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रायपुर में अगले महीने होगा साहित्य उत्सव: देश के 100 से अधिक साहित्यकार होंगे शामिल, सीएम ने लोगो किया अनावरण

Tue, 02 Dec 2025 03:50 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 02 Dec 2025 03:50 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अगले महीने एक बड़े साहित्यिक आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी 2026 तक होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में देश भर से 100 से अधिक नामी साहित्यकार शामिल होंगे।

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Literature festival next month in Raipur: More than 100 litterateur from across country to participate
मुख्यमंत्री साय ने किया उत्सव के लोगो का अनावरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अगले महीने एक बड़े साहित्यिक आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी 2026 तक होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में देश भर से 100 से अधिक नामी साहित्यकार शामिल होंगे। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास कार्यालय में उत्सव के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया।
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लोगो अनावरण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य के रजत वर्ष में आयोजित होने वाला यह साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्य मानचित्र पर नई पहचान देगा। उन्होंने कहा कि यह मंच साहित्य, लेखन और सामाजिक विमर्श को नई दिशा प्रदान करेगा और आम लोगों को पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। लोगो अनावरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा, जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव, वरिष्ठ साहित्यकार सुशील त्रिवेदी, चितरंजन कर, गिरीश पंकज, संजीव बक्शी, प्रदीप श्रीवास्तव और शकुंतला तरार उपस्थित रहे।
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तीन दिवसीय कार्यक्रम में होंगे 11 सत्र
सरकार द्वारा महज दो महीने में इस बड़े आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। महोत्सव जनजातीय संग्रहालय के निकट आयोजित होगा। कार्यक्रम में कुल 11 सत्र शामिल किए गए हैं, जिसमें पांच समानांतर सत्र,चार सामूहिक सत्र और तीन संवाद सत्र शामिल है। इन सत्रों में देश के प्रमुख साहित्यकार और प्रतिभागी विचार-विमर्श और संवाद में शामिल होंगे।
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लोगो में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब
रायपुर साहित्य उत्सव का लोगो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और साहित्यिक आत्मा को दर्शाता है। लोगो में सल्फी वृक्ष को राज्य के नक्शे के आकार में प्रस्तुत किया गया है, जो जनजातीय परंपराओं, जैव-विविधता और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। “आदि से अनादि तक” लिखावट साहित्य की कालातीत यात्रा को दर्शाती है, जबकि “सुरसरि सम सबके हित होई” साहित्य की समावेशी, सर्वहितकारी प्रकृति को रेखांकित करता है। यह संदेश देता है कि छत्तीसगढ़ का लोक साहित्य, जनजातीय ज्ञान और आधुनिक रचनाएँ एक ही सांस्कृतिक धारा का अभिन्न हिस्सा हैं।
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