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खाद वितरण घोटाले में कोरबा कलेक्टर का सख्त एक्शन: प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर, बर्खास्तगी व राशि वसूली के निर्देश
Thu, 16 Oct 2025 07:05 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 16 Oct 2025 07:05 PM IST
सार
कोरबा जिले के मोरगा आदिम जाति सेवा समिति प्रबंधक द्वारा खरीफ 2025-26 में खाद वितरण में भारी अनियमितता पाए जाने पर कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज, सेवा से बर्खास्तगी व गबन राशि वसूली के निर्देश जारी किए हैं। संयुक्त जांच दल ने 164 यूरिया, 44 डीएपी व अन्य उर्वरकों की बोरी गबन, मृतक किसानों के फर्जी हस्ताक्षर व स्टॉक फर्जीवाड़ा का खुलासा किया।
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संयुक्त जांच दल का छापा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकास खंड के मोरगा स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में खरीफ वर्ष 2025-26 के दौरान खाद वितरण में अनियमितता और गड़बड़ी का मामला सामने आया है। किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायत की जांच के बाद, कलेक्टर अजीत वसंत ने समिति प्रबंधक महेन्द्र शर्मा के विरुद्ध FIR दर्ज कराने, उन्हें सेवा से पृथक करने और गबन की गई राशि की वसूली करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत मिलते ही चार सदस्यीय जांच दल का गठन
जिला प्रशासन को मोरगा समिति के प्रबंधक पर खाद वितरण में गड़बड़ी और अनियमितता की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इस पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोंड़ी उपरोड़ा के नेतृत्व में 4 सदस्यीय एक संयुक्त जांच दल गठित किया। इस दल में नायब तहसीलदार, प्रभारी वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी, राजस्व निरीक्षक और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी शामिल थे।
जांच दल ने समिति में संधारित अभिलेखों, बिक्री पंजी, डिलवरी मेमो और पीओएस मशीन की एंट्री का गहन अवलोकन किया। जांच में पाया गया कि समिति को 01 अप्रैल 2025 से 01 सितंबर 2025 तक कुल 09 ट्रक खाद प्राप्त हुआ था, जिसमें यूरिया, सुपर फास्फेट, डीएपी, एनपीके, पोटाश, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी शामिल थे।
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हालांकि, समिति द्वारा संधारित वितरण पंजी और पीओएस पंजी में खाद की मात्रा में भारी अंतर पाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, यूरिया की 164 बोरी, डी.ए.पी. की 44 बोरी, एन.पी.के. की 79 बोरी और पोटाश (एमओपी) की 08 बोरी का अंतर दर्ज किया गया।
गंभीर अनियमितता और अधिनियमों का उल्लंघन
जांच दल ने इस अंतर को घोर अनियमितता की श्रेणी में रखा है। यह उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 की धारा 35 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 03 व 07 का स्पष्ट उल्लंघन है। रिपोर्ट में प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से हटाने और उचित कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रबंधक महेन्द्र शर्मा स्वयं डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर भी कार्यरत थे। उन्होंने अपने बयान में स्वीकार किया कि धान खरीदी और खाद बिक्री से संबंधित समस्त कार्य का निष्पादन और स्टॉक अद्यतन का कार्य उन्हीं द्वारा किया जाता है। प्रबंधक ने स्कंद पंजी का संधारण नहीं किया था, केवल डिलवरी चालान और इनवॉइस की मूल प्रति ही उपलब्ध थी।
प्रबंधक ने यह भी स्वीकार किया कि प्राप्त 09 ट्रक खाद में से 05 ट्रक का वितरण किया जा चुका है और शेष खाद को अन्य किसानों के खातों में जोड़ दिया गया है, जिसका भुगतान वे स्वयं करेंगे। इससे भी गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा मृत बताए गए दो व्यक्तियों के खातों से फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से खाद का उठाव किया गया है। इस संबंध में प्रबंधक द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर, कलेक्टर अजीत वसंत ने समिति प्रबंधक महेन्द्र शर्मा के विरुद्ध FIR दर्ज कराने, उन्हें सेवा से तत्काल पृथक करने और गबन की गई राशि की वसूली करने के निर्देश संबंधित विभागों को जारी किए हैं। यह कार्यवाही जिले में सहकारी समितियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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शिकायत मिलते ही चार सदस्यीय जांच दल का गठन
जिला प्रशासन को मोरगा समिति के प्रबंधक पर खाद वितरण में गड़बड़ी और अनियमितता की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इस पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोंड़ी उपरोड़ा के नेतृत्व में 4 सदस्यीय एक संयुक्त जांच दल गठित किया। इस दल में नायब तहसीलदार, प्रभारी वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी, राजस्व निरीक्षक और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी शामिल थे।
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जांच दल ने समिति में संधारित अभिलेखों, बिक्री पंजी, डिलवरी मेमो और पीओएस मशीन की एंट्री का गहन अवलोकन किया। जांच में पाया गया कि समिति को 01 अप्रैल 2025 से 01 सितंबर 2025 तक कुल 09 ट्रक खाद प्राप्त हुआ था, जिसमें यूरिया, सुपर फास्फेट, डीएपी, एनपीके, पोटाश, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी शामिल थे।
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हालांकि, समिति द्वारा संधारित वितरण पंजी और पीओएस पंजी में खाद की मात्रा में भारी अंतर पाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, यूरिया की 164 बोरी, डी.ए.पी. की 44 बोरी, एन.पी.के. की 79 बोरी और पोटाश (एमओपी) की 08 बोरी का अंतर दर्ज किया गया।
गंभीर अनियमितता और अधिनियमों का उल्लंघन
जांच दल ने इस अंतर को घोर अनियमितता की श्रेणी में रखा है। यह उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 की धारा 35 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 03 व 07 का स्पष्ट उल्लंघन है। रिपोर्ट में प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से हटाने और उचित कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रबंधक महेन्द्र शर्मा स्वयं डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर भी कार्यरत थे। उन्होंने अपने बयान में स्वीकार किया कि धान खरीदी और खाद बिक्री से संबंधित समस्त कार्य का निष्पादन और स्टॉक अद्यतन का कार्य उन्हीं द्वारा किया जाता है। प्रबंधक ने स्कंद पंजी का संधारण नहीं किया था, केवल डिलवरी चालान और इनवॉइस की मूल प्रति ही उपलब्ध थी।
प्रबंधक ने यह भी स्वीकार किया कि प्राप्त 09 ट्रक खाद में से 05 ट्रक का वितरण किया जा चुका है और शेष खाद को अन्य किसानों के खातों में जोड़ दिया गया है, जिसका भुगतान वे स्वयं करेंगे। इससे भी गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा मृत बताए गए दो व्यक्तियों के खातों से फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से खाद का उठाव किया गया है। इस संबंध में प्रबंधक द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर, कलेक्टर अजीत वसंत ने समिति प्रबंधक महेन्द्र शर्मा के विरुद्ध FIR दर्ज कराने, उन्हें सेवा से तत्काल पृथक करने और गबन की गई राशि की वसूली करने के निर्देश संबंधित विभागों को जारी किए हैं। यह कार्यवाही जिले में सहकारी समितियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।