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चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ BJP को बड़ा झटका: क्या है साय के इस Video में, क्यों छोड़ी पार्टी, किस पर लगाया आरोप

Mon, 01 May 2023 07:00 AM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Mon, 01 May 2023 07:00 AM IST
सार

CG BJP Leader Nandkumar Sai resign: छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री की बात करने वाले बीजेपी के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने प्रदेश के बीजेपी के एक बड़े नेता पर निशाना साधा है। उन्होंने इस्तीफा के साथ ही जो वीडियो शेयर किया है। 

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Nandkumar Sai resigns from chhattisgarh BJP, see here released video
नंदकुमार साय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री की बात करने वाले बीजेपी के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने प्रदेश के बीजेपी के एक बड़े नेता पर निशाना साधा है। उन्होंने इस्तीफा के साथ ही जो वीडियो शेयर किया है। उस वीडियो ने पूरे छत्तीसगढ़ की सियासत में खलबली मचाकर रख दी है। आखिर क्या है इस वीडियो में। ये जानने के लिए आपको पूरा वीडियो देखना और सुनना पड़ेगा। 

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वीडियो में नंदकुमार साय ये कह रहे हैं कि एक नेता ने मुझसे कहा कि 'मुख्यमंत्री तो आपको ही बनाना था पर आप चुनाव नहीं जीत पाए। परिणाम ये हुआ कि किसी अन्य को बना दिया गया। लाठी, डंडा, मेहनत परिश्रम हमने किया। हमको किसी प्रकार का कोई भी दायित्व नहीं दिया गया। मेरे बड़े भाई दिलीप सिंह जुदेव को नीचा दिखाया गया। बीजेपी शासनकाल में ब्यूरोक्रेट्स हावी हो गए थे। कार्यकर्ता किनारे हो गए थे। जिसका मैं विरोध करता था। मैं कहता था कि यहां के कार्यकर्ताओं की सुनी जानी चाहिए। उनके हिसाब से काम होना चाहिए। 
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'इसलिए मुझे छत्तीसगढ़ की राजनीति से बाहर रखा जाता था ताकि मैं...
उन्होंने कहा कि मैं इस बात को कहूं नहीं, इसलिए मुझे छत्तीसगढ़ से बाहर रखा जाता था। ताकि मैं अपनी बातों को कह ना पाऊं। देख ना पाऊं और वो अपनी मनमानी करते रहे। मेरे खिलाफ ये बाते कही गई कि ये आदिवासियों की मीटिंग करते हैं। आदिवासी मुख्यमंत्री की बात करते हैं और लोगों को भड़काते रहते हैं। पत्रकारों के पूछने पर मैं कहता था कि आदिवासी राज्य है आदिवासी सीएम हो तो बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन ये निर्णय करने का काम बीजेपी के केंद्रीय संगठन का है। अभी मेरे कार्यकर्ताओं को भयभीत किया गया है। मेरे फोटो को दूसरे के साथ लगाने से रोका जा रहा है। मैं इस पार्टी से बहुत ही दुखी और व्यथित हूं। आहत हूं। मैं पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं। 

गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत

उनके इस्तीफा देने के साथ ही प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। मामले में जमकर सियासत हो रही है। कांग्रेस इस मामले में नंदकुमार साय के बहाने आदिवासी वोट को लेकर लगातार हमलावर है। बीजेपी पर जमकर निशाना साध रही है। कांग्रेस नेता लगातार तीखी प्रतिक्रया दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बीजेपी पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि 'आज नंद कुमार साय ने अपने साथ-साथ आदिवासियों के “मन की बात” भी कह दी है।  #आदिवासी_विरोधी_भाजपा। सीएम बघेल ने अपने ट्वीट के साथ ही नंदकुमार साय के इस्तीफे का खत भी शेयर किया है। 

अभी इस्तीफा स्वीकार नहीं, मनाएंगे: रमन सिंह
दूसरी ओर बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि मेरी काफी दिनों से उनसे समान्यत: मुलाकात नहीं हुई है। पार्टी के बैठकों में मिलते रहे हैं, लेकिन आज जिस प्रकार का बयान आया है, वैसे कभी चर्चा कभी नहीं हुई। उनके जाने से आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी पर प्रभाव पड़ने के सवाल पर कहा कि वे पार्टी के सीनियर नेता हैं। उनका इस्तीफा आया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के पास है। अभी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। उनसे बातचीत की जाएगी। साव और पार्टी के अन्य नेता भी उनसे बातचीत करेंगे। संगठन के राष्ट्रीय नेता भी बात करेंगे। उन्हें मनाया जाएगा। कुछ ना कुछ रास्ता निकल सकता है। साय से संपर्क करने के सवाल पर कहा कि उनसे संपर्क किया गया पर बातचीत नहीं हो सकी है। 

