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बस्तर गोंचा पर्व का शुभारंभ: देव स्नान के साथ निकली चंदन जात्रा, 18 जून तक नहीं होंगे भगवान जगन्नाथ के दर्शन
Sun, 04 Jun 2023 05:26 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Sun, 04 Jun 2023 05:26 PM IST
सार
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष ईश्वर नाथ खबारी ने बताया कि, बस्तर गोंचा पर्व के 615 वर्षों की ऐतिहासिक रियासत कालीन परपरानुसार समस्त पूजा विधान संपन्न किए जाएंगे। जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।
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भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से की गई पूजा।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में रियासत कालीन बस्तर गोंचा पर्व 2023 में देवस्नान चंदन जात्रा पूजा विधान रविवार को श्रीश्री जगन्नाथ मंदिर में संपन्न किया गया। देव स्नान चंदन जात्रा पूजा विधान के तहत 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के ब्राह्मणों ने शताब्दियों पुरानी परंपरानुसार भगवान शालिग्राम का पंचामृत, चंदन और इंद्रावती नदी के पवित्र जल से अभिषेक किया। इसके बाद प्रभु जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और बलभद्र के 22 विग्रहों को मुक्ति मंडप में स्थापित किया गया।
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विग्रहों को मुक्ति मंडप में स्थापित किए जाने के साथ ही भगवान का अनसर काल प्रारंभ हो गया। जो कि, 18 जून तक जारी रहेगा। इस दौरान दर्शन वर्जित होगा। भगवान को औषधीय युक्त विशेष भोग के अर्पण के साथ सेवा होगी, जिसे श्रृद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। 19 जून को नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ प्रभु जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और बलभद्र का दर्शन लाभ श्रद्धालुओं को श्रीमंदिर के गर्भगृह के बाहर होंगे।
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360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष ईश्वर नाथ खबारी ने बताया कि, बस्तर गोंचा पर्व के 615 वर्षों की ऐतिहासिक रियासत कालीन परपरानुसार समस्त पूजा विधान संपन्न किए जाएंगे। जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। 18 जून को नेत्रोउत्सव पूजा विधान के साथ प्रभु जगन्नाथ के दर्शन होंगे। 20 जून को श्रीगोंचा रथ यात्रा पूजा विधान के साथ ही प्रभु जगन्नाथ स्वामी जनकपुरी सिरहासार भवन में नौ दिनों तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थापित होगें। इस दौरान समस्त श्रद्धालुओं को पुण्यलाभ का पावन अवसर प्राप्त होगा।
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