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Korba: एनटीपीसी के राखड़ से ग्रामीणों को नहीं मिली राहत, बढ़ रहा आक्रोश, प्रबंधन अपने अड़ियल रवैये पर बरकरार
Fri, 10 Feb 2023 04:40 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: Digvijay Singh
Updated Fri, 10 Feb 2023 04:40 PM IST
सार
सूखे मौसम में धूल और बारिश के दिनों में कीचड़ से ग्रामीण परेशान होते हैं। धूल के कारण आसपास लगे पेड़-पौधे भी काले पड़ गए हैं। पत्तों पर डस्ट जमा हुई है। गांवों के सरपंच कई बार एनटीपीसी प्रबंधन से शिकायत कर चुके हैं। प्रबंधन की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलता है।
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एनटीपीसी के राखड़ से ग्रामीणों को नहीं मिली राहत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एनटीपीसी जमनीपाली पावर प्लांट के राखड़ से ग्रामीणों को अब तक कोई राहत नहीं मिली है। आंदोलन के दौरान एनटीपीसी के अधिकारियों ने समस्या दूर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी भी समस्या जस के तस बनी हुई है। राखड़ उड़कर घरों में जा रहा है। इससे ग्रामीणों का जीना दुभर हो गया है। ग्रामीणों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जिम्मेदार एनटीपीसी प्रबंधन राखड़ के लिए कोई इंतजाम नहीं कर रहा है।
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व्यापक इंतजाम तो दूर राख में पानी का छिड़काव ठीक ढंग से नहीं हो रहा है जिससे जहरीला राख उड़कर आसमान में बादल का रूप ले रहे हैं हल्की हवा चलते ही आस पास के दर्जन भर गांव में राख की आंधी चल रही है जिससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं। हालात यह हैं कि ग्रामीण घर के अंदर में खाना तक नहीं बना पा रहे हैं उनकी त्वचा में खुजली का प्रकोप है जिससे ग्रामीण नाराज है। ग्रामीण नाराज होकर आज राखड डैम का काम बंद करवा कर सात दिन के अंदर सभी मांग पूरी होने को लेकर एनटीपीसी के वाइट हाउस के सामने धरने पर बैठ गये।
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कई घंटे तक अधिकारी और ग्रामीणों में बहस होने के बाद आखिरकार जिला पंचायत अध्यक्ष शिवकला छत्रपाल सिंह कंवर, जनपद उपाध्यक्ष गोविंद सिंह कटघोरा एवं ग्राम वासियों के सामने एनटीपीसी को लिखित में देना पड़ा कि सात दिन के भीतर मांगे पूरी कर दी जाएंगी जिसके बाद ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन समाप्त किया। राखड़ को उड़ने से रोकने के लिए प्रबंधन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे जिस कारण राखड डेम से प्रभावित ग्रामीण आए दिन समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे है।
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सूखे मौसम में धूल और बारिश के दिनों में कीचड़ से परेशान होते हैं। धूल के कारण आसपास लगे पेड़-पौधे भी काले पड़ गए हैं। पत्तों पर डस्ट जमा हुई है। गांवों के सरपंच कई बार एनटीपीसी प्रबंधन से शिकायत कर चुके हैं। प्रबंधन की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलता है।