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कांकेर : मरकनार गांव में नदी पर पुल नहीं होने से संकट में धान बिक्री, हर साल ग्रामीण खुद बनाते हैं रपटा
Mon, 08 Dec 2025 07:54 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 08 Dec 2025 07:54 PM IST
सार
15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन परलकोट क्षेत्र के पखांजूर इलाके के शंकरनगर ग्राम पंचायत के आश्रित गांव मरकनार के ग्रामीणों के सामने धान बेचने की एक बड़ी चुनौती खड़ी है।
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ग्रामीण खुद बनाते हैं रपटा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन परलकोट क्षेत्र के पखांजूर इलाके के शंकरनगर ग्राम पंचायत के आश्रित गांव मरकनार के ग्रामीणों के सामने धान बेचने की एक बड़ी चुनौती खड़ी है। नदी के उस पार बसे इस गांव के लोगों को हर साल धान उपार्जन केंद्र तक पहुंचने के लिए सरकारी मदद का नहीं, बल्कि खुद की मेहनत का सहारा लेना पड़ता है। बारिश का मौसम खत्म होते ही ग्रामीणों को सबसे पहले नदी में आवागमन के लिए रास्ता बनाना होता है। ग्रामीण बांस और पाइप का इस्तेमाल करके अस्थाई पुल, जिसे स्थानीय भाषा में 'रपटा' कहा जाता है, बनाने में जुटे हुए हैं।
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ग्रामीण जयराम सलाम और नंदलाल केरकेट्टा ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं ताकि ट्रैक्टर और अन्य वाहन नदी पार कर सकें और वे अपना धान समर्थन मूल्य पर बेच सकें। बारिश के मौसम में इन ग्रामीणों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा होती है, और बारिश के बाद धान बेचने के लिए उन्हें हर साल इसी तरह रपटा बनाकर कड़ी मशक्कत के बाद उपार्जन केंद्र तक पहुंचना पड़ता है।
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स्थानीय निवासी संभुराम दुग्गा ने बताया कि नदी पर पुलिया न होने के कारण गांव के लोग अब तक धान नहीं बेच पाए हैं।मरकनार गांव के लोग नदी पर एक स्थाई पुलिया की मांग वर्षों से कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी पर पुल नहीं होने की इस गंभीर समस्या पर न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस, किसी भी सरकार ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि हर साल की यह मशक्कत इस बात का प्रमाण है कि विकास के दावों के बावजूद वे आज भी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन जल्द से जल्द उनकी समस्या का स्थाई समाधान करेगा, ताकि हर साल उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए इस तरह जान जोखिम में डालकर रपटा न बनाना पड़े।