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विरोध के बीच टली एसईसीएल जनसुनवाई फिर 25 सितंबर को: भू-प्रभावितों ने जताया विरोध और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
Thu, 10 Sep 2026 12:56 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:56 PM IST
सार
एसईसीएल की जनसुनवाई विरोध के कारण पहले स्थगित हो गई थी। अब इसकी नई तिथि 25 सितंबर तय कर दी गई है। इस घोषणा के बाद प्रभावित भू-स्थापित इलाके में हड़कंप मच गया है।
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एसईसीएल जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों में भारी विरोध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के भिलाई खुर्द एवं आसपास के प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों ने आगामी 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पूर्व अपनी वर्षों से लंबित एवं जायज मांगों के निराकरण की मांग की है। इस संबंध में एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम (भू-विस्थापित) समिति भिलाई खुर्द के बैनर तले ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वे क्षेत्र के विकास एवं परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन परिवारों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, जिनकी जमीन, आजीविका और सामाजिक जीवन परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है और पूर्व में प्रभावित हो चुका है। ग्रामीण लंबे समय से अपने उचित मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों एवं भूमि विस्थापित संगठन द्वारा लंबित मांगों के निराकरण को लेकर आपत्ति एवं विरोध दर्ज कराने के कारण उसे स्थगित करना पड़ा था। अब पुनः 25 सितंबर को जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है। यदि बिना ठोस समाधान के जनसुनवाई आयोजित की जाती है तो प्रभावित परिवारों में स्वाभाविक रूप से असंतोष बढ़ेगा।
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समाधान
ग्रामीणों ने जनसुनवाई से पूर्व प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर बिंदुवार चर्चा और समयबद्ध समाधान की मांग की है।पूर्व में 1963-64 में जिन किसानों की भूमि अर्जित की गई है और उन्हें जमीन के एवज में एसईसीएल में डिस्प्लेसमेंट रोजगार नहीं दिया गया है, उन्हें भूमि के एवज में रोजगार दिया जाए। 1963-64 में अर्जित भूमि के जिन किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
भूमि एवं संपत्तियों का उचित एवं पारदर्शी मुआवजा, प्रभावित परिवारों के पात्र युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, सम्मानजनक पुनर्वास तथा प्रभावित गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच जनसुनवाई से पहले सार्थक संवाद कराने का आग्रह किया है। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस बार बात नहीं बने तो वह जेल जाने को तैयार है और इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
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ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वे क्षेत्र के विकास एवं परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन परिवारों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, जिनकी जमीन, आजीविका और सामाजिक जीवन परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है और पूर्व में प्रभावित हो चुका है। ग्रामीण लंबे समय से अपने उचित मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते आ रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों एवं भूमि विस्थापित संगठन द्वारा लंबित मांगों के निराकरण को लेकर आपत्ति एवं विरोध दर्ज कराने के कारण उसे स्थगित करना पड़ा था। अब पुनः 25 सितंबर को जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है। यदि बिना ठोस समाधान के जनसुनवाई आयोजित की जाती है तो प्रभावित परिवारों में स्वाभाविक रूप से असंतोष बढ़ेगा।
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समाधान
ग्रामीणों ने जनसुनवाई से पूर्व प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर बिंदुवार चर्चा और समयबद्ध समाधान की मांग की है।पूर्व में 1963-64 में जिन किसानों की भूमि अर्जित की गई है और उन्हें जमीन के एवज में एसईसीएल में डिस्प्लेसमेंट रोजगार नहीं दिया गया है, उन्हें भूमि के एवज में रोजगार दिया जाए। 1963-64 में अर्जित भूमि के जिन किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
भूमि एवं संपत्तियों का उचित एवं पारदर्शी मुआवजा, प्रभावित परिवारों के पात्र युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, सम्मानजनक पुनर्वास तथा प्रभावित गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच जनसुनवाई से पहले सार्थक संवाद कराने का आग्रह किया है। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस बार बात नहीं बने तो वह जेल जाने को तैयार है और इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

SECLजनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों में भारी विरोध