबीबीएस में प्रवेश पाने से वंचित रह गए। रायपुर सहित राज्य के अन्य बड़े शहरों में रहने वाले कई विद्यार्थियों के अभिभावकों के पास छत्तीसगढ़ का मूल निवासी प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है। इसके चलते वे छात्र राज्य कोटे की सीटों पर अपना दावा प्रस्तुत नहीं कर सके।
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आरक्षण नियमों में भिन्नता के कारण ऑल इंडिया और राज्य कोटे के कटऑफ में भी काफी अंतर देखा जा रहा है। स्थानीय अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य में स्टेट कोटे के लिए अलग से सूची जारी नहीं की जाती। इसका लाभ उठाकर कुछ अभ्यर्थी फर्जी डोमिसाइल बनवाकर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले रहे हैं, जिससे स्थानीय छात्रों का बड़ा नुकसान हो रहा है।

दस्तावेज के सत्यापन में धांधली की शिकायत
प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को राज्य कोटे से सीट आवंटित करने की शिकायत अब चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तक पहुंच गई है। 21 सितंबर को 10 छात्रों ने आयुक्त कार्यालय में सौंपे पत्र में दस्तावेज सत्यापन के दौरान अधिकारियों पर गंभीरता न बरतने का आरोप लगाया है।

छात्रों के अनुसार ओडिशा और महाराष्ट्र की छात्राओं का प्रवेश जांजगीर-चांपा के मेडिकल कॉलेज में और झारखंड की छात्रा का दाखिला अंबिकापुर में कराया गया है। इसके अलावा दो निजी मेडिकल कॉलेजों में तीन तथा एक अन्य निजी डेंटल कॉलेज में एक छात्रा का प्रवेश हुआ है। अभ्यर्थियों ने आयुक्त से इन सभी संदिग्ध आवंटनों को तुरंत रद्द करने की मांग की है, ताकि स्थानीय निवासियों को अवसर मिल सके। इस संबंध में अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने पुख्ता दस्तावेज के साथ दोबारा याचिका दायर करने का विकल्प देते हुए खारिज कर दिया।

एनआरआई कोटे की सीटों का प्रबंधन
छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे का हाल काफी चिंताजनक बना हुआ है। केवल वास्तविक एनआरआई आवेदकों को प्रवेश देने की सख्ती के कारण दो राउंड की काउंसिलिंग समाप्त होने के बाद महज 65 सीटों पर ही दाखिला हो पाया है। प्रदेश के छह निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की कुल 192 सीटें स्वीकृत हैं।


वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मानिक चटर्जी और हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार काउंसिलिंग के शुरुआती दो दौर के रुझानों से स्पष्ट है कि एनआरआई कोटे की बची हुई सीटों को जल्द ही प्रबंधन कोटे में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इस बदलाव का सीधा लाभ दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को मिलेगा।
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