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आरक्षण के लिए आंदोलन: सर्व आदिवासी समाज 21 जून से करेगा धरना-प्रदर्शन, मांग पूरी नहीं हुई तो आर्थिक नाकेबंदी

Mon, 12 Jun 2023 05:55 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Mon, 12 Jun 2023 05:55 PM IST
सार

समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष युवा प्रभाग ललित नरेटी ने कहा कि, हमारा क्षेत्र 5वीं अनुसूची क्षेत्र है। इसके लिए अलग नियम कानून है। पेशा नियम को आज गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत है, तभी ग्राम सभा सशक्त और मजबूत होगी। 

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chhattisgarh Sarva Adivasi Samaj will agitate for local reservation from June 21 in bastar
आरक्षण की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने की बैठक। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ में सर्व आदिवासी समाज अब आरक्षण को लेकर आंदोलन की राह पर है। पांचवीं अनुसूचि में स्थानीय आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर 21 जून से बस्तर संभाग के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। समाज ने मांग पूरी नहीं होने पर आर्थिक नाकाबंदी की चेतावनी दी है। इसे लेकर सोमवार को तेतरखूटी वन विद्यालय के पास हुई बैठक में आदिवासी बाहुल्य (5वीं अनुसूची) क्षेत्रों मे स्थानीय आरक्षण बहाल करने, स्थानीय आधार पर भर्ती, अनुसूचित क्षेत्रों मे गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों की जमीन के लीज के संबंध मे पेशा अधिनियम 2022 के संशोधन और अन्य विषयों पर चर्चा की गई। 

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संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि, आदिवासी बाहुल्य  क्षेत्रों में स्थानीय आरक्षण बहाल को लेकर 21 जून को पूरे प्रदेश में धरना प्रदर्शन पर रैली के माध्यम से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया जाएगा मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकाबंदी की जाएगी। अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों की जमीन को लीज के सम्बंध में पेसा अधिनियम 2022 के संशोधन को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा कर संशोधन करने की राज्य सरकार को मांग रखेंगे। स्थानीय आरक्षण बहाल की मांग पर सभी को एक साथ लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।
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सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने बताया कि राज्य की पूर्व और वर्तमान सरकार ने आदिवासी समुदाय को शोषण करने का कार्य किया है। आदिवासी समाज ने हमेशा जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ी है। समाज की ताकत के कारण 32 प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई लड़ी और उसे हासिल किया। इसी तर्ज पर वर्तमान में स्थानीय आरक्षण बहाल को लेकर लड़ाई लड़ने की जरूरत है। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में हजारों बैकलाग पदों पर भर्ती नहीं हुई है, इसीलिए कुछ नियम बनाकर तत्काल भर्ती कराने को लेकर अभी लड़ाई लड़ने की जरूर है। 

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