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राजस्थान के राइट टू हेल्थ बिल का छत्तीसगढ़ में विरोध: HPI और IMA रायपुर ने जताया ऐतराज, सीएम गहलोत को लिखा खत

Mon, 27 Mar 2023 04:22 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Mon, 27 Mar 2023 04:22 PM IST
सार

राजस्थान विधानसभा में पारित राइट टू हेल्थ बिल का छत्तीसगढ़ में विरोध हो रहा है। इसके खिलाफ एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) छत्तीसगढ़ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रायपुर ने आवाज उठाई है।

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HPI and IMA raipur protest on rajasthan Right to Health Bill
IMA के पदाधिकारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजस्थान विधानसभा में पारित राइट टू हेल्थ बिल का छत्तीसगढ़ में विरोध हो रहा है। इसके खिलाफ एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) छत्तीसगढ़ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रायपुर ने आवाज उठाई है। एएचपीआई राजस्थान के राज्यपाल से मिलकर इस बिल पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए अनुरोध करेगा। जब तक कि इस समस्या का निदान न हो जाए। 
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इस संबंध में IMA रायपुर ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को खत भी लिखा है। पत्र में लिखा है कि फिलहाल राइट टू हेल्थ बिल को अगले विचार-विमर्श तक लागू होने से रोका जाए। ऐसा नहीं करने पर पूरे देश के डॉक्टर हड़ताल करेंगे। इस मामले में रायपुर कलेक्टर को भी आज ज्ञापन सौंपा गया है। 
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एएचपीआई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता और महासचिव अतुल सिंघानिया ने कहा कि राजस्थान सरकार ने पहले ही चिरंजीवी योजना के तहत प्रदेशवासियों के इलाज के लिए 25 लाख रुपए तक का बीमा घोषित की है। ऐसे में राइट टू हेल्थ बिल का कोई औचित्य नहीं रह जाता क्योंकि चिरंजीवी योजना के तहत प्रदेश के अधिकांश अस्पताल पहले से ही सेवाएं दे रहे हैं। राजस्थान में 65% से अधिक सामान्य मरीजों और 85% से अधिक गंभीर मरीजों को प्राइवेट सेक्टर की ओर से स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में राजस्थान में लागू राइट टू हेल्थ बिल एकतरफा और अप्रासंगिक है। 
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उन्होंने कहा कि इसे बिना किसी पारदर्शिता के और बिना निजी अस्पताल संचालकों से सामंजस्य बनाए पारित किया गया है।  70% से अधिक अस्पताल कुछ चुनिंदा स्पेशलिटी की सेवाएं ही देते हैं। मल्टीस्पेशलिटी की सुविधाएं केवल कॉरपोरेट अस्पतालों में और टियर 1 श्रेणी के शहरों में ही होती हैं। 

इन बातों पर ऐतराज 

- चिरंजीवी योजना के होते हुए इस बिल का कोई औचित्य नहीं 
- निजी अस्पतालों से बिना सामंजस्य बनाये पारित किया गया बिल 
- 85% से अधिक गंभीर मरीजों का इलाज निजी क्षेत्र करता है 
-  मरीज और डॉक्टर के आपसी विश्वास को कमजोर करेगा राइट टू हेल्थ बिल 
- निजी अस्पतालों का संचालन अव्यवहारिक बनाएगा यह बिल 
- एएचपीआई महामहिम राज्यपाल से बिल पर हस्ताक्षर नहीं करने का करेगा अनुरोध  
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