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छत्तीसगढ़: मासूम को लगा एक्सपायर्ड इंजेक्शन, जांच में खुली अस्पताल की बड़ी लापरवाही; फार्मेसी 15 दिन के लिए सील

Wed, 09 Sep 2026 02:29 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 09 Sep 2026 02:29 PM IST
सार

सिद्धार्थ अस्पताल में साढ़े तीन साल के बच्चे को एक्सपायर्ड एमिकेसिन इंजेक्शन लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। शिकायत पर प्रशासन ने जांच कराई तो अस्पताल की फार्मेसी में उसी बैच के तीन और एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल बरामद हुए।

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Infant received expired injection investigation reveals gross negligence on the part of hospital pharmacy seal
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंबिकापुर जिले के सिद्धार्थ अस्पताल में साढ़े तीन वर्ष के बच्चे को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने अस्पताल की फार्मेसी को 15 दिन के लिए सील कर दिया है। बच्चे के पिता ने कलेक्टर से इसकी शिकायत की थी। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल की फार्मेसी में उसी बैच के तीन और एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल बरामद हुए हैं। फार्मेसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
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सरगुजा जिले के नगर पंचायत लखनपुर निवासी शम्स खान ने अपने  बेटे उमैर खान को सिद्धार्थ अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल के डॉ. वैभव जायसवाल ने बच्चे के इलाज के लिए एमिकेसिन 250एमजीका इंजेक्शन लिखा था। पिता ने यह इंजेक्शन अस्पताल परिसर स्थित फार्मेसी से खरीदा और बच्चे को लगवा दिया। अगले दिन जब पिता ने खाली शीशी की जांच की, तो उस पर बैच नंबर L-24E-5B, निर्माण तिथि 05-2024 और एक्सपायरी तिथि 04-2026 अंकित पाई गई। एक्सपायर्ड इंजेक्शन की जानकारी मिलते ही पिता ने कलेक्टर से लिखित शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की।
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प्रशासनिक जांच ने की फार्मेसी सील
कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को को जांच का जिम्मा सौंपा। सीएमएचओ के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पीके सिन्हा और ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा की टीम अस्पताल पहुंची। टीम ने फार्मेसी में रखी दवाओं के स्टॉक की पड़ताल की, तो उसी बैच के तीन और एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल पाए गए, जिसका इंजेक्शन बच्चे को लगाया गया था। इस पर ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा ने फार्मेसी को सील कर दिया और संचालक से स्पष्टीकरण मांगा है।
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तीन स्तरों पर हुई गंभीर अनदेखी
पूरे प्रकरण में तीन स्तरों पर भारी लापरवाही सामने आई है। जब डॉक्टर ने पर्ची लिखी तो फार्मासिस्ट ने बिना जांच किए एक्सपायर्ड दवा बेच दी। दूसरी चूक बच्चे के पिता से हुई, जिन्होंने दवा खरीदते समय उसकी वैधता तिथि नहीं देखी। तीसरी और सबसे बड़ी लापरवाही इलाज करने वाले डॉक्टर या नर्स के स्तर पर हुई, जिन्होंने बच्चे को इंजेक्शन लगाने से पहले एक्सपायरी तिथि की जांच करना जरूरी नहीं समझा।
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