कोई नाराजगी नहीं, गलतफहमी दूर करेंगे: अरुण साव
दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि मेरी उनसे बातचीत हुई है। कोई नाराजगी नहीं थी। बहुत ही सामान्य बातचीत हुई थी। आज उनका इस्तीफा मिला है। कल फिर उनसे बातचीत की जाएगी। उन्हें मनाने की पूरी कोशिश की जाएगी।  कोई गलतफहमी है, तो उसे दूर कर लिया जाएगा। वे पार्टी के बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं। गलतफहमी है, किसी तरह की उनकी। पार्टी में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। बात है तो निश्चिततौर पर हम उनसे बातचीत करेंगे। दो दिन पहले ही उनसे सामान्य बातचीत हुई थी। 

साय का कांग्रेस में स्वागत है: मरकाम
मामले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें भारतीय जनता पार्टी में घुटन महसूस हो रही थी। लंबे समय से वे मीडिया में भी बयान देते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी में आदिवासी नेताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया। वर्ष 2003 और 2008 में आदिवासी सीटों की वजह से भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में सरकार बनी थी। भारतीय जनता पार्टी लगातार आदिवासी नेताओं की उपेक्षा की, जिसमें वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय भी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में नंदकुमार साय के लिए दरवाजे खुले हैं। अगर वह कांग्रेस में आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। कांग्रेस पार्टी हमेशा आदिवासियों का सम्मान करती रही है। 



बीजेपी में आदिवासी नेताओं की उपेक्षा: सुशील आनंद 
वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में आदिवासी नेताओं की उपेक्षा हुई, उनको अपमानित किया जाता है।  इसके पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को विश्व आदिवासी के दिन अपमानित किया गया। प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय भारतीय जनता पार्टी छोड़ने को मजबूर हुए। साय ने भारतीय जनता पार्टी को पुष्पित पल्लवित करने के लिए अपना खून पसीना लगाया है। यदि भारतीय जनता पार्टी को छोड़ने को मजबूर हुए, तो बात का प्रमाण है कि भारतीय जनता पार्टी देश में आदिवासियों की उपेक्षा कर रही है। उनका शोषण कर रही है। नंदकुमार साहब विद्वान, बेहद विनम्र और संघर्षशील की वजह से जाना जाता है । उन्होंने यदि जनता पार्टी को छोड़ा है, इसका मतलब है कि भारतीय जनता पार्टी लगातार देश के बड़े वर्ग के साथ अन्याय कर रही है। तभी नंद कुमार साय जैसे विद्वान नेता के बर्दाश्त की इंतहा हो गई तो वे छोड़ने को मजबूर हुए। 

कौन हैं नंदकुमार साय
नंदकुमार साय छत्तीसगढ़ भाजपा के एक बड़े आदिवासी चेहरा और आदिवासी मुख्यमंत्री के सबसे बड़े पैरोकार माने जाते रहे हैं। वे 1977 में पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीत कर मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे थे। साय तीन बार विधायक और तीन बार के सांसद भी रह चुके हैं। अविभावित मध्य प्रदेश में 1997 से 2000 के बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। राज्य गठन के बाद साय छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बने। 

 

  • वर्ष 2003 में नंदकुमार साय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें वह हार गए थे।  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सरगुजा संसदीय सीट से चुनाव जीता था और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल भी पूरा किया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में साल 2017 में उन्हें अनुसूचित जाति आयोग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। वर्तमान में वह संगठन महामंत्री के पद पर थे। 


5 महीने बाद होना है विधानसभा चुनाव
छत्तीसगढ़ में पांच महीने बाद ही विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में साय के इस्तीफे से बीजेपी में खलबली मच गई है। 
उनके इस्तीफे का लेटर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस लेटर में उन्होंने इस्तीफा की वजह बताते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को इस्तीफा भेजा है। 

आखिर क्यों दिया इस्तीफा
साय ने पत्र में लिखा है कि 'भारतीय जनता पार्टी के गठन एवं अस्तित्व में आने के प्रारंभ से लेकर आज पर्यंत तक पार्टी द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण पदों एवं उत्तरदायित्व की जितनी भी जिम्मेदारी मुझे दी गई उसे पूरे समर्पण एवं कर्तव्य परायणता के साथ मैंने अपने उत्तरदायित्व एवं पदों का निर्वहन किया, जिसके लिए मैं पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय जनता पार्टी में मेरी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से मेरे विरुद्ध अपने ही पार्टी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा षडयंत्र पूर्वक मिथ्या आरोप अन्य गतिविधियों द्वारा लगातार मेरी गरिमा को ठेस पहुंचाया जा रहा है, जिससे मैं अत्यंत आहत महसूस कर रहा हूं। बहुत गहराई से विचार करने के बाद मैं भारतीय जनता पार्टी की अपनी प्राथमिक सदस्यता अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। अतः मेरी इस्तीफा स्वीकार करने की कृपा करें'

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