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बिना बसाहट मकान खाली कराने का आरोप: 200 परिवारों का ऐलान, 28 सितंबर को दंडवत न्याय यात्रा निकालेंगे ग्रामीण
Sun, 27 Sep 2026 02:36 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:36 PM IST
सार
कुसमुंडा परियोजना प्रभावित करीब 200 परिवारों ने बिना बसाहट मकान खाली कराने के दबाव का आरोप लगाया है। ग्रामीण 28 सितंबर को घंटाघर चौक से कलेक्टर कार्यालय तक दंडवत न्याय यात्रा निकालकर बेदखली रोकने और व्यवस्थित बसाहट की मांग करेंगे।
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200 परिवारों को बेघर करने के विरोध में दंडवत न्याय यात्रा का ऐलान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरबा जिले में कोयला खदान के लिए दशकों पहले जमीन देने वाले 200 परिवार अब बरसात में बेघर होने की कगार पर हैं। एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित मसाहती ग्राम चन्द्रनगर जटराज, तहसील दर्री के ग्रामीणों ने प्रशासन पर बिना बसाहट जबरन मकान खाली कराने का आरोप लगाते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। पीड़ित ग्रामीणों ने 28 सितंबर सोमवार को सुबह 9 बजे घंटाघर चौक से कलेक्टर कार्यालय तक दंडवत न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर इसकी सूचना दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना के लिए चार चरणों में वर्ष 1978-79, 1982-83, 1984-85 और अंतिम चरण 2010 में अर्जित की गई थी। अधिग्रहण के 16 साल बाद भी आज तक उन्हें व्यवस्थित बसाहट नहीं दी गई है।
आरोप है कि वर्तमान में कुसमुंडा के महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल और दर्री तहसीलदार गांव में आकर बिना बसाहट प्रदान किए मकान खाली कराने का दबाव बना रहे हैं। ग्रामीणों को धमकी दी जा रही है कि यदि स्वयं से मकान नहीं तोड़ा तो डोजर चलाकर मकान गिरा दिया जाएगा। डर और भय के कारण कई परिवारों ने अपने मकान तोड़ना शुरू भी कर दिया है, जबकि उन्हें आज तक बसाहट स्थल नहीं दिया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों द्वारा मौखिक रूप से कहा जा रहा है कि पहले मकान तोड़ दो, बाद में बसाहट और मुआवजा राशि दी जाएगी। वहीं SECL में काम करने वाले ठेका मजदूरों और नियमित कर्मचारियों को मकान खाली नहीं करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है।
सबसे बड़ी समस्या बसाहट स्थल को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां बसाहट देने की बात कही जा रही है, वहां न सड़क है, न बिजली, न पानी और न ही कोई अन्य मूलभूत सुविधा। बरसात के इस मौसम में बेदखली होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी, बुजुर्ग बीमार पड़ेंगे और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।
1978 से 2010 तक कोयला उत्खनन के लिए जमीन देने वाले गरीब किसान आज बिना बसाहट और बिना मुआवजे के बेघर होने को मजबूर हैं। इसी के विरोध में ग्रामीण दंडवत करते हुए न्याय यात्रा निकालेंगे। इस यात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग, पुरुष और स्कूली बच्चे लगभग 200 की संख्या में शामिल होंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि बिना बसाहट के हो रही बेदखली और डोजरीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, सभी को व्यवस्थित बसाहट दी जाए और मकान निर्माण तक पर्याप्त समय दिया जाए।
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ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर इसकी सूचना दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना के लिए चार चरणों में वर्ष 1978-79, 1982-83, 1984-85 और अंतिम चरण 2010 में अर्जित की गई थी। अधिग्रहण के 16 साल बाद भी आज तक उन्हें व्यवस्थित बसाहट नहीं दी गई है।
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आरोप है कि वर्तमान में कुसमुंडा के महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल और दर्री तहसीलदार गांव में आकर बिना बसाहट प्रदान किए मकान खाली कराने का दबाव बना रहे हैं। ग्रामीणों को धमकी दी जा रही है कि यदि स्वयं से मकान नहीं तोड़ा तो डोजर चलाकर मकान गिरा दिया जाएगा। डर और भय के कारण कई परिवारों ने अपने मकान तोड़ना शुरू भी कर दिया है, जबकि उन्हें आज तक बसाहट स्थल नहीं दिया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों द्वारा मौखिक रूप से कहा जा रहा है कि पहले मकान तोड़ दो, बाद में बसाहट और मुआवजा राशि दी जाएगी। वहीं SECL में काम करने वाले ठेका मजदूरों और नियमित कर्मचारियों को मकान खाली नहीं करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है।
सबसे बड़ी समस्या बसाहट स्थल को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां बसाहट देने की बात कही जा रही है, वहां न सड़क है, न बिजली, न पानी और न ही कोई अन्य मूलभूत सुविधा। बरसात के इस मौसम में बेदखली होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी, बुजुर्ग बीमार पड़ेंगे और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।
1978 से 2010 तक कोयला उत्खनन के लिए जमीन देने वाले गरीब किसान आज बिना बसाहट और बिना मुआवजे के बेघर होने को मजबूर हैं। इसी के विरोध में ग्रामीण दंडवत करते हुए न्याय यात्रा निकालेंगे। इस यात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग, पुरुष और स्कूली बच्चे लगभग 200 की संख्या में शामिल होंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि बिना बसाहट के हो रही बेदखली और डोजरीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, सभी को व्यवस्थित बसाहट दी जाए और मकान निर्माण तक पर्याप्त समय दिया जाए।

200 परिवारों को बेघर करने के विरोध में दंडवत न्याय यात्रा का ऐलान

200 परिवारों को बेघर करने के विरोध में दंडवत न्याय यात्रा का ऐलान