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राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज: देश-दुनिया के सामने खुली पर्यटन संभावनाओं की नई राह
Sun, 13 Sep 2026 06:19 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 13 Sep 2026 06:19 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं ने राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर अपनी पहचान मजबूत की है।
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राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं ने राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर अपनी पहचान मजबूत की है। विशाखापट्टनम में आयोजित 41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटी IATO) Annual Convention में प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं और विकास की दिशा को देशभर से पहुंचे पर्यटन प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ के सम्मान से भी नवाजा गया।
विशाखापट्टनम के नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन की थीम ‘भारत—विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ रही। इसमें देश में पर्यटन को बढ़ावा देने, नए पर्यटन स्थलों के विकास और पर्यटन कारोबार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, आदिवासी संस्कृति, वन्यजीव, जलप्रपात, पुरातात्विक धरोहर और साहसिक पर्यटन स्थलों को वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के सामने प्रदर्शित किया गया।
टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ आने का दिया न्योता
प्रस्तुति के दौरान देशभर के ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी नई यात्रा इटिनरी में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया गया। पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रदेश में चल रही पर्यटन विकास की पहलों और नए पर्यटन स्थलों की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई। पर्यटन को स्थानीय समुदायों से जोड़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक प्रदेश की पर्यटन पहचान पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
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केंद्रीय मंत्री समेत कई प्रतिनिधि हुए शामिल
सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं छायांकन मंत्री कंदुला दुर्गेश और आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव शमशेर सिंह रावत समेत पर्यटन और यात्रा उद्योग से जुड़े कई प्रतिनिधि शामिल हुए। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। सम्मेलन के दौरान उन्हें सम्मानित भी किया गया।
बस्तर से सिरपुर तक पर्यटन की विविधता पर जोर
छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान में प्राकृतिक स्थलों के साथ इतिहास, धर्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन का भी महत्वपूर्ण स्थान है। बस्तर के जलप्रपात और जंगल, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को पर्यटन की बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन को विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में B2B बैठकों से बढ़े संपर्क
सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स की अच्छी रुचि देखने को मिली। बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने पवेलियन पहुंचकर पर्यटन प्रतिनिधियों के साथ B2B बैठकें कीं। इन बैठकों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन पैकेज, प्रमुख डेस्टिनेशन और इटिनरी को लेकर चर्चा हुई। इसके जरिए पर्यटन क्षेत्र में नए साझेदारी अवसर तलाशने और प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। 11 और 12 सितंबर को सम्मेलन के साथ भारतीय पर्यटन मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों और यात्रा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
13 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधियों ने मंच पर यह सम्मान प्राप्त किया। इस उपलब्धि को प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में हो रहे प्रयासों तथा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को लेकर चर्चा से प्रदेश में पर्यटन के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी से प्रदेश के पर्यटन स्थलों को देशभर में प्रचारित करने के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ पर्यटन निवेश, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रकृति, वन्यजीव, जलप्रपात, इतिहास, धार्मिक स्थल, जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं की विविधता के चलते छत्तीसगढ़ को देश के उभरते पर्यटन गंतव्यों में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिला है। ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान इसी दिशा में प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
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विशाखापट्टनम के नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन की थीम ‘भारत—विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ रही। इसमें देश में पर्यटन को बढ़ावा देने, नए पर्यटन स्थलों के विकास और पर्यटन कारोबार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, आदिवासी संस्कृति, वन्यजीव, जलप्रपात, पुरातात्विक धरोहर और साहसिक पर्यटन स्थलों को वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के सामने प्रदर्शित किया गया।
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टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ आने का दिया न्योता
प्रस्तुति के दौरान देशभर के ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी नई यात्रा इटिनरी में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया गया। पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रदेश में चल रही पर्यटन विकास की पहलों और नए पर्यटन स्थलों की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई। पर्यटन को स्थानीय समुदायों से जोड़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक प्रदेश की पर्यटन पहचान पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
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केंद्रीय मंत्री समेत कई प्रतिनिधि हुए शामिल
सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं छायांकन मंत्री कंदुला दुर्गेश और आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव शमशेर सिंह रावत समेत पर्यटन और यात्रा उद्योग से जुड़े कई प्रतिनिधि शामिल हुए। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। सम्मेलन के दौरान उन्हें सम्मानित भी किया गया।
बस्तर से सिरपुर तक पर्यटन की विविधता पर जोर
छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान में प्राकृतिक स्थलों के साथ इतिहास, धर्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन का भी महत्वपूर्ण स्थान है। बस्तर के जलप्रपात और जंगल, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को पर्यटन की बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन को विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में B2B बैठकों से बढ़े संपर्क
सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स की अच्छी रुचि देखने को मिली। बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने पवेलियन पहुंचकर पर्यटन प्रतिनिधियों के साथ B2B बैठकें कीं। इन बैठकों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन पैकेज, प्रमुख डेस्टिनेशन और इटिनरी को लेकर चर्चा हुई। इसके जरिए पर्यटन क्षेत्र में नए साझेदारी अवसर तलाशने और प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। 11 और 12 सितंबर को सम्मेलन के साथ भारतीय पर्यटन मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों और यात्रा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
13 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधियों ने मंच पर यह सम्मान प्राप्त किया। इस उपलब्धि को प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में हो रहे प्रयासों तथा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को लेकर चर्चा से प्रदेश में पर्यटन के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी से प्रदेश के पर्यटन स्थलों को देशभर में प्रचारित करने के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ पर्यटन निवेश, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रकृति, वन्यजीव, जलप्रपात, इतिहास, धार्मिक स्थल, जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं की विविधता के चलते छत्तीसगढ़ को देश के उभरते पर्यटन गंतव्यों में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिला है। ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान इसी दिशा में प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।