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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Innocent Divya is shouldering the burden of five family members at age of 12 in Balrampur Ramanujganj

Balrampur Ramanujganj: मासूम दिव्य 12 वर्ष की उम्र में उठा रहा है घर के पांच सदस्यों का भार

Wed, 08 Jan 2025 02:43 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 08 Jan 2025 02:43 PM IST
सार

दिव्य के पिता हरिओम जोशी प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे। जिनकी मृत्यु करीब सात-आठ वर्ष पहले हो गई थी। तब दिव्य की उम्र काफी कम थी। पिता के मृत्यु के बाद दुखों का पहाड़ घर पर टूट पड़ा।

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Innocent Divya is shouldering the burden of five family members at age of 12 in Balrampur Ramanujganj
दिव्य उठा रहा घर का भार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस नन्ही सी उम्र में बच्चे खेलते कूदते हैं एवं पढ़ाई करते हैं उस उम्र में दिव्य कुमार जोशी भी जिसकी उम्र महज 12 वर्ष है एवं वह कक्षा सातवीं में पढ़ता है। वह भी बच्चों के समान खेलता कूदता है एवं पढ़ाई करता है साथ अपने दो भाई, दो बहनों का एवं मां का ममोज बेच खर्च का वहन भी कर रहा है। दिव्य अपने घर का दिव्य इकलौत कमाऊ सदस्य है जिस पर नन्ही सी उम्र में पूरे घर का भार आ गया है।

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दिव्य के पिता हरिओम जोशी प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे। जिनकी मृत्यु करीब सात-आठ वर्ष पहले हो गई थी। तब दिव्य की उम्र काफी कम थी। पिता के मृत्यु के बाद दुखों का पहाड़ घर पर टूट पड़ा। मां के द्वारा किसी प्रकार से पालन पोषण किया गया। घर में अन्य स्वजनों का सहयोग मिला तो आजीविका चल रही थी। जब दिव्य की उम्र 10 वर्ष की थी तो वह अपने चाचा के साथ मोमोज बेचने के लिए गांधी चौक के पास ठेला लगाने में सहयोग करना शुरू कर दिया था। वहीं बीते एक वर्ष से वह स्वयं ठेला लगाकर मोमोज बेचता है। चाचा आरागाही में मोमोज बेचने के लिए जाते हैं। 
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दिव्य ने बताया कि प्रतिदिन वह सुबह 6:30 बजे उठ जाता है जिसके बाद वह घूमने जाता है आकर पढ़ाई करता है दिव्य पूर्व माध्यमिक शाला कोइरी टोला में पढ़ाई कर रहा है। स्कूल से वह जब 4 बजे आता है तो आधा घंटा में जल्दी-जल्दी खाना खाकर ठेला लेकर गांधी चौक में ममोज बेचने चला जाता है और 8 बजे तक वह मोमोज बेचता है।
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7 वर्षीय भाई का मिलता है सहयोग
दिव्य के 7 वर्षीय भाई राजकुमार जोशी अपने भाई के सहयोग में हर समय खड़ा रहता है। दुकान करीब 8 बजे प्रतिदिन दिव्य बंद करता है जिसके बाद भाई के सहयोग से ठेला को गंतव्य तक रखकर बर्तन को भाई के साथ धोकर घर जाता है।


स्वादिष्ट है दिव्य का मोमोज 
प्रतिदिन सुबह दिव्य के चाचा, चाची मोमोज बनाने के लिए मटेरियल तैयार कर देते है। जिसे लेकर शाम को दिव्य बेचने आता है दिव्य के मोमोज इतने स्वादिष्ट रहते हैं कि ग्राहक दिव्य के दुकान खुलने का इंतजार करते रहते हैं दिव्य बताता है कि प्रतिदिन 800 से लेकर 1400 रुपय तक रुपए की बिक्री हो जाती है।

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