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फल विक्रेता ने पेश की मानवता की मिसाल: जख्मी उल्लू का रेस्क्यू, इलाज के बाद जंगल में छोड़ा, इस बात का था डर

Thu, 01 Jan 2026 06:38 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 01 Jan 2026 06:38 PM IST
सार

ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में एक घायल उल्लू अचानक फल के ठेले पर जा बैठा, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के अध्यक्ष जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ पहुंचे और सावधानी से उल्लू का रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार किया।

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Injured owl rescued in Korba
जख्मी उल्लू का रेस्क्यू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ट्रांसपोर्ट नगर के व्यस्त इलाके में मानवता का एक सुंदर दृश्य देखने को मिला, जब एक घायल उल्लू अचानक एक फल के ठेले पर जा बैठा। इस दृश्य ने लोगों को हैरान कर दिया, जिन्होंने तुरंत वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के अध्यक्ष जितेंद्र सारथी को सूचित किया। सूचना मिलते ही जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अत्यंत सावधानी से उल्लू का सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक उपचार के बाद, उल्लू को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है जहाँ उसके स्वस्थ होने की व्यवस्था की जा रही है। पूरी तरह ठीक होने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

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चोट का कारण और तांत्रिकों से बचाव
जितेंद्र सारथी ने बताया कि उल्लू के दाएं पैर में चोट के निशान हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किसी दुर्घटना का शिकार हुआ है। चोट के कारण वह उड़ने में असमर्थ था। यह भी एक चिंता का विषय है कि इस प्रजाति के उल्लू का इस्तेमाल तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़े लोग करते हैं। समय रहते लोगों की नजर पड़ने और स्नेक कैचर टीम को सूचना मिलने से इस उल्लू की जान बच सकी और उसका इलाज संभव हुआ। यदि यह गलत लोगों के हाथ लग जाता, तो इसका इस्तेमाल तांत्रिक विधियों में किया जा सकता था।
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रेस्क्यू के दौरान जितेंद्र सारथी ने उल्लू के पर्यावरणीय महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उल्लू खेतों और बस्तियों में चूहों की संख्या को नियंत्रित करके फसलों की रक्षा करता है। यह प्राकृतिक संतुलन का एक महत्वपूर्ण प्रहरी है।
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उल्लू को नुकसान पहुंचाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर खतरा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी घायल या भटके हुए वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं। इसके बजाय, तुरंत वन विभाग या रेस्क्यू टीम के हेल्पलाइन नंबर 8817534455 या 7999622151 पर सूचना दें। इस सराहनीय कार्य से एक बार फिर यह साबित हुआ कि समय पर किया गया रेस्क्यू कई वन्यजीवों को नया जीवन दे सकता है।

